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Siddharthnagar News: गंगाराम से हबीबुर्रहमान बनकर किशोरी को अगवा करने वाले को 10 साल की कैद
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सिद्धार्थनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट बीरेंद्र कुमार की अदालत ने मुस्लिम बनकर नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म करने मामले में दोषी बांसी क्षेत्र निवासी गंगाराम उर्फ हबीबुर्रहमान को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 61 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला जनवरी 2020 का है। पीड़ित पिता ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि बांसी क्षेत्र के पिपरा पड़रुपुर निवासी गंगाराम ने उसकी 15 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया है। गंगाराम ने अपना नाम बदलकर हबीबुर्रहमान रख लिया था। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया और नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म व पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया था।
राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित पक्ष की पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि साक्ष्यों के जरिये पता चला कि लड़की को झांस देने के लिए गंगाराम ने अपना नाम हबीबुर्रहमान रख लिया था। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर गंगाराम उर्फ हबीबुर्रहमान को दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास के साथ ही 61 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसकी 90 फीसदी राशि पीड़िता को दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि पीड़िता को राज्य सरकार की तरफ से अधिकतम क्षतिपूर्ति की राशि उसके पुनर्वास के लिए प्रदान की जाए।
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विवेचक पर कार्रवाई के लिए एसपी को दिया आदेश
जांच के दौरान आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए विवेचक एसआई सुभाष चंद्र ने पीड़िता और अभियुक्त की डीएनए की सैंपलिंग कराकर प्रयोगशाला नहीं भेजा। केस डायरी में सैंपल न भेजने का कारण और हालात भी नहीं बताए गए थे। विवेचक ने कानूनी प्रावधानों के तहत दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए आपत्तिजनक और लापरवाही पूर्वक कृत्य किया। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए आरोपी विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को आदेश दिया है।
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मामला जनवरी 2020 का है। पीड़ित पिता ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि बांसी क्षेत्र के पिपरा पड़रुपुर निवासी गंगाराम ने उसकी 15 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया है। गंगाराम ने अपना नाम बदलकर हबीबुर्रहमान रख लिया था। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया और नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म व पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया था।
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राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित पक्ष की पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि साक्ष्यों के जरिये पता चला कि लड़की को झांस देने के लिए गंगाराम ने अपना नाम हबीबुर्रहमान रख लिया था। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर गंगाराम उर्फ हबीबुर्रहमान को दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास के साथ ही 61 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसकी 90 फीसदी राशि पीड़िता को दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि पीड़िता को राज्य सरकार की तरफ से अधिकतम क्षतिपूर्ति की राशि उसके पुनर्वास के लिए प्रदान की जाए।
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विवेचक पर कार्रवाई के लिए एसपी को दिया आदेश
जांच के दौरान आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए विवेचक एसआई सुभाष चंद्र ने पीड़िता और अभियुक्त की डीएनए की सैंपलिंग कराकर प्रयोगशाला नहीं भेजा। केस डायरी में सैंपल न भेजने का कारण और हालात भी नहीं बताए गए थे। विवेचक ने कानूनी प्रावधानों के तहत दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए आपत्तिजनक और लापरवाही पूर्वक कृत्य किया। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए आरोपी विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को आदेश दिया है।