{"_id":"659c4286aa60627bd4087964","slug":"had-brought-along-the-brick-of-the-disputed-structure-srawasti-news-c-104-slko1050-3051-2024-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shravasti News: साथ उठा लाए थे विवादित ढांचे की ईंट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shravasti News: साथ उठा लाए थे विवादित ढांचे की ईंट
विज्ञापन
अब बच्चों को सुनाते राम मंदिर आंदोलन की कहानी संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। राम जन्मभूमि पर रामलला प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रहा है। इस प्राण प्रतिष्ठा को लगभग 500 साल के आंदोलन की परिणति माना जा रहा है। राम मंदिर निर्माण को लेकर 1990 में हुए आंदोलन में जिले से लगभग दो सौ से अधिक कारसेवकों ने हिस्सा लिया था। इसमें से कुछ तो अयोध्या पहुंच गए। जबकि कुछ रास्ते से ही गिरफ्तार हो गए। इन्हीं आंदोलनकारियों में से इकौना के धर्मपाल सोनी भी थे। जिन्होंने कारसेवा भी की और अपने साथ विवादित ढांचे की एक ईंट व तोड़ने के इस्तेमाल में लिया गया राॅड भी साथ उठा लाए। ऐसे कई आंदोलनकारियों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
विहिप के आह्वान पर कारसेवा के लिए निकले थे
जिले में विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर वह भी कार सेवा के लिए घर से बिना बताए निकले थे। हमारे साथ इकौना के पांच अन्य लोग थे। हम लोग गांव के रास्ते गोंडा के नवाबगंज तक पहुंच गए। आगे जांच ज्यादा हो रही थी। रात को उस इलाके से एक बरात अयोध्या की ओर जा रही थी। हम सभी लोग बारात में ही शामिल हो गए। अयोध्या का नजारा ही अलग था। जगह-जगह पर पुलिस थी। लेकिन चारों ओर से जय श्रीराम की गूंज थी। वहां उमा भारती का माइक से भाषण प्रसारित हो रहा था। वह सभी से हनुमान चालीसा का पाठ करने को कह रही थी। दोपहर का समय था। पुलिस ने हम लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। साथ गए लोग बिखर गए। मैं एक मराठी जत्थे के साथ बैरिकेडिंग तोड़ कर विवादित ढांचे के पास पहुंच गया था। ढांचे के सामने पहुंचते ही जिसके हाथ में जो आया। वह उसी से ढांचा तोड़ने का प्रयास करने लगा। मेरे हाथ में एक पाइप लगी। उसी से ढांचा तोड़ने का प्रयास किया। इसी बीच पुलिस आ गई। खूब लाठी चली। वहां से खदेड़ दिया गया, लेकिन वहां से भागते समय अपने अगौछें में विवादित ढांचे की एक टूटी ईंट के साथ वह पाइप ले आया। श्रीराम जन्म भूमि मंदिर में दर्शन की बहुत बड़ी अभिलाषा है। -धर्मपाल सोनी, इकौना के कारसेवक
साथियों की रास्ते में हो गई थी गिरफ्तारी
भिनगा के डाॅ. विश्वनाथ मिश्र बताते हैं कि कारसेवा के लिए करीब 50 लोगों के साथ वह अयोध्या जा रहे थे। जिनके साथियों की रास्ते में गिरफ्तारी हो गई। किसी तरह वह छिपते छिपाते अयोध्या पहुंचे। लेकिन वहां पता चला कि आज गोंडा व बहराइच जिले की कार्य सेवा नहीं है। जब तक उनका नंबर आता विवादित ढांचा गिराया जा चुका था। चारों ओर कर्फ्यू लग गया था।
विज्ञापन
कारसेवकों को स्थायी जेल में कर दिया गया बंद
पूर्व शिक्षक बाबू राम गुप्ता बताते हैं कि 30 अक्तूबर 1984 को वह मंदिर आंदोलन के लिए अयोध्या जा रहे थे। लेकिन रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्हें राजा भिनगा चंद्रमणि कांत सिंह के साथ करीब 150 लोगों को बहराइच डिग्री काॅलेज में बनाए गए अस्थाई जेल में बंद कर दिया गया। जबकि एक अन्य कारसेवक समयदीन गुप्ता बताते हैं कि वह कार्य सेवा के लिए जाते समय गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिए गए थे। आज वह राम लला के दर्शन के लिए लालायित है।
