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राप्ती ने तोड़ा 33 वर्ष पुराना अपना ही रिकार्ड
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श्रावस्ती। राप्ती नदी ने अपना ही 33 वर्ष पुराना रिकार्ड तोड़ दिया है। नदी गुरुवार को सभी रिकार्ड तोड़ते हुए 129.10 मीटर का आंकड़ा पार कर चुकी है। नया रिकार्ड बनाने के लिए नदी लगातार बढ़ रही है। यह रिकार्ड 12 जुलाई 1979 से अधिक है। जब लगातार बारिश व पहाड़ों से आए पानी के कारण नदी का जलस्तर सबसे अधिक था।
राप्ती नदी वैसे तो श्रावस्ती के लिए जीवनदायिनी है। लेकिन बरसात के समय यह किसी शोक से कम नहीं है। इस नदी में नेपाल के पहाड़ों सहित जिले के मैदानी क्षेत्र में होने वाली वर्षा का पानी एकत्र होकर बहता है। पहले की बाढ़ के आंकड़ों से इतर देखा जाए तो 1978 से लेकर 1983 तक प्रतिवर्ष आई बाढ़ ने इतनी तबाही मचाई कि कई गांव विस्थापित हो गए। यहां तक कि भिारत नेपाल के बीच की सरहद का नक्शा ही बदल गया।
1979 में आई बाढ़ ने लोगों को अंदर तक हिला कर रख दिया। यह वह समय था। जब इस बाढ़ की विभीषिका को देखने लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हवाई सर्वे करना पड़ा। 12 जुलाई 1979 की रात से प्रारंभ हुई बरसात 14 जुलाई 1979 तक अनवरत होती रही। पहाड़ों पर हुई व्यापक वर्षा से 16 जुलाई 1979 को हाई फ्लड लेवल जो उस समय भकला नाले पर रिकार्ड किया जाता था। वहां 119.820 दर्ज किया गया, जबकि यहां का न्यूनतम जलस्तर 117.65 मीटर था। यह श्रावस्ती के इतिहास में पूर्व में दर्ज बाढ़ में सबसे बड़ा आंकड़ा था।
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लेकिन इस आंकड़े को राप्ती ने इस वर्ष खुद ही तोड़ दिया। चार अक्टूबर की रात ढाई बजे से लगातार हो रही बरसात ने अपने ही आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। राप्ती नदी बैराज पर नदी का जलस्तर गुरुवार सुबह आठ बजे तक 129.10 मीटर दर्ज की गई है। यह आंकड़ों लगातार बढ़ता जा रहा है। उम्मीद है कि यह आकड़ा 130 को पार कर सकता है। भारी तबाही की आशंका है।
2014 के आंकड़े को भी बाढ़ ने छोड़ा पीछे
अभी हाल ही में आई बाढ़ में सबसे गंभीर आंकड़ा 2014 का है। जब 15 अगस्त के दिन आई बाढ़ से बहराइच भिनगा फोरलेन नदी में बह गया था। लेकिन उस समय भी भिनगा नगर में आए पानी का जलस्तर डेढ़ से दो फिट था। लेकिन इस समय पूरे नगर में दो से तीन फिट पानी भरा हुआ है। कहीं कहीं निचली जमीन में बने मकान भी पानी में डूबे हुए हैं।
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राप्ती नदी वैसे तो श्रावस्ती के लिए जीवनदायिनी है। लेकिन बरसात के समय यह किसी शोक से कम नहीं है। इस नदी में नेपाल के पहाड़ों सहित जिले के मैदानी क्षेत्र में होने वाली वर्षा का पानी एकत्र होकर बहता है। पहले की बाढ़ के आंकड़ों से इतर देखा जाए तो 1978 से लेकर 1983 तक प्रतिवर्ष आई बाढ़ ने इतनी तबाही मचाई कि कई गांव विस्थापित हो गए। यहां तक कि भिारत नेपाल के बीच की सरहद का नक्शा ही बदल गया।
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1979 में आई बाढ़ ने लोगों को अंदर तक हिला कर रख दिया। यह वह समय था। जब इस बाढ़ की विभीषिका को देखने लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हवाई सर्वे करना पड़ा। 12 जुलाई 1979 की रात से प्रारंभ हुई बरसात 14 जुलाई 1979 तक अनवरत होती रही। पहाड़ों पर हुई व्यापक वर्षा से 16 जुलाई 1979 को हाई फ्लड लेवल जो उस समय भकला नाले पर रिकार्ड किया जाता था। वहां 119.820 दर्ज किया गया, जबकि यहां का न्यूनतम जलस्तर 117.65 मीटर था। यह श्रावस्ती के इतिहास में पूर्व में दर्ज बाढ़ में सबसे बड़ा आंकड़ा था।
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लेकिन इस आंकड़े को राप्ती ने इस वर्ष खुद ही तोड़ दिया। चार अक्टूबर की रात ढाई बजे से लगातार हो रही बरसात ने अपने ही आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। राप्ती नदी बैराज पर नदी का जलस्तर गुरुवार सुबह आठ बजे तक 129.10 मीटर दर्ज की गई है। यह आंकड़ों लगातार बढ़ता जा रहा है। उम्मीद है कि यह आकड़ा 130 को पार कर सकता है। भारी तबाही की आशंका है।
2014 के आंकड़े को भी बाढ़ ने छोड़ा पीछे
अभी हाल ही में आई बाढ़ में सबसे गंभीर आंकड़ा 2014 का है। जब 15 अगस्त के दिन आई बाढ़ से बहराइच भिनगा फोरलेन नदी में बह गया था। लेकिन उस समय भी भिनगा नगर में आए पानी का जलस्तर डेढ़ से दो फिट था। लेकिन इस समय पूरे नगर में दो से तीन फिट पानी भरा हुआ है। कहीं कहीं निचली जमीन में बने मकान भी पानी में डूबे हुए हैं।