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आखिर कहां बनता है आयुष्मान गोल्डन कार्ड

Wed, 19 Dec 2018 12:13 AM IST
Deepak Sharma शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो Published by: Deepak Sharma Updated Wed, 19 Dec 2018 12:13 AM IST
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Where is the Ayushman Golden Card?
problem - फोटो : अमर उजाला
शामली। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत बनने वाले आयुष्मान गोल्डन कार्ड के लाभार्थी  जानकारी के अभाव में भटक रहे हैं। जिले में अभी तक 36,545 लाभार्थियों के सापेेक्ष अभी तक लगभग चार हजार गोल्डन कार्ड ही बन सके हैं।   केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को पांच लाख रुपये तक फ्री इलाज कराने की व्यवस्था की है। शामली जिले में इस योजना से लाभान्वित होने वाली सूची में 36,545 परिवारों को शामिल किया गया है। विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में अभी तक लगभग चार हजार कार्ड बन चुके हैं। मुख्य वजह लाभार्थियों को जानकारी का अभाव सामने आया है।
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कॉमन सर्विस सेंटर पर बन रहे गोल्डन कार्ड : शामली। आयुष्मान गोल्डन कार्ड जिले के कॉमन सर्विस सेंटर पर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने 30 रुपये सरकारी शुल्क निर्धारित किया गया है। सेंटर से लाभार्थियों को लेमिनेशन कर कार्ड उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। कॉमन सर्विस सेंटर की जिला प्रबंधक आंचल संगल ने बताया कि कैंप में चौथे दिन मंगलवार शाम चार बजे तक लगभग साढ़े छह सौ कार्ड बनाए जा चुके हैं।
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कैंप के बारे में नियमित रूप से एनाउंसमेंट व अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार कर लाभार्थियों को पहले ही जानकारी दी गई है। कैंप में लाभार्थी को राशन कार्ड व आधार कार्ड लाना है। अगर प्रधानमंत्री का पत्र नहीं है तो राशन कार्ड या आधार कार्ड नंबर से सूची में उनका नाम मालूम कर कार्ड बना दिया जाएगा। उधर, एसीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि आयुष्मान गोल्डन कार्ड से संबंधित जानकारी के लिए एनाउंसमेंट और अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। सीएमओ कार्यालय व सरकारी अस्पतालों में भी जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।
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पहले कोई जानकारी नहीं मिली
कैंप में कार्ड बनवाने पहुंची मोहल्ला रामशाला निवासी बबीता ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री का पत्र तो मिल गया था, लेकिन उन्हेें यह नहीं पता था कि गोल्डन कार्ड कहां बनेगा। उसे मोहल्ले के किसी व्यक्ति से पता चला, जब वह कैंप में पहुंची। वह कार्ड बनवाने के लिए यहां काफी देर से अपने नंबर का इंतजार कर रही है। मोहल्ला दयानंद नगर गली नंबर सात की अंगूरी देवी ने बताया कि उसे पहले जानकारी नहीं मिली। कैंप के चौथे व अंतिम दिन कहीं से पता चला तो वह गोल्डन कार्ड बनवाने पहुंची, लेकिन यहां आकर पता चला कि बच्चों को भी साथ लाना था। इसी मोहल्ले की गली नंबर छह की ओमवीरी ने बताया कि उन्हें गोल्डन कार्ड बनवाने के संबंध में पहले से कोई जानकारी नहीं मिली।
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