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पहले से ही थे खराब, अब और बिगड़ेंगे कुपोषण से हालात
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पहले से ही थे खराब, अब और बिगड़ेंगे कुपोषण से हालात
शामली। जनपद में कुपोषण से पहले ही हालात खराब थे, लेकिन अब नई व्यवस्था से स्थिति और ज्यादा खराब हो जाएगी। पूर्व में मिलने वाले दूध और पंजीरी जैसे पोषाहार के बदले अब गेहूं, चावल और दाल जैसे कच्चे राशन का वितरण शुरू किया गया है। खाद्य सुरक्षा के तहत पहले से ही पात्र परिवारों को राशन और चावल दिया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि इस राशन के दम पर कुपोषण दूर हो पाता तो अलग से पोषाहार देने की जरूरत क्या थी।
शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार में मिलने वाले दूध एवं पंजीरी जैसे पोषाहार को बंद कर दिया। अब स्वयं सहायता समूहों से पोषाहार के रूप में केवल कच्चा राशन दिया जा रहा है। जिले में अभी तक गेहूं और चावल का वितरण शुरू हुआ है, जबकि दाल का वितरण होना है।
2813 बच्चे कुपोषण का शिकार
शामली। जनपद में पांच वर्ष तक की आयु के 91 हजार 50 बच्चे हैं। अप्रैल से अब तक लगभग 1036 बच्चों के कुपोषण में सुधार हुआ है जबकि 2813 अभी भी कुपोषित हैं। जनपद में 965 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। कुपोषित बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या ऊन और थानाभवन ब्लॉक में है।
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दूध है संपूर्ण आहार, गेहूं-चावल में उतना पोषण नहीं
डायटीशियन नेहा त्यागी का कहना है कि दूध संपूर्ण आहार है। उसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी-2, विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज और वसा तथा ऊर्जा होती है। ड्राई फ्रूट वाली पंजीरी ज्यादा पोषण देती है। गेहूं में 0.9 प्रतिशत वसा, 0.6 प्रतिशत खनिज, 0.3 प्रतिशत खाद्य रेशे और 73.9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। चावल में 69 प्रतिशत पानी, 28.1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 2.9 प्रतिशत प्रोटीन, 0.2 वसा होती है, जबकि दाल में 22 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत सोडियम एवं 15 प्रतिशत फाइबर, विटामिन ए, बी-12, डी एवं कैल्शियम होता है।
गेहूं-चावल भी सभी सेंटरों पर नहीं पहुंचा
शामली। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, किशोरियों और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को राशन उपलब्ध कराया जाना है। शासन से सभी गांवों को खाद्यान्न का समान आवंटन कर दिया गया। जिन गांवों में ज्यादा बच्चे हैं वहां खाद्यान्न कम पड़ गया, जबकि जिनमें कम पंजीकरण है वहां ज्यादा हो गया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी राशन का आवंटन कर दिया गया था। अब जिन स्थानों पर राशन बच गया है वहां से दूसरे गांवों में भेजा जा रहा है। इसके साथ ही दाल का भी सभी सेंटरों पर वितरण नहीं हुआ है। स्वयं सहायता समूह दाल का क्रय कर सेंटरों पर वितरण करेंगी।
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इस तरह होना है राशन का वितरण (गेहूं-चावल किग्रा. में तथा दाल, दूध एवं घी ग्राम में)
लाभार्थी गेहूं --- चावल-- दाल ( मासिक) ---स्किम्ड दूूध (त्रैमासिक) - घी (त्रैमासिक)
6 माह से 3 वर्ष के बच्चे: 01 --- 1.5 -- 750 - 450 - 400
3 से छह वर्ष के बच्चे: 01 --- 1.5 -- 00 -- 400 - 00
गर्भवती महिला, किशोरी: 01 -- 02 --- 750 -- 450 - 750
अति कुपोषित बच्चे : 1.5 -- 2.5 -- 500 --- 900 - 750
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जिले में नहीं पोषण पुनर्वास केंद्र
जनपद में पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं है। यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित है तो उसे मुजफ्फरनगर केंद्र पर भेजा जाता है। परिजन इतनी दूर जाना नहीं चाहते। इससे अति कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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इन्होंने कहा...
