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Shravasti News: अंगुलिमाल स्तूप जर्जर, नहीं हो रही मरम्मत
Sat, 29 Mar 2025 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 29 Mar 2025 11:45 PM IST
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तपोस्थली स्थित अंगुलीमाल स्तूप।
कटरा (श्रावस्ती)। तथागत भगवान बुद्ध की तपोस्थली में प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक व बौद्ध अनुयायी आते हैं। जिनसे पर्यटन विभाग शुल्क भी लेता है। इसके बावजूद इन प्राचीन भग्रावशेषों की न तो मरम्मत हो रही है, और न ही उन्हें संरक्षित करने का कोई प्रयास हो रहा है।
अंगुलिमाल स्तूप आयताकार चबूतरे पर बना एक सीढ़ीदार स्तूप है। इसकी संरचना कुषाण काल की है। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुलने वाले स्तूप में प्रवेश के लिए विदेशी मेहमानों से 300 रुपये व भारतीय नागरिकों से 25 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाता है। राप्ती नदी में आई बाढ़ से स्तूप क्षतिग्रस्त भी हो चुका है। बल्कि इसके गिरने का खतरा भी रहता है। इसके बावजूद न तो इसकी मरम्मत हुई न ही इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। पर्यटन विभाग ने अंगुलिमाल में पर्यटकों को जाने से रोकने के लिए चारों तरफ मोटी सरिया की बैरिकेडिंग कराई गई है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक व अनुयायी न तो इसके अंदर की संरक्षचना देख पा रहे हैं और न ही इसे छू पाते हैं। लोगों को इसका मलाल रहता है।
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अंगुलिमाल स्तूप आयताकार चबूतरे पर बना एक सीढ़ीदार स्तूप है। इसकी संरचना कुषाण काल की है। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुलने वाले स्तूप में प्रवेश के लिए विदेशी मेहमानों से 300 रुपये व भारतीय नागरिकों से 25 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाता है। राप्ती नदी में आई बाढ़ से स्तूप क्षतिग्रस्त भी हो चुका है। बल्कि इसके गिरने का खतरा भी रहता है। इसके बावजूद न तो इसकी मरम्मत हुई न ही इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। पर्यटन विभाग ने अंगुलिमाल में पर्यटकों को जाने से रोकने के लिए चारों तरफ मोटी सरिया की बैरिकेडिंग कराई गई है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक व अनुयायी न तो इसके अंदर की संरक्षचना देख पा रहे हैं और न ही इसे छू पाते हैं। लोगों को इसका मलाल रहता है।
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