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Shamli News: जहां बताए फर्मों के निशान, वहां मिले खाली मैदान

Mon, 31 Jul 2023 12:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jul 2023 12:45 AM IST
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Where the marks of the firms were mentioned, empty grounds were found there
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मंडल शामली के सहायक आयुक्त तापस चक्रवर्ती
शामली। नोएडा में फर्जी तरीके से कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कराकर 15 हजार करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े के मामले के तार शामली और बागपत जिले से भी जुड़ गए हैं। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मंडल शामली के अधिकारियों की जांच में शामली की तीन जबकि बागपत जिले की दो बोगस फर्में सामने आईं हैं, जिनके माध्यम से लेनदेन किया। जांच के लिए टीम बागपत और शामली पहुंची तो धरातल पर फर्म मिली ही नहीं, खाली मैदान मिला। जीएसटी के अधिकारियों ने मेरठ और नोएडा के अधिकारियों को पांचों बोगस फर्मों के बारे में जानकारी उपलब्ध करा दी है। पांचों फर्मों का पंजीकरण भी रद्द किया गया है। इसके अलावा कई अन्य फर्मों की जांच पड़ताल में भी विभागीय अधिकारी जुट गए हैं। चार टीमें गोपनीय तरीके से जांच में जुटी हैं। बागपत के स्थानीय अधिकारियों से भी जांच में सहयोग लिया जा रहा है।
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नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने एक जून को 2660 फर्जी कंपनी बनाकर जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराकर 15 हजार करोड़ से अधिक का फ्रॉड करने वाले एक अंतरराज्यीय रैकेट का खुलासा किया था। इन जालसाजों ने पिछले पांच साल से फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी रिफंड आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) प्राप्त कर सरकार को हजारों करोड़ का चूना लगाया था। पुलिस ने इस गिरोह में शामिल महिला समेत कई जालसाज को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में नोएडा पुलिस के साथ राज्य व केंद्र की जीएसटी टीम भी जांच कर रही है।
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केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मंडल शामली के सहायक आयुक्त तापस चक्रवर्ती ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने मंडल कार्यालय से भी बोगस फर्मों के बारे में सहयोग मांगा था। जिस पर स्थानीय चार सदस्यीय टीम ने जांच की। जांच में मंडल की पांच फर्में बोगस निकलीं। धरातल पर भी उनका कोई आफिस नहीं था। जिन स्थानों पर फर्म बताई जा रही थी, वहां पर खाली मैदान मिला। रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी गई है। बोगस फर्म का पंजीकरण रद्द करते हुए नोटिस जारी किया गया है।
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- इस तरह खेल करते हैं शातिर

सीए आकाश जीएसटी के खेल को उदाहरण के साथ समझाते हैं। मान लीजिए, एक व्यापारी सोहन है। उन्होंने 100 रुपए का माल खरीदा। जिस पर उन्होंने 18 रुपए का जीएसटी पेमेंट दिखाया। अब आगे 150 रुपए में वही माल बेचा गया। जिस पर जीएसटी 27 रुपए होता है। लेकिन, 18 रुपए पहले ही पेमेंट कर चुका है। ऐसे में अब सोहन को 9 रुपए ही जमा करने हैं। जबकि व्यापारी पिछले ट्रांजेक्शन के 18 रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) अप्लाई करके भुगतान लेगा। कुछ इसी तरह से फर्जी कंपनियों के लाखों के ट्रांजेक्शन दिखाकर जालसाज आईटीसी अप्लाई करके पेमेंट लेते हैं। जीएसटी डिपार्टमेंट को धोखाधड़ी का पता इसलिए नहीं चला, क्योंकि इस चेन में कई कंपनियां रहतीं थीं। सबसे आखिरी की कंपनी डिफॉल्टर दिखाई जाती थी।

- अन्य लोगों के डाक्यूमेंट्स करते हैं प्रयोग
सूत्रों के अनुसार, बोगस फर्म के माध्यम से करोड़ों का लेनदेन करने वाली कंपनियों के शातिर अन्य लोगों के पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से फर्जीवाड़ा करते हैं। नोएडा में पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन, दो लग्जरी कारें बरामद कर चुकी हैं। हालांकि, इस मामले में अभी कई अन्य की तलाश जारी है।


- फर्जी कागजों के आधार पर बनतीं हैं कंपनियां
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फर्जी कागजातों के आधार पर फर्जी कंपनी बनाई जाती है। इसी फर्जी कंपनी के माध्यम से अन्य को अपने साथ जोड़कर लेनदेन किया जाता है। गिरोह दो तरीके से फ्रॉड करता था। गिरोह की पहली टीम फर्जी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल आदि का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बनाती थी। इसके बाद इसका जीएसटी नंबर लिया जाता था। वहीं दूसरी टीम फर्जी कंपनी के नाम पर फर्जी बिल बनवाकर जीएसटी रिफंड प्राप्त कर सरकार को चूना लगाती थी।
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