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भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग बदहाल, नहीं हो रहा निर्माण

Sat, 06 Jun 2020 09:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 09:45 PM IST
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Bhinaga Laxmanpur road is bad, construction is not going on
श्रावस्ती। बरसात की शुरुआत होते ही लक्ष्मनपुर भिनगा मार्ग की याद अधिकारियों को आने लगती है। वहीं बरसात बीत जाने के बाद से ही अधिकारी इस समस्या को भी भूल जाते हैं। ऐसा विगत तीन वर्ष से हो रहा है। अधिकारी इस सड़क को जल्द से जल्द ठीक कराने का आश्वासन देते आ रहे हैं। जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।
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लक्ष्मनपुर भिनगा संपर्क मार्ग कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह रास्ता बलरामपुर के ललिया शिवपुरा सहित कई अन्य क्षेत्रों को श्रावस्ती से जोड़ता है। इसी रोड से लक्ष्मनपुर, जोखवा का भी मुख्यालय से संपर्क होता है। यह दोनों बाजार जनपद की आखिरी सीमा पर है। इसी के बाद बलरामपुर प्रारंभ हो जाता है।
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वहीं व्यापारिक नजरिये से देखे तो यह संपर्क मार्ग कई मामलों में महत्वपूर्ण है। नवोदय स्कूल जाना हो या फिर कई अन्य महत्वपूर्ण ग्राम पंचायतों से संपर्क करना हो, तब भी यही रास्ता काम आता है। रास्ते की स्थिति ऐसी है कि उस पर वाहन से चलना तो दूर पैदल जाना भी मुश्किल भरा है। दोनों तरफ की पटरियां कई जगह पर कट चुकी हैं।
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पुल के बगल बने गड्ढे हादसे को दावत दे रहे हैं। तीन मीटर चौड़ी सिंगल सड़क होने के कारण यदि एक तरफ से वाहन आए तो दूसरे तरफ से आने वाले वाहन को कहीं जगह देख कर खड़ा होना पड़ता है। वर्ष में कई बार इस सड़क के जर्जर स्थिति के कारण हादसे होते हैं।
इन सब कठिनाइयों के बाद भी सड़क के निर्माण व मरम्मत के लिए कभी भी पहल नहीं की गई। वहीं बरसात शुरू होने के साथ ही स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अधिकारियों को मौके पर आना पड़ता है। कई बार जिलाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और वहां उन्होंने सड़क को जल्द ठीक कराने का आश्वासन दिया, लेकिन यह कभी भी पूरा नहीं हो पाता है।
भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग को भुजंगा के पास एक डिप दो भागों में बांटती है। इस डिप पर भिनगा जंगल के केन नाले का पानी बरसात में तेज बहाव से बहता है। इस दौरान इस रोड पर आने जाने वाले लोगों को स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ती है। चार से छह व्यक्ति मोटर साइकिल को पकड़ कर दूसरी ओर पहुंचाते हैं।
इसके लिए 100 से 500 रुपये तक कि मजदूरी भी वसूली जाती है। विगत वर्ष बरसात में इस समस्या को देखते हुए स्थानीय लोगों ने यहां पर खर लकड़ी मिट्टी डालकर पानी का डायवर्जन बनाया था। इस डायवर्जन को बनाने में लगभग पंद्रह दिन का समय लगा। कई स्थानीय नेता इस काम में लगे। अधिकारियों ने आकर आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान होगा। लेकिन बरसात बीतते ही आश्वासन भी उसी के साथ बह गया।
विगत कई वर्षों से इस मार्ग के निर्माण व केन नाले की कटान के कारण बने डिप पर पुल निर्माण को लेकर संघर्षरत स्थानीय संत सर्वेश जी महराज बताते हैं कि वह लगातार तीन वर्ष से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व सूचना मिली थी कि डिप निर्माण के लिए किसी को ठेका मिला है। ठेकेदार मौके पर आया सामान भी गिरवाया। कुछ ही दिन में वह सामान समेट कर चला गया। इस दौरान जो पहले आने जाने का रास्ता था। वह भी खोद कर खराब कर दिया। इसी के बाद कोई भी इधर देखने तक नहीं आया।

वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि डिप निर्माण के साथ ही सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई है। लॉकडाउन के बाद सभी स्थानों पर काम बंद हो गया था। इसीलिए वहां भी काम बंद हुआ। जल्द ही ठेेकेदार अपना काम पूरा करेगा।
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