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सेना में स्काउट शब्द का अर्थ गुप्तचर
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स्काउट स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में टेंट तैयार करते स्काउट।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। चौधरी राम बिहारी बुद्ध इंटर कॉलेज कटरा में शनिवार से स्काउट स्थापना दिवस सप्ताह मनाया जा रहा है। इसकी शुरूआत विद्यालय के प्रधानाचार्य ने स्काउट ध्वज फहरा कर की। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मुन्नालाल यादव ने कहा कि सेना में स्काउट शब्द का अर्थ होता है गुप्तचर। आज भी सेना में स्काउट होते हैं।
उन्होंने कहा कि स्काउटिंग को सेना के सीमित क्षेत्र से खींचकर जनसाधारण के बालक बालिकाओं तक लाने का एक मात्र श्रेय लार्ड बेडेन पावेल को है। लार्ड पावेल का पूरा नाम राबर्ट स्टिफेन्सन स्मिथ बेडेन पावेल था। उनका जन्म 22 फरवरी 1857 को लंदन में रेवरेंड प्रोफेसर हरबर्ट जार्ज बेडेन पावेल के घर में हुआ था।
बीपी जब तीन वर्ष के ही थे तभी उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। इनकी माता हेनरेटा ग्रेस स्मिथ ने परिवार की देखभाल की। सन 1900 में दक्षिण अफ्रीका में घोर युद्ध के समय इन्हें छोटे छोटे बालकों की असीम शक्ति, अदम्य साहस, कर्तव्य परायणता आदि गुणों का परिचय मिला। इससे लार्ड पावेल को विश्वास हो गया कि बालक युद्ध एवं शांतिकाल दोनों में संसार को कितना लाभ पहुंचा सकते हैं।
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बालकों में छिपी असीम शक्ति और उनके प्रति अपने विश्वास को रचनात्मक रुप देने के लिए उन्होेंने सन् 1907 में ब्राउन सी नामक टापू पर मात्र बीस बालकों के साथ अपना प्रथम शिविर लगाया। इसकी सफलता से प्रेरित होकर बेडेन पावेल ने इस दिशा में और अधिक उत्साह से काम करना शुरू कर दिया था।
बेडेन पावेल की पुस्तक स्काउटिंग फॉर ब्वॉयज का प्रभाव विश्व के अन्य देशों के साथ- साथ भारत पर भी पड़ा। इसके फलस्वरूप भारत में भी स्काउटिंग शुरू करने का प्रयास किया जाने लगा। सन 1910 में भारत में स्काउटिंग के आरंभ होने पर इसमें केवल अंग्रेज तथा एंग्लो इंडियन बच्चों को ही प्रवेश दिया जाता था।
सन 1913 में पं. श्रीराम वाजपेयी ने शाहजहांपुर में भारतीय बच्चों के लिए स्काउटों का एक स्वतंत्र दल खोला। स्काउट शिक्षक राजेश यादव नेे बताया कि 7 नवंबर 1950 को स्काउट को एक किया गया, तभी से स्काउट स्थापना दिवस सप्ताह मनाया जाता है। इस मौके पर बच्चों ने विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसमें पुल निर्माण, टैंक निर्माण, नॉट लगाना आदि का प्रस्तुतीकरण किया। मौके पर शशि भूषण शुक्ला, राजेंद्र कुमार चौहान, तेज कुमार वर्मा, कौशल कुमार यादव, सीपी वर्मा समेत शिक्षक शिक्षिकाएं तथा छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
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उन्होंने कहा कि स्काउटिंग को सेना के सीमित क्षेत्र से खींचकर जनसाधारण के बालक बालिकाओं तक लाने का एक मात्र श्रेय लार्ड बेडेन पावेल को है। लार्ड पावेल का पूरा नाम राबर्ट स्टिफेन्सन स्मिथ बेडेन पावेल था। उनका जन्म 22 फरवरी 1857 को लंदन में रेवरेंड प्रोफेसर हरबर्ट जार्ज बेडेन पावेल के घर में हुआ था।
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बीपी जब तीन वर्ष के ही थे तभी उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। इनकी माता हेनरेटा ग्रेस स्मिथ ने परिवार की देखभाल की। सन 1900 में दक्षिण अफ्रीका में घोर युद्ध के समय इन्हें छोटे छोटे बालकों की असीम शक्ति, अदम्य साहस, कर्तव्य परायणता आदि गुणों का परिचय मिला। इससे लार्ड पावेल को विश्वास हो गया कि बालक युद्ध एवं शांतिकाल दोनों में संसार को कितना लाभ पहुंचा सकते हैं।
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बालकों में छिपी असीम शक्ति और उनके प्रति अपने विश्वास को रचनात्मक रुप देने के लिए उन्होेंने सन् 1907 में ब्राउन सी नामक टापू पर मात्र बीस बालकों के साथ अपना प्रथम शिविर लगाया। इसकी सफलता से प्रेरित होकर बेडेन पावेल ने इस दिशा में और अधिक उत्साह से काम करना शुरू कर दिया था।
बेडेन पावेल की पुस्तक स्काउटिंग फॉर ब्वॉयज का प्रभाव विश्व के अन्य देशों के साथ- साथ भारत पर भी पड़ा। इसके फलस्वरूप भारत में भी स्काउटिंग शुरू करने का प्रयास किया जाने लगा। सन 1910 में भारत में स्काउटिंग के आरंभ होने पर इसमें केवल अंग्रेज तथा एंग्लो इंडियन बच्चों को ही प्रवेश दिया जाता था।
सन 1913 में पं. श्रीराम वाजपेयी ने शाहजहांपुर में भारतीय बच्चों के लिए स्काउटों का एक स्वतंत्र दल खोला। स्काउट शिक्षक राजेश यादव नेे बताया कि 7 नवंबर 1950 को स्काउट को एक किया गया, तभी से स्काउट स्थापना दिवस सप्ताह मनाया जाता है। इस मौके पर बच्चों ने विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसमें पुल निर्माण, टैंक निर्माण, नॉट लगाना आदि का प्रस्तुतीकरण किया। मौके पर शशि भूषण शुक्ला, राजेंद्र कुमार चौहान, तेज कुमार वर्मा, कौशल कुमार यादव, सीपी वर्मा समेत शिक्षक शिक्षिकाएं तथा छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।