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‘उत्पीड़न करने वाले कब से हितैषी हो गए’
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:15 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और किसानों की समस्याओं को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा 10 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर निकाले जाने वाले पैदल मार्च को गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा ने जनता से धोखा करार दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश में जब सपा की सरकार थी, तो किसानों का जमकर शोषण होता था। भाजपा की सरकार ने किसानों के हित में फैसले लिए हैं, जिस कारण विपक्षी बौखलाए हुए हैं।
अमर उजाला संवाददाता से फोन पर हुई बातचीत में गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि सपा सरकार में प्रदेश के सिर्फ पांच जिलों तक बिजली आपूर्ति सीमित रहती थी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे प्रदेश को बराबर बिजली मिल रही है।
गन्ना मूल्य भुगतान की तुलना की जाए, तो सपा के शासनकाल के दौरान 2013-14 में छह अप्रैल तक 7744 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, 2014-15 में 8922 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, 2015-16 में 10002 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था।
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वहीं, भाजपा सरकार में 2016-17 में छह अप्रैल तक 17,921 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। वर्ष 2017-18 में 18447 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हो चुका है।
इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारियों और मिल प्रबंधन का संयुक्त खाता खोलकर नई व्यवस्था बनाई गई, जिसका परिणाम है कि चीनी बिक्री से प्राप्त धनराशि में से 85 प्रतिशत किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान रूप में किसानों तक पहुंचाया। भाजपा ने बंद चीनी मिलों को शुरू किया और चीनी मिलों की गन्ना पेराई क्षमता भी बढ़ाई गई।
उसका परिणाम है कि प्रदेश में गन्ने की बंपर पैदावार और कठिन पेराई सत्र होते हुए भी सात अप्रैल तक 91 करोड़ 95 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर ली गई, जो कि पिछले वर्ष 77 करोड़ लाख 64 क्विंटल थी। इस समय अतराल तक पिछले वर्ष 58 चीनी मिलों में पेराई बंद हो गई थी, लेकिन इस सीजन में सिर्फ आठ चीनी मिलों में पेराई बंद हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक खेत में गन्ना खड़ा है, तब तक चीनी मिलें चलती रहेंगी।
इसके अलावा प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये फसली ऋण माफ किया गया। किसान हित में लिए गए इन फैसलों की वजह से ही सपा और बसपा में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि पैदल मार्च निकालने वाले भाजपा की विकासपरक नीति का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
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अमर उजाला संवाददाता से फोन पर हुई बातचीत में गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि सपा सरकार में प्रदेश के सिर्फ पांच जिलों तक बिजली आपूर्ति सीमित रहती थी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे प्रदेश को बराबर बिजली मिल रही है।
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गन्ना मूल्य भुगतान की तुलना की जाए, तो सपा के शासनकाल के दौरान 2013-14 में छह अप्रैल तक 7744 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, 2014-15 में 8922 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, 2015-16 में 10002 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था।
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वहीं, भाजपा सरकार में 2016-17 में छह अप्रैल तक 17,921 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। वर्ष 2017-18 में 18447 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हो चुका है।
इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारियों और मिल प्रबंधन का संयुक्त खाता खोलकर नई व्यवस्था बनाई गई, जिसका परिणाम है कि चीनी बिक्री से प्राप्त धनराशि में से 85 प्रतिशत किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान रूप में किसानों तक पहुंचाया। भाजपा ने बंद चीनी मिलों को शुरू किया और चीनी मिलों की गन्ना पेराई क्षमता भी बढ़ाई गई।
उसका परिणाम है कि प्रदेश में गन्ने की बंपर पैदावार और कठिन पेराई सत्र होते हुए भी सात अप्रैल तक 91 करोड़ 95 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर ली गई, जो कि पिछले वर्ष 77 करोड़ लाख 64 क्विंटल थी। इस समय अतराल तक पिछले वर्ष 58 चीनी मिलों में पेराई बंद हो गई थी, लेकिन इस सीजन में सिर्फ आठ चीनी मिलों में पेराई बंद हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक खेत में गन्ना खड़ा है, तब तक चीनी मिलें चलती रहेंगी।
इसके अलावा प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये फसली ऋण माफ किया गया। किसान हित में लिए गए इन फैसलों की वजह से ही सपा और बसपा में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि पैदल मार्च निकालने वाले भाजपा की विकासपरक नीति का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।