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यमुना में उफान से ग्रामीणों में दहशत
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:32 PM IST
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कैराना में बढ़ता यमुना नदी का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के कैराना में हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार पानी छोड़ने से जलस्तर बढ़ता जा रहा है। जिससे क्षेत्र के बाशिंदों की धड़कने तेज हो गई हैं। यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते खादर क्षेत्र में फसलें भी डूब गई हैं।
यमुना नदी एक बार फिर उफान पर है। पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार वर्षा के चलते हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। रविवार को यमुना नदी अधिकतम 45,592 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जिसके बाद सोमवार को कैराना यमुना ब्रिज पर स्थित मीटर पर डेढ़ मीटर जलस्तर की बढ़ोतरी के बाद यमुना चेतावनी बिंदु 230 मीटर पर पहुंच गई। वहीं, सोमवार को बैराज से यमुना में अधिकतम 50,812 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किए जाने का असर मंगलवार को कैराना यमुना पुल पर देखने को मिला। सुबह से ही जलस्तर में बढ़ोतरी होती गई, जिसके बाद 60 मीटर तक वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद यमुना का जलस्तर 230.60 मीटर पर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 231 मीटर पर है। शाम पांच बजे यमुना का जलस्तर 230.60-70 पर चलता रहा। यानी कभी जलस्तर बढ़ रहा था, तो कभी घट जाता था।
उधर, यमुना के निरंतर बढ़ते जलस्तर से खादर क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों बीघा धान आदि की फसलें पानी में समा गई, जिस कारण किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि यमुना में और पानी छोड़ा गया, तो और नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्षेत्र के तटवर्ती बाशिंदे जिस प्रकार यमुना का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, उससे बाढ़ के खतरे को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। ड्रेनेज विभाग के अधिकारी भी अलर्ट है और क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। उधर, हथिनीकुंड बैराज के कंट्रोल रूम से मालूम चला कि मंगलवार को सुबह आठ बजे 1,34,912 क्यूसेक पानी यमुना में डिस्चार्ज किया गया। हालांकि बाद में पानी की मात्रा कम होती गई। मंगलवार को बैराज से जो पानी छोड़ा गया है, वह देर रात तक कैराना क्षेत्र में पहुंच जाएगा, जिसके बाद जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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यमुना से कटान, फसलों को नुकसान
पिछले 24 घंटे यमुना नदी का जलस्तर 2.10 मीटर तक बढ़ा है, जिस कारण यमुना नदी ने क्षेत्र में कटान भी शुरू कर दिया गया है, जिसके बाद यमुना का पानी धीरे-धीरे किसानों की फसलों में घुस रहा है। अब तक नंगलाराई, रामडा, सहपत, हैदरपुर आदि गांवों में किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें यमुना में समा गयी है। यदि यमुना के यही हालात रहे, तो किसानों को और भी क्षति पहुंच सकती है।
मंगलवार को डिस्चार्ज हुआ पानी
समय---------------- क्यूसेक
सुबह 8 बजे 1,34,912
सुबह 9 बजे 1,34,912
सुबह 10 बजे 1,27,000
सुबह 11 बजे 1,27,000
दोपहर 12 बजे 1,20,000
दोपहर 1 बजे 92,000
दोपहर 2 बजे 73,000
दोपहर 3 बजे 58,000
शाम 4 बजे 50,000
किसानों के लिए आफत बन कर आई बारिश
