{"_id":"69ff8adb1460e3c75702f84a","slug":"followers-worshipped-the-bodhi-tree-shravasti-news-c-104-1-slko1011-120021-2026-05-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shravasti News: अनुयायियों ने बोधिवृक्ष का किया दर्शन-पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shravasti News: अनुयायियों ने बोधिवृक्ष का किया दर्शन-पूजन
Sun, 10 May 2026 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 10 May 2026 12:58 AM IST
विज्ञापन
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में दर्शन-पूजन करते श्रीलंका के अनुयायी। -संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षुणी दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से बोधिवृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षुणी दीपालोक महाथेरो ने भगवान बुद्ध के श्रावस्ती स्थित जेतवन में दिए गए उपदेशों का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध ने निर्वाण संबंधी धर्मोपदेश देकर भिक्षुओं को गहन ज्ञान प्रदान किया था।
एक बार पापीमार ने कृषक का रूप धारण कर भगवान बुद्ध को भ्रमित करने का प्रयास किया। मार ने भगवान से पूछा कि वे उसकी इंद्रियों, रूप और मन से कैसे बच सकते हैं। उसने दावा किया कि सभी इंद्रियां और उनसे जुड़े अनुभव उसी के अधीन हैं।
विज्ञापन
इस पर भगवान बुद्ध ने पापीमार को ललकारते हुए कहा कि जहां आंख, रूप और उनसे जुड़े विज्ञानायतन नहीं हैं, वहां उसकी कोई गति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंद्रियों से परे ही पापीमार का प्रभाव समाप्त हो जाता है। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसके इतिहास की जानकारी ली।
विज्ञापन
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षुणी दीपालोक महाथेरो ने भगवान बुद्ध के श्रावस्ती स्थित जेतवन में दिए गए उपदेशों का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध ने निर्वाण संबंधी धर्मोपदेश देकर भिक्षुओं को गहन ज्ञान प्रदान किया था।
विज्ञापन
एक बार पापीमार ने कृषक का रूप धारण कर भगवान बुद्ध को भ्रमित करने का प्रयास किया। मार ने भगवान से पूछा कि वे उसकी इंद्रियों, रूप और मन से कैसे बच सकते हैं। उसने दावा किया कि सभी इंद्रियां और उनसे जुड़े अनुभव उसी के अधीन हैं।
विज्ञापन
इस पर भगवान बुद्ध ने पापीमार को ललकारते हुए कहा कि जहां आंख, रूप और उनसे जुड़े विज्ञानायतन नहीं हैं, वहां उसकी कोई गति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंद्रियों से परे ही पापीमार का प्रभाव समाप्त हो जाता है। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसके इतिहास की जानकारी ली।