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बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि से गूंजी तपोस्थली

Fri, 08 Apr 2022 11:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 11:21 PM IST
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Taposthali resonated with Buddham Sharanam Gachhami, Dhammam Sharanam Gachhami
बौद्घ तपोस्थली में विश्व शांति क लिए दीप मार्च निकालते बौद्घ भिक्षु - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती गुरुवार देर शाम बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि से गूंजायमान हो गई। इस दौरान श्रीलंका मंदिर परिसर से दीप मार्च निकाला गया।
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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो की अध्यक्षता में श्रीलंका मंदिर परिसर से दीप मार्च निकाला गया। जो आनंद बोधि होते हुए गंध कुटी पहुंचा। इस दौरान गंध कुटी पर पूजन हुआ। जहां बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरों ने कहा कि बुद्ध ने बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद अपने ज्ञान का प्रथम प्रवचन सारनाथ के नजदीक मृगदाव में दिया। यह उपदेश धर्म चक्र परिवर्तन कहलाया। जो बौद्ध मत की शिक्षाओं का मूल बिंदू है। महात्मा बुद्ध के उपदेशों और बौद्ध धर्म के विचारों को त्रिपिटकों में समाहित किया गया। सुतपिटक में बुद्ध के धार्मिक विचारों और वचनों का संग्रह किया गया है।
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वहीं विनय पिटक में बौद्ध संघ के नियम लिखे गए। जबकि अभिधम्मपिटक में बौद्ध दर्शन की विवेचना की गई है। इसके साथ ही प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत जिसे महात्मा बुद्ध ने शिक्षा का सार कहा उसका भी बौद्ध धर्मावलंबियों के बीच बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। इनके अलावा जातक कथाएं जिनमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएं हैं, अश्वघोष की रचनाएं जैसे बुद्धचरित, सौदरानंद, सारिपुत्र, प्रकरण, नागसेन का मिलिंद पंहों और बुद्ध घोष का विसुद्धमग्ग में भी बौद्ध दर्शन और बुद्ध के कथनों की विवेचना की गई।
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महाबोधि सोसाइटी इंडिया के सचिव बौद्ध भिक्षु शिवली महाथेरो ने कहा कि बुद्ध ने ईश्वर और आत्मा को नहीं माना। उन्होंने सृष्टि का विश्लेषण कारणवाद के आधार पर किया। जिसमें विवेक पर आधारित तर्क की प्रधानता थी। यह एक तरह से भारत के धर्मों के इतिहास में क्रांति थी। हालांकि यह धर्म काफी उदार और जनतांत्रिक भी था। जिसमें सत्य, अहिंसा, प्रेम और करुणा पर काफी जोर था। भगवान बुद्ध ने यथार्थ के सही स्वरूप को पहचान कर मनुष्य को अपनी पूरी मानवीय क्षमताओं का विकास करने और जीवन मरण के चक्र से छुटकारा पाकर मुक्ति प्राप्त करने के सरल, सहज और सुगम राह दिखाया।

बुद्ध की सिखाई शिक्षा ने अहिंसा और जीव मात्र के प्रति दया की भावना जगाकर न केवल मनुष्य बल्कि पशुओं के प्रति भी अपने प्रेम को उजागर किया। प्रचीनतम बौद्ध ग्रंथ सुत्तनिकाय में गाय को भोजन, रूप और सुख देने वाली अन्नदा वन्नदा सुखदा कहा गया है। उन्होंने भलाई करके बुराई को भगाने और प्रेम करके घृणा को भगाने का प्रयास जीवन भर किया और यही उपदेश दुनिया को दिया, जो आज भी बेहद प्रासंगिक है। इस दौरान सभी उपासक मौजूद रहे।
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