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भूख न लगना, रात में पसीना आना टीबी के प्रमुख लक्षण
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श्रावस्ती। सीएमओ कार्यालय में बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए सीएमओ ने टीबी के लक्षणों के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने टीबी के लक्षण दिखने वाले लोगों से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर नि:शुल्क इलाज कराने की अपील की। ताकि जिला सहित देश व प्रदेश को टीबी मुक्त किया जा सके।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने कहा कि वर्तमान में टीबी रोग समाज में तेजी से फैल रहा है। टीबी मरीजों की पहचान हम लक्षणों के आधार पर आसानी से कर सकते हैं। टीबी के बारे में सभी आमजनमानस को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने टीबी के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि दो सप्ताह या अधिक समय से खांसी व बुखार आना, बलगम में खून आना, सीने में दर्द होना, वजन का कम होना, भूख न लगना और रात में पसीना होना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। टीबी की जांच, दवाएं जिले के 10 माइक्रोस्कोपी केंद्रों पर उपलब्ध हैं। साथ ही टीबी मरीजो को पोषण के लिए सरकार की ओर से पांच सौ रुपये प्रतिमाह दिया जाता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संत कुमार ने कहा कि टीबी का नियमित और पूरे समय तक इलाज न लेने पर टीबी की बीमारी और जटिल हो जाती है। जिसे एमडीआर एवं एक्सडीआर टीबी कहा जाता है। इसका उपचार 9 से 18 माह तक चलता है। यदि टीबी का नया मरीज चिकित्सक की सलाह एवं नियमानुसार बताए गए समयावधि तक पूरा इलाज लेता है तो वह छह माह में पूरी तरह रोग मुक्त हो जाता है। जिला कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार मिश्र ने बताया कि वर्ष 2021 में अभी तक कुल 1365 मरीज चिह्नित किए गए हैं। जिनमें 12 मरीज निजी स्वास्थ्य सेवा द्वारा चिह्नित किए गए हैं। इस दौरान संदीप कुमार सिंह, सौरभ कटियार, अनुपम श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय कृमि अभियान की शुरुआत
जिला क्षय रोग केंद्र से बुधवार को राष्ट्रीय कृमि अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान सीएमओ ने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को प्रति छह माह पर कीड़े की दवा खा लेनी चाहिए। शासन के निर्देश पर 25 नवंबर तक राष्ट्रीय कृमि अभियान चलाकर एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चो को घर-घर जाकर एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. संत कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक से दो साल तक के बच्चों को दो चम्मच पीसकर एवं 2 साल 19 साल तक के बच्चों को चबाकर दवा खिलाएंगी। दवा का सेवन बंद कमरे के बजाए खुले में करें। यदि कोई बच्चा बीमार है तो चिकित्सक की सलाह के बाद अथवा स्वस्थ होने पर ही दवा का सेवन कराएं। अभियान के लिए सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कुछ बच्चों में दवा खाने के कारण मामूली दुष्प्रभाव जैसे जी मचलाना, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द और थकान होने की संभावना रहती है। यह दुष्प्रभाव क्षणिक होते हैं जो आसानी से संभाले जा सकते हैं। ऐसा होने पर खुली व हवादार जगह में लिटाकर साफ पानी पिलाएं। इस मौके पर कार्यक्रम समन्वयक बबिता बाजपेयी आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने कहा कि वर्तमान में टीबी रोग समाज में तेजी से फैल रहा है। टीबी मरीजों की पहचान हम लक्षणों के आधार पर आसानी से कर सकते हैं। टीबी के बारे में सभी आमजनमानस को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने टीबी के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि दो सप्ताह या अधिक समय से खांसी व बुखार आना, बलगम में खून आना, सीने में दर्द होना, वजन का कम होना, भूख न लगना और रात में पसीना होना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। टीबी की जांच, दवाएं जिले के 10 माइक्रोस्कोपी केंद्रों पर उपलब्ध हैं। साथ ही टीबी मरीजो को पोषण के लिए सरकार की ओर से पांच सौ रुपये प्रतिमाह दिया जाता है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संत कुमार ने कहा कि टीबी का नियमित और पूरे समय तक इलाज न लेने पर टीबी की बीमारी और जटिल हो जाती है। जिसे एमडीआर एवं एक्सडीआर टीबी कहा जाता है। इसका उपचार 9 से 18 माह तक चलता है। यदि टीबी का नया मरीज चिकित्सक की सलाह एवं नियमानुसार बताए गए समयावधि तक पूरा इलाज लेता है तो वह छह माह में पूरी तरह रोग मुक्त हो जाता है। जिला कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार मिश्र ने बताया कि वर्ष 2021 में अभी तक कुल 1365 मरीज चिह्नित किए गए हैं। जिनमें 12 मरीज निजी स्वास्थ्य सेवा द्वारा चिह्नित किए गए हैं। इस दौरान संदीप कुमार सिंह, सौरभ कटियार, अनुपम श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय कृमि अभियान की शुरुआत
जिला क्षय रोग केंद्र से बुधवार को राष्ट्रीय कृमि अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान सीएमओ ने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को प्रति छह माह पर कीड़े की दवा खा लेनी चाहिए। शासन के निर्देश पर 25 नवंबर तक राष्ट्रीय कृमि अभियान चलाकर एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चो को घर-घर जाकर एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. संत कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक से दो साल तक के बच्चों को दो चम्मच पीसकर एवं 2 साल 19 साल तक के बच्चों को चबाकर दवा खिलाएंगी। दवा का सेवन बंद कमरे के बजाए खुले में करें। यदि कोई बच्चा बीमार है तो चिकित्सक की सलाह के बाद अथवा स्वस्थ होने पर ही दवा का सेवन कराएं। अभियान के लिए सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कुछ बच्चों में दवा खाने के कारण मामूली दुष्प्रभाव जैसे जी मचलाना, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द और थकान होने की संभावना रहती है। यह दुष्प्रभाव क्षणिक होते हैं जो आसानी से संभाले जा सकते हैं। ऐसा होने पर खुली व हवादार जगह में लिटाकर साफ पानी पिलाएं। इस मौके पर कार्यक्रम समन्वयक बबिता बाजपेयी आदि कर्मचारी मौजूद रहे।