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चिलवरिया चीनी मिल पर किसानों का 13 करोड़ बकाया
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श्रावस्ती। जिले के किसानों का एक ही चीनी मिल करीब 13 करोड़ रुपये पिछला ही दबाए बैठी है। वहीं इस सत्र में नई खरीद भी शुरू होने वाली है। पिछला पैसा किसानों को कब मिलेगा, इसकी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। यही नहीं कुछ अन्य चीनी मिल भी जिले के किसानों से गन्ना लेती हैं। इनमें पिराई सत्र प्रारंभ होने वाला है, लेकिन अभी तक इन मिलों से किसानों को खरीद पर्ची ही नहीं मिली है। इसको लेकर गन्ना किसान परेशान हैं।
जिले में नगदी फसल के रूप में गन्ना ही बोया जाता है। यह फसल कभी भी किसानों के बुरे वक्त पर काम नहीं आई। पूरे साल इंतजार के बाद भी किसानों को मील से समय पर गन्ने का भुगतान नहीं मिल रहा है। भुगतान रोकने में सबसे आगे बहराइच की चिलवरिया चीनी मिल है। मिल पर श्रावस्ती जिले के किसानों का अब तक करीब तेरह करोड़ रुपये बकाया है।
यह पैसा किसानों को कब मिलेगा इसकी भी जानकारी न तो गन्ना समिति दे पा रही है, और न ही चीनी मिल। वहीं दूसरी ओर दूसरे सत्र के लिए गन्ना खरीद शुरू होने जा रही है। चिलवरिया चीनी मिल 27 नवंबर से प्रारंभ होगी। इस वर्ष भी इस चीनी मिल को श्रावस्ती का सर्वाधिक गन्ना रकबा 439 हेक्टेअर का आवंटन है। ऐसे में सैकड़ों किसान इस बार भी गन्ना बेचने के बाद भुगतान का इंतजार करेंगे।
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श्रावस्ती जिले का गन्ना तीन चीनी मिलों को बाटा जाता है। सर्वाधिक गन्ना रकबा चिलवरिया चीनी मिल को आवंटित है। बलरामपुर चीनी मिल बलरामपुर व बजाज चीनी मिल मनिकापुर को भी यहां के किसान अपना गन्ना बेचते हैं। बजाज व बलरामपुर चीनी मिल से किसानों को समय से पैसा मिलता है, लेकिन चिलवरिया चीनी मिल का पैसा सालों तक लटका रहता है।
गिलौला के मलावा में गन्ना तौल केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं कटरा में व जमुनहा मेंशिकारी चौड़ा में गन्ना तौल केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। जो चीनी मिल के पेराई सत्र से पूर्व बन कर तैयार हो जाएंगे।
एडीएम योगानंद पांडेय ने बताया कि चिलवरिया चीनी मिल पर लगभग 13 करोड़ का बकाया है। इसकी वसूली के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन मिल ने भुगतान नहीं किया। यह तथ्य मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में भी रखा गया था। इससे नाराज सीएम ने इस मिल पर एफआईआर का आदेश भी दिया है।
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जिले में नगदी फसल के रूप में गन्ना ही बोया जाता है। यह फसल कभी भी किसानों के बुरे वक्त पर काम नहीं आई। पूरे साल इंतजार के बाद भी किसानों को मील से समय पर गन्ने का भुगतान नहीं मिल रहा है। भुगतान रोकने में सबसे आगे बहराइच की चिलवरिया चीनी मिल है। मिल पर श्रावस्ती जिले के किसानों का अब तक करीब तेरह करोड़ रुपये बकाया है।
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यह पैसा किसानों को कब मिलेगा इसकी भी जानकारी न तो गन्ना समिति दे पा रही है, और न ही चीनी मिल। वहीं दूसरी ओर दूसरे सत्र के लिए गन्ना खरीद शुरू होने जा रही है। चिलवरिया चीनी मिल 27 नवंबर से प्रारंभ होगी। इस वर्ष भी इस चीनी मिल को श्रावस्ती का सर्वाधिक गन्ना रकबा 439 हेक्टेअर का आवंटन है। ऐसे में सैकड़ों किसान इस बार भी गन्ना बेचने के बाद भुगतान का इंतजार करेंगे।
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श्रावस्ती जिले का गन्ना तीन चीनी मिलों को बाटा जाता है। सर्वाधिक गन्ना रकबा चिलवरिया चीनी मिल को आवंटित है। बलरामपुर चीनी मिल बलरामपुर व बजाज चीनी मिल मनिकापुर को भी यहां के किसान अपना गन्ना बेचते हैं। बजाज व बलरामपुर चीनी मिल से किसानों को समय से पैसा मिलता है, लेकिन चिलवरिया चीनी मिल का पैसा सालों तक लटका रहता है।
गिलौला के मलावा में गन्ना तौल केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं कटरा में व जमुनहा मेंशिकारी चौड़ा में गन्ना तौल केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। जो चीनी मिल के पेराई सत्र से पूर्व बन कर तैयार हो जाएंगे।
एडीएम योगानंद पांडेय ने बताया कि चिलवरिया चीनी मिल पर लगभग 13 करोड़ का बकाया है। इसकी वसूली के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन मिल ने भुगतान नहीं किया। यह तथ्य मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में भी रखा गया था। इससे नाराज सीएम ने इस मिल पर एफआईआर का आदेश भी दिया है।