शामली। पिछले तीन दिनों की बरसात किसानों के लिए आफत बन कर आई। बारिश से ऊन ब्लाक के किसानों को सबसे ज्यादा धान की फसल को क्षति का अनुमान लगाया गया है। ऊन ब्लाक में 40 प्रतिशत, थानाभवन ब्लाक के 30 और शामली ब्लाक में 25 प्रतिशत धान की फसल को क्षति होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिले में कैराना-ऊन ब्लाक का यमुना खादर धान की बेल्ट है। पिछले 15 दिनों से धान की अगेती कटाई चल रही है। ऊन क्षेत्र में धान की अगेती फसल की कटाई जोर शोर से चल रही है। पिछले तीन दिनों तक रुक रुककर हुई बूंदाबांदी किसानों के लिए आफत बनकर आई है। धान की अगेती फसल को ज्यादातर नुकसान पहुंचा हैं। ज्यादातर धान की अगेती फसल को ऊन ब्लाक के किसानों को हुआ हैं।
अधिकारियों के मुताबिक ऊन ब्लाक में किसानों की धान की फसल को 40 प्रतिशत, थानाभवन में 30 व शामली-कैैराना ब्लाक में 25 प्रतिशत क्षति का अनुमान है। ऊन ब्लाक के खोड़समा गांव में सुशील की छह बीघा, राजवीर की 14 बीघा में सात बीघा, राजपाल की 20 बीघा, उदयवीर की छह बीघा, पुष्पेंद्र की 50 बीघा, यशपाल फूसगढ़ में 40 बीघा, कंवरपाल की 36 बीघा, महक सिंह की 36 बीघा, सुबोध राममेहर की 10-10 बीघा, मांगेराम की 13 बीघा, हरपाल की आठ बीघा, रामफल की 10 बीघा, जयपाल की पांच बीघा, रविंद्र 10 बीघा, बबलू 25 बीघा की धान की फसल की फसल गिर जाने से नुकसान पहुंचा है।
थानाभवन क्षेत्र के हसनपुर लुहारी गांव के रामकुमार की बीस बीघा में धान की छह बीघा, रामपाल की 40 बीघा में 25 बीघा, रामभूल की 15 बीघा में दस बीघा राजेश सैनी की 25 बीघा में से 16 बीघा, श्रीचंद की 40 बीघा में से 25 बीघा, मांगेराम दादा की 50 बीघा में से 30 बीघा फसल गिरने से क्षति पहुंची है। कुतुबगढ़ गांव में मांगेराम में 60 बीघा में 30 बीघा धान की फसल में पानी भर गया है। धान की फसल में पानी की निकासी न होने से पके हुए धान के खेतों में ज्यादा नुकसान हुआ है। उधर, उपनिदेशक कृषि निदेशक शिवकुमार केसरी ने बताया कि जिले में धान की फसल को क्षति जरूर हुई है। धान की पकी फसल को ज्यादा क्षति हुई है। लोटपोट फसल के दाने पर असर पड़ेगा।
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यमुना नदी एक बार फिर उफान पर है। पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार वर्षा के चलते हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। रविवार को यमुना नदी अधिकतम 45,592 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जिसके बाद सोमवार को कैराना यमुना ब्रिज पर स्थित मीटर पर डेढ़ मीटर जलस्तर की बढ़ोतरी के बाद यमुना चेतावनी बिंदु 230 मीटर पर पहुंच गई। वहीं, सोमवार को बैराज से यमुना में अधिकतम 50,812 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किए जाने का असर मंगलवार को कैराना यमुना पुल पर देखने को मिला। सुबह से ही जलस्तर में बढ़ोतरी होती गई, जिसके बाद 60 मीटर तक वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद यमुना का जलस्तर 230.60 मीटर पर पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 231 मीटर पर है। शाम पांच बजे यमुना का जलस्तर 230.60-70 पर चलता रहा। यानी कभी जलस्तर बढ़ रहा था, तो कभी घट जाता था।
