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Shravasti News: कौशाम कुटी में की पूजा-अर्चना
Sat, 06 Jun 2026 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:38 PM IST
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कौशाम कुटी में पूजा के बाद आयोजित सभा में मौजूद बौद्ध अनुयायी।- संवाद
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में शनिवार को महाराष्ट्र के बौद्ध अनुयायियों का दल पहुंचा। सभी ने कौशाम कुटी में अपने रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध ने लोगों को दुखों से मुक्ति पाने का सरल मार्ग बताया है। उन मार्गों पर चलकर लोग दुखों से मुक्ति पा सकते हैं, इससे परलोक भी सुधरता है।
उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में राज-पाट त्याग दिया और सत्य की खोज में निकल पड़े। वर्षों की तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ और वह बुद्ध कहलाए। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन ज्ञान की शिक्षा देने और चार आर्य सत्यों व अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से दुख से मुक्ति के मार्ग को बताने में बिताया। इस मौके पर भंते नागलोक, धम्म सागर, धम्म पिरय, आनंद सागर व निर्मल सागर आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में राज-पाट त्याग दिया और सत्य की खोज में निकल पड़े। वर्षों की तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ और वह बुद्ध कहलाए। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन ज्ञान की शिक्षा देने और चार आर्य सत्यों व अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से दुख से मुक्ति के मार्ग को बताने में बिताया। इस मौके पर भंते नागलोक, धम्म सागर, धम्म पिरय, आनंद सागर व निर्मल सागर आदि मौजूद रहे।
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