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बुद्ध के सामने तलवार छोड़ भिक्षु बन गया अंगुलिमाल : देवानंद
Mon, 17 Nov 2025 12:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:41 AM IST
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तपोस्थली में प्रार्थना करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। कंबोडिया के अनुयायियों का 30 सदस्यीय दल रविवार को बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में तपोस्थली में पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने बताया कि डाकू अंगुलिमाल ने 999 लोगों की हत्या की थी। उसने महीनों जंगल में बिना ठीक से खाए, सोए और बिना आराम के बिताए थे। वह अपना कर्ज चुकाने व सभ्य जीवन जीने के लिए बेचैन था। वह जिसे भी मारता था, उसकी उंगली काटकर माला बना लेता था।
अंगुलिमाल ने हजारवीं हत्या के लिए ठाना था कि अगर उसकी मां भी सामने आ जाएंगी, तो वह उनकी भी हत्या कर उंगली काट लेगा। यह जानकारी होने पर भगवान बुद्ध जंगल पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें जंगल में जाने से रोका, लेकिन बुद्ध नहीं रुके।
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अंगुलिमाल की मां जैसे ही जंगल में दाखिल हुईं, वह उनकी हत्या करने के लिए आगे बढ़ा। तभी भगवान बुद्ध वहां पहुंच गए। इससे अंगुलिमाल ने अपना प्रण पूरा करने के लिए मां के बजाय बुद्ध को मारने की ठान ली। वह बुद्ध के पीछे तलवार लेकर दौड़ा, लेकिन पैदल चल रहे बुद्ध तक पहुंच नहीं पाया।
वह बुद्ध पर चिल्लाया, इस पर बुद्ध ने खुद के स्थिर होने की बात कही। साथ ही अंगुलिमाल के अस्थिर होने के चलते उन्हें पकड़ न पाने की बात कही। बुद्ध की बातें सुन अंगुलिमाल का मन बदल गया और वह हत्या करना छोड़कर भिक्षु बन गया।
सभा के बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर वहां का इतिहास जाना।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने बताया कि डाकू अंगुलिमाल ने 999 लोगों की हत्या की थी। उसने महीनों जंगल में बिना ठीक से खाए, सोए और बिना आराम के बिताए थे। वह अपना कर्ज चुकाने व सभ्य जीवन जीने के लिए बेचैन था। वह जिसे भी मारता था, उसकी उंगली काटकर माला बना लेता था।
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अंगुलिमाल ने हजारवीं हत्या के लिए ठाना था कि अगर उसकी मां भी सामने आ जाएंगी, तो वह उनकी भी हत्या कर उंगली काट लेगा। यह जानकारी होने पर भगवान बुद्ध जंगल पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें जंगल में जाने से रोका, लेकिन बुद्ध नहीं रुके।
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अंगुलिमाल की मां जैसे ही जंगल में दाखिल हुईं, वह उनकी हत्या करने के लिए आगे बढ़ा। तभी भगवान बुद्ध वहां पहुंच गए। इससे अंगुलिमाल ने अपना प्रण पूरा करने के लिए मां के बजाय बुद्ध को मारने की ठान ली। वह बुद्ध के पीछे तलवार लेकर दौड़ा, लेकिन पैदल चल रहे बुद्ध तक पहुंच नहीं पाया।
वह बुद्ध पर चिल्लाया, इस पर बुद्ध ने खुद के स्थिर होने की बात कही। साथ ही अंगुलिमाल के अस्थिर होने के चलते उन्हें पकड़ न पाने की बात कही। बुद्ध की बातें सुन अंगुलिमाल का मन बदल गया और वह हत्या करना छोड़कर भिक्षु बन गया।
सभा के बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर वहां का इतिहास जाना।