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उधर, यमुना के निरंतर बढ़ते जलस्तर से खादर क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों बीघा धान आदि की फसलें पानी में समा गई, जिस कारण किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि यमुना में और पानी छोड़ा गया, तो और नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्षेत्र के तटवर्ती बाशिंदे जिस प्रकार यमुना का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, उससे बाढ़ के खतरे को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। ड्रेनेज विभाग के अधिकारी भी अलर्ट है और क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। उधर, हथिनीकुंड बैराज के कंट्रोल रूम से मालूम चला कि मंगलवार को सुबह आठ बजे 1,34,912 क्यूसेक पानी यमुना में डिस्चार्ज किया गया। हालांकि बाद में पानी की मात्रा कम होती गई। मंगलवार को बैराज से जो पानी छोड़ा गया है, वह देर रात तक कैराना क्षेत्र में पहुंच जाएगा, जिसके बाद जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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यमुना से कटान, फसलों को नुकसान
पिछले 24 घंटे यमुना नदी का जलस्तर 2.10 मीटर तक बढ़ा है, जिस कारण यमुना नदी ने क्षेत्र में कटान भी शुरू कर दिया गया है, जिसके बाद यमुना का पानी धीरे-धीरे किसानों की फसलों में घुस रहा है। अब तक नंगलाराई, रामडा, सहपत, हैदरपुर आदि गांवों में किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें यमुना में समा गयी है। यदि यमुना के यही हालात रहे, तो किसानों को और भी क्षति पहुंच सकती है।
मंगलवार को डिस्चार्ज हुआ पानी
समय---------------- क्यूसेक
सुबह 8 बजे 1,34,912
सुबह 9 बजे 1,34,912
सुबह 10 बजे 1,27,000
सुबह 11 बजे 1,27,000
दोपहर 12 बजे 1,20,000
दोपहर 1 बजे 92,000
दोपहर 2 बजे 73,000
दोपहर 3 बजे 58,000
शाम 4 बजे 50,000
किसानों के लिए आफत बन कर आई बारिश
शामली। पिछले तीन दिनों की बरसात किसानों के लिए आफत बन कर आई। बारिश से ऊन ब्लाक के किसानों को सबसे ज्यादा धान की फसल को क्षति का अनुमान लगाया गया है। ऊन ब्लाक में 40 प्रतिशत, थानाभवन ब्लाक के 30 और शामली ब्लाक में 25 प्रतिशत धान की फसल को क्षति होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिले में कैराना-ऊन ब्लाक का यमुना खादर धान की बेल्ट है। पिछले 15 दिनों से धान की अगेती कटाई चल रही है। ऊन क्षेत्र में धान की अगेती फसल की कटाई जोर शोर से चल रही है। पिछले तीन दिनों तक रुक रुककर हुई बूंदाबांदी किसानों के लिए आफत बनकर आई है। धान की अगेती फसल को ज्यादातर नुकसान पहुंचा हैं। ज्यादातर धान की अगेती फसल को ऊन ब्लाक के किसानों को हुआ हैं।
अधिकारियों के मुताबिक ऊन ब्लाक में किसानों की धान की फसल को 40 प्रतिशत, थानाभवन में 30 व शामली-कैैराना ब्लाक में 25 प्रतिशत क्षति का अनुमान है। ऊन ब्लाक के खोड़समा गांव में सुशील की छह बीघा, राजवीर की 14 बीघा में सात बीघा, राजपाल की 20 बीघा, उदयवीर की छह बीघा, पुष्पेंद्र की 50 बीघा, यशपाल फूसगढ़ में 40 बीघा, कंवरपाल की 36 बीघा, महक सिंह की 36 बीघा, सुबोध राममेहर की 10-10 बीघा, मांगेराम की 13 बीघा, हरपाल की आठ बीघा, रामफल की 10 बीघा, जयपाल की पांच बीघा, रविंद्र 10 बीघा, बबलू 25 बीघा की धान की फसल की फसल गिर जाने से नुकसान पहुंचा है।
थानाभवन क्षेत्र के हसनपुर लुहारी गांव के रामकुमार की बीस बीघा में धान की छह बीघा, रामपाल की 40 बीघा में 25 बीघा, रामभूल की 15 बीघा में दस बीघा राजेश सैनी की 25 बीघा में से 16 बीघा, श्रीचंद की 40 बीघा में से 25 बीघा, मांगेराम दादा की 50 बीघा में से 30 बीघा फसल गिरने से क्षति पहुंची है। कुतुबगढ़ गांव में मांगेराम में 60 बीघा में 30 बीघा धान की फसल में पानी भर गया है। धान की फसल में पानी की निकासी न होने से पके हुए धान के खेतों में ज्यादा नुकसान हुआ है। उधर, उपनिदेशक कृषि निदेशक शिवकुमार केसरी ने बताया कि जिले में धान की फसल को क्षति जरूर हुई है। धान की पकी फसल को ज्यादा क्षति हुई है। लोटपोट फसल के दाने पर असर पड़ेगा।