विज्ञापन
श्रावस्ती। राम जन्मभूमि पर रामलला प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रहा है। इस प्राण प्रतिष्ठा को लगभग 500 साल के आंदोलन की परिणति माना जा रहा है। राम मंदिर निर्माण को लेकर 1990 में हुए आंदोलन में जिले से लगभग दो सौ से अधिक कारसेवकों ने हिस्सा लिया था। इसमें से कुछ तो अयोध्या पहुंच गए। जबकि कुछ रास्ते से ही गिरफ्तार हो गए। इन्हीं आंदोलनकारियों में से इकौना के धर्मपाल सोनी भी थे। जिन्होंने कारसेवा भी की और अपने साथ विवादित ढांचे की एक ईंट व तोड़ने के इस्तेमाल में लिया गया राॅड भी साथ उठा लाए। ऐसे कई आंदोलनकारियों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
विहिप के आह्वान पर कारसेवा के लिए निकले थे
जिले में विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर वह भी कार सेवा के लिए घर से बिना बताए निकले थे। हमारे साथ इकौना के पांच अन्य लोग थे। हम लोग गांव के रास्ते गोंडा के नवाबगंज तक पहुंच गए। आगे जांच ज्यादा हो रही थी। रात को उस इलाके से एक बरात अयोध्या की ओर जा रही थी। हम सभी लोग बारात में ही शामिल हो गए। अयोध्या का नजारा ही अलग था। जगह-जगह पर पुलिस थी। लेकिन चारों ओर से जय श्रीराम की गूंज थी। वहां उमा भारती का माइक से भाषण प्रसारित हो रहा था। वह सभी से हनुमान चालीसा का पाठ करने को कह रही थी। दोपहर का समय था। पुलिस ने हम लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। साथ गए लोग बिखर गए। मैं एक मराठी जत्थे के साथ बैरिकेडिंग तोड़ कर विवादित ढांचे के पास पहुंच गया था। ढांचे के सामने पहुंचते ही जिसके हाथ में जो आया। वह उसी से ढांचा तोड़ने का प्रयास करने लगा। मेरे हाथ में एक पाइप लगी। उसी से ढांचा तोड़ने का प्रयास किया। इसी बीच पुलिस आ गई। खूब लाठी चली। वहां से खदेड़ दिया गया, लेकिन वहां से भागते समय अपने अगौछें में विवादित ढांचे की एक टूटी ईंट के साथ वह पाइप ले आया। श्रीराम जन्म भूमि मंदिर में दर्शन की बहुत बड़ी अभिलाषा है। -धर्मपाल सोनी, इकौना के कारसेवक
विज्ञापन
साथियों की रास्ते में हो गई थी गिरफ्तारी
भिनगा के डाॅ. विश्वनाथ मिश्र बताते हैं कि कारसेवा के लिए करीब 50 लोगों के साथ वह अयोध्या जा रहे थे। जिनके साथियों की रास्ते में गिरफ्तारी हो गई। किसी तरह वह छिपते छिपाते अयोध्या पहुंचे। लेकिन वहां पता चला कि आज गोंडा व बहराइच जिले की कार्य सेवा नहीं है। जब तक उनका नंबर आता विवादित ढांचा गिराया जा चुका था। चारों ओर कर्फ्यू लग गया था।
विज्ञापन
कारसेवकों को स्थायी जेल में कर दिया गया बंद
पूर्व शिक्षक बाबू राम गुप्ता बताते हैं कि 30 अक्तूबर 1984 को वह मंदिर आंदोलन के लिए अयोध्या जा रहे थे। लेकिन रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्हें राजा भिनगा चंद्रमणि कांत सिंह के साथ करीब 150 लोगों को बहराइच डिग्री काॅलेज में बनाए गए अस्थाई जेल में बंद कर दिया गया। जबकि एक अन्य कारसेवक समयदीन गुप्ता बताते हैं कि वह कार्य सेवा के लिए जाते समय गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिए गए थे। आज वह राम लला के दर्शन के लिए लालायित है।