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क्रय केंद्रों पर ताला, धान कहां बेचें किसान
siddharthnagar
Updated Tue, 06 Nov 2018 10:33 PM IST
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बर्डपुर क्षेत्र के अलीदापुर में बंद पड़ा धान क्रय केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। एक नवंबर से जिले के 52 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू होने के बाद भी अब जनपद में एक क्विंटल धान भी नहीं खरीदा जा सका है। इस कारण समितियों के सचिवों का हड़ताल पर होना बताया जा रहा है। इससे क्रय केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में किसान संशय में हैं कि वे धान कहां बेचें। कई स्थानों किसान आढ़तियों को फसल बेचने के लिए मजबूर हैं। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि समितियों के सचिव दो नवंबर से हड़ताल पर हैं। इस कारण उन्होंने खरीद का बहिष्कार कर दिया है। इसलिए खरीद नहीं हो रही है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही सचिव को मनाकर क्रय शुरू करवाया जाए।
सरकार दे रही धोखा
किसानों का कहना है कि सरकार आय को दोगुना करने बात तो कर रही है, लेकिन जब उपज की समय पर खरीदा ही नहीं होगी दो किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। इटवा तहसील क्षेत्र कि बुढ्ढी खास गांव निवासी किसान मो. इशहाक, सौरहवा ग्रांट गांव निवासी ओमप्रकाश सिंह, कठेला गर्वी गांव निवासी अनारुल्लाह व गदाखौवा गांव निवासी हनुमान का कहना है कि सरकार बार-बार कह रही है किसानों पर ध्यान दिया जा रहा है। एक नवंबर से धान की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक एक भी क्रय केंद्र पर खरीद शुरू नहीं है। अगली खेती से सिर पर ऐसे में औने-पौने दाम पर धान को बेचना पड़ रहा है। सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है।
530 रुपये क्विंटल हो रहा घाटा
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद न होने के कारण किसानों को बाजार में बेचना पड़ रहा है। जहां 1730 रुपये के बजाय किसानों को आढ़तियों के यहां 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ रहा है। इसमें किसानों प्रति क्विंटल 530 रुपये घाटा हो रहा है।
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सरकार दे रही धोखा
किसानों का कहना है कि सरकार आय को दोगुना करने बात तो कर रही है, लेकिन जब उपज की समय पर खरीदा ही नहीं होगी दो किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। इटवा तहसील क्षेत्र कि बुढ्ढी खास गांव निवासी किसान मो. इशहाक, सौरहवा ग्रांट गांव निवासी ओमप्रकाश सिंह, कठेला गर्वी गांव निवासी अनारुल्लाह व गदाखौवा गांव निवासी हनुमान का कहना है कि सरकार बार-बार कह रही है किसानों पर ध्यान दिया जा रहा है। एक नवंबर से धान की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक एक भी क्रय केंद्र पर खरीद शुरू नहीं है। अगली खेती से सिर पर ऐसे में औने-पौने दाम पर धान को बेचना पड़ रहा है। सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है।
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530 रुपये क्विंटल हो रहा घाटा
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद न होने के कारण किसानों को बाजार में बेचना पड़ रहा है। जहां 1730 रुपये के बजाय किसानों को आढ़तियों के यहां 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ रहा है। इसमें किसानों प्रति क्विंटल 530 रुपये घाटा हो रहा है।
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