{"_id":"5ad38a454f1c1b5f098b4aff","slug":"111523812933-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संडे यानी एटीएम की भी छुट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संडे यानी एटीएम की भी छुट्टी
siddharthnagar
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:51 PM IST
विज्ञापन
11.45 बजे ः जिला मुख्यालय स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा का बंद एटीएम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर।अवकाश के कारण रविवार को नियमानुसार बैंकों की शाखाएं बंद थी। ऐसे में लोग एटीएम पर पहुंचे। मगर यहां भी निराश होना पड़ा। कारण कि नगर के साथ ही जिले के अधिकांश एटीएम में कैश नहीं था। ऐसे में लोगों ने उधार के सहारे अपने आवश्यक कार्यों की पूर्ति की।
जिले में पिछले एक माह से कैश किल्लत चल रही है। करेंसी चेस्ट में पर्याप्त नकदी न आने से बैंक शाखाओं में लंबी लाइन लग रही है। फिर भी मांग के अनुरूप खाताधारकों को कैश नहीं मिल पा रहा। ऐसे में एटीएम उनका सहारा बन रहे हैं। रविवार को एटीएम ने भी साथ नहीं दिया। पूरे जिले में 65 एटीएम है। नगर क्षेत्र में ही विभिन्न बैंकों की करीब 15 एटीएम लगे हुए हैं, मगर कोई भी एटीएम चालू नहीं था। शादी, पार्टी जैसे अन्य आयोजनों के लिए पैसे की जरूरत पूरी करने को ग्राहक भटकते रहे। इंदिरानगर निवासी घनश्याम पांडेय ने बताया कि शाखा में कैश नहीं मिल पा रहा। एटीएम में भी नियमित कैश नहीं मिल रहा है। रामू का कहना था कि मेहनत की कमाई सहेज कर बैंकों में इसीलिए रखते हैं कि वक्त पर काम आए, मगर बैंकों की अव्यवस्था से अपना पैसा ही समय पर नहीं मिल पा रहा। इंदिरानगर के ही प्रिंस सिंह, राजेंद्र प्रसाद, वन विभाग कॉलोनी के सुरेश कुमार आदि ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, अमूमन हर संडे को बैंक के साथ एटीएम बंद रहते हैं। कई दिनों से कैश किल्लत बनी हुई है।
200 करोड़ की डिमांड, मिल रहे महज 40 करोड़
सिद्धार्थनगर। जिले में कैश किल्लत का बड़ा कारण करेंसी चेस्ट को पर्याप्त मात्रा में कैश न मिल पाना है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में विभिन्न बैंकों की 144 शाखाओं में नियमित व सुचारु ढंग से काम-काज के लिए प्रतिमाह 200 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके सापेक्ष महज 35-40 करोड़ रुपये ही मिल पा रहे हैं। पिछले दो माह से यही स्थिति है। पर्याप्त कैश न मिलने से शाखाओं में संकट बना हुआ है। जब शाखाओं में ही कैश नहीं है तो फिर एटीएम को कैसे भरा जाएगा।
विज्ञापन
पिछले कुछ समय से जिले में कैश किल्लत बनी हई है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। शनिवार को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के समक्ष भी मामला उठा था। समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन मिला है।
-ओमप्रकाश अग्रहरि, लीड बैंक प्रबंधक।
विज्ञापन
जिले में पिछले एक माह से कैश किल्लत चल रही है। करेंसी चेस्ट में पर्याप्त नकदी न आने से बैंक शाखाओं में लंबी लाइन लग रही है। फिर भी मांग के अनुरूप खाताधारकों को कैश नहीं मिल पा रहा। ऐसे में एटीएम उनका सहारा बन रहे हैं। रविवार को एटीएम ने भी साथ नहीं दिया। पूरे जिले में 65 एटीएम है। नगर क्षेत्र में ही विभिन्न बैंकों की करीब 15 एटीएम लगे हुए हैं, मगर कोई भी एटीएम चालू नहीं था। शादी, पार्टी जैसे अन्य आयोजनों के लिए पैसे की जरूरत पूरी करने को ग्राहक भटकते रहे। इंदिरानगर निवासी घनश्याम पांडेय ने बताया कि शाखा में कैश नहीं मिल पा रहा। एटीएम में भी नियमित कैश नहीं मिल रहा है। रामू का कहना था कि मेहनत की कमाई सहेज कर बैंकों में इसीलिए रखते हैं कि वक्त पर काम आए, मगर बैंकों की अव्यवस्था से अपना पैसा ही समय पर नहीं मिल पा रहा। इंदिरानगर के ही प्रिंस सिंह, राजेंद्र प्रसाद, वन विभाग कॉलोनी के सुरेश कुमार आदि ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, अमूमन हर संडे को बैंक के साथ एटीएम बंद रहते हैं। कई दिनों से कैश किल्लत बनी हुई है।
विज्ञापन
200 करोड़ की डिमांड, मिल रहे महज 40 करोड़
सिद्धार्थनगर। जिले में कैश किल्लत का बड़ा कारण करेंसी चेस्ट को पर्याप्त मात्रा में कैश न मिल पाना है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में विभिन्न बैंकों की 144 शाखाओं में नियमित व सुचारु ढंग से काम-काज के लिए प्रतिमाह 200 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके सापेक्ष महज 35-40 करोड़ रुपये ही मिल पा रहे हैं। पिछले दो माह से यही स्थिति है। पर्याप्त कैश न मिलने से शाखाओं में संकट बना हुआ है। जब शाखाओं में ही कैश नहीं है तो फिर एटीएम को कैसे भरा जाएगा।
विज्ञापन
पिछले कुछ समय से जिले में कैश किल्लत बनी हई है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। शनिवार को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के समक्ष भी मामला उठा था। समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन मिला है।
-ओमप्रकाश अग्रहरि, लीड बैंक प्रबंधक।