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मशरूम की खेती कर माली हालत सुधारें किसान
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श्रावस्ती। किसान कम भूमि में मशरूम की खेती कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। इससे जहां उन्हें प्रोटीन युक्त भोजन मिलेगा। वहीं अच्छा पैसा भी मिलेगा। किसान सौ रुपये खर्च कर तीन से चार गुने का फायदा कमा सकते हैं।
ये बातें मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने किसानों के प्रशिक्षण के दौरान कही। उन्होंने बताया कि मशरूम आजीविका का साधन होने के साथ ही प्रोटीन का स्रोत भी है। किसान इसे अपनाकर अपनी पूंजी को संचित कर धन, धान्य से पूर्ण हो सकता है। इसमें किसानों को तीन से चार गुना फायदा होगा। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रोहित कुमार पांडे ने बताया कि एक निश्चित जमीन पर फसल पैदा करने में जो मुनाफा होता है। उसी भूमि पर यदि मशरूम की खेती की जाए तो 12 गुने तक फायदा होगा। इसमें किसी तरह की अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं होती।
शारीरिक रूप से कमजोर वृद्ध महिलाएं भी इस व्यवसाय को अपनाकर अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल प्रताप सिंह दोहरे ने कहाकि मशरूम पैदा करना सबसे आसान होता है। इससे फायदा होगा। बिना किसी उन्नत तकनीकी के किसान इसे शुरू कर सकता है। केंद्र के पादप प्रजनन के वैज्ञानिक डॉ. उमेश बाबू ने बटन मशरूम में लगने वाले रोगों से बचाव के बारे में जानकारी दिया। मृदा वैज्ञानिक डॉ. राम भरोसे ने बटन मशरूम की कंपोस्ट बनाने की विधियों के बारे में बताया। इस दौरान प्रशिक्षण में सुशील सिंह सहित करीब बीस किसान मौजूद रहे।
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ये बातें मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने किसानों के प्रशिक्षण के दौरान कही। उन्होंने बताया कि मशरूम आजीविका का साधन होने के साथ ही प्रोटीन का स्रोत भी है। किसान इसे अपनाकर अपनी पूंजी को संचित कर धन, धान्य से पूर्ण हो सकता है। इसमें किसानों को तीन से चार गुना फायदा होगा। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रोहित कुमार पांडे ने बताया कि एक निश्चित जमीन पर फसल पैदा करने में जो मुनाफा होता है। उसी भूमि पर यदि मशरूम की खेती की जाए तो 12 गुने तक फायदा होगा। इसमें किसी तरह की अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं होती।
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शारीरिक रूप से कमजोर वृद्ध महिलाएं भी इस व्यवसाय को अपनाकर अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल प्रताप सिंह दोहरे ने कहाकि मशरूम पैदा करना सबसे आसान होता है। इससे फायदा होगा। बिना किसी उन्नत तकनीकी के किसान इसे शुरू कर सकता है। केंद्र के पादप प्रजनन के वैज्ञानिक डॉ. उमेश बाबू ने बटन मशरूम में लगने वाले रोगों से बचाव के बारे में जानकारी दिया। मृदा वैज्ञानिक डॉ. राम भरोसे ने बटन मशरूम की कंपोस्ट बनाने की विधियों के बारे में बताया। इस दौरान प्रशिक्षण में सुशील सिंह सहित करीब बीस किसान मौजूद रहे।
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