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गर्भवती की हत्या के मामले में मां-बेटे को आजीवन कारावास
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श्रावस्ती। दहेज के लालच में सात वर्ष पूर्व चार माह की गर्भवती की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मंगलवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय ने मां बेटे को आजीवन कारावास और एक लाख बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि बहराइच के थाना रिसिया क्षेत्र के ग्राम इमामनगर की निवासिनी हशमतुल्लनिसा ने 28 जुलाई 2015 को सोनवा थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें बताया कि उसकी पुत्री हबीबुनिशा (21) का निकाह 16 फरवरी 2015 को सोनवा थाना क्षेत्र के नारायणपुर निवासी शराफत अली के साथ हुआ था। शराफत अली व उसकी मां रजिया बेगम द्वारा शादी के बाद से ही कम दहेज लाने का ताना दिया जाता था। 27 जुलाई की रात करीब दो बजे हबीबुनिशा को मारने पीटने के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मृतका की मां की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर न्यायालय में चार्जशीट भेजी।
मामले के विचारण के बाद अपर जिला सत्र न्यायालय (त्वरित न्यायालय) अजय सिंह ने अभियोजन पक्ष के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज देव गुप्ता की दलील व साक्ष्य के आधार पर दोष सिद्ध करते हुए शराफत अली व उसकी मां रजिया बेगम को आजीवन कारावास व 60- 60 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि बहराइच के थाना रिसिया क्षेत्र के ग्राम इमामनगर की निवासिनी हशमतुल्लनिसा ने 28 जुलाई 2015 को सोनवा थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें बताया कि उसकी पुत्री हबीबुनिशा (21) का निकाह 16 फरवरी 2015 को सोनवा थाना क्षेत्र के नारायणपुर निवासी शराफत अली के साथ हुआ था। शराफत अली व उसकी मां रजिया बेगम द्वारा शादी के बाद से ही कम दहेज लाने का ताना दिया जाता था। 27 जुलाई की रात करीब दो बजे हबीबुनिशा को मारने पीटने के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मृतका की मां की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर न्यायालय में चार्जशीट भेजी।
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मामले के विचारण के बाद अपर जिला सत्र न्यायालय (त्वरित न्यायालय) अजय सिंह ने अभियोजन पक्ष के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज देव गुप्ता की दलील व साक्ष्य के आधार पर दोष सिद्ध करते हुए शराफत अली व उसकी मां रजिया बेगम को आजीवन कारावास व 60- 60 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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