डीएम समेत जिले के अन्य अधिकारियों ने 16 गांवों के अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया है। अधिकारी उन पर निगरानी रखेंगे तथा उनका कुपोषण दूर करने के लिए कार्य करेंगे। जब तक जनपद में पोषाहार बनना शुरू नहीं हो जाता, तब तक कच्चा राशन ही दिया जाएगा। - संतोष श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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शामली। जनपद में कुपोषण से पहले ही हालात खराब थे, लेकिन अब नई व्यवस्था से स्थिति और ज्यादा खराब हो जाएगी। पूर्व में मिलने वाले दूध और पंजीरी जैसे पोषाहार के बदले अब गेहूं, चावल और दाल जैसे कच्चे राशन का वितरण शुरू किया गया है। खाद्य सुरक्षा के तहत पहले से ही पात्र परिवारों को राशन और चावल दिया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि इस राशन के दम पर कुपोषण दूर हो पाता तो अलग से पोषाहार देने की जरूरत क्या थी।
शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार में मिलने वाले दूध एवं पंजीरी जैसे पोषाहार को बंद कर दिया। अब स्वयं सहायता समूहों से पोषाहार के रूप में केवल कच्चा राशन दिया जा रहा है। जिले में अभी तक गेहूं और चावल का वितरण शुरू हुआ है, जबकि दाल का वितरण होना है।
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2813 बच्चे कुपोषण का शिकार
शामली। जनपद में पांच वर्ष तक की आयु के 91 हजार 50 बच्चे हैं। अप्रैल से अब तक लगभग 1036 बच्चों के कुपोषण में सुधार हुआ है जबकि 2813 अभी भी कुपोषित हैं। जनपद में 965 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। कुपोषित बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या ऊन और थानाभवन ब्लॉक में है।
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दूध है संपूर्ण आहार, गेहूं-चावल में उतना पोषण नहीं
डायटीशियन नेहा त्यागी का कहना है कि दूध संपूर्ण आहार है। उसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी-2, विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज और वसा तथा ऊर्जा होती है। ड्राई फ्रूट वाली पंजीरी ज्यादा पोषण देती है। गेहूं में 0.9 प्रतिशत वसा, 0.6 प्रतिशत खनिज, 0.3 प्रतिशत खाद्य रेशे और 73.9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। चावल में 69 प्रतिशत पानी, 28.1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 2.9 प्रतिशत प्रोटीन, 0.2 वसा होती है, जबकि दाल में 22 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत सोडियम एवं 15 प्रतिशत फाइबर, विटामिन ए, बी-12, डी एवं कैल्शियम होता है।
गेहूं-चावल भी सभी सेंटरों पर नहीं पहुंचा
शामली। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, किशोरियों और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को राशन उपलब्ध कराया जाना है। शासन से सभी गांवों को खाद्यान्न का समान आवंटन कर दिया गया। जिन गांवों में ज्यादा बच्चे हैं वहां खाद्यान्न कम पड़ गया, जबकि जिनमें कम पंजीकरण है वहां ज्यादा हो गया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी राशन का आवंटन कर दिया गया था। अब जिन स्थानों पर राशन बच गया है वहां से दूसरे गांवों में भेजा जा रहा है। इसके साथ ही दाल का भी सभी सेंटरों पर वितरण नहीं हुआ है। स्वयं सहायता समूह दाल का क्रय कर सेंटरों पर वितरण करेंगी।
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इस तरह होना है राशन का वितरण (गेहूं-चावल किग्रा. में तथा दाल, दूध एवं घी ग्राम में)
लाभार्थी गेहूं --- चावल-- दाल ( मासिक) ---स्किम्ड दूूध (त्रैमासिक) - घी (त्रैमासिक)
6 माह से 3 वर्ष के बच्चे: 01 --- 1.5 -- 750 - 450 - 400
3 से छह वर्ष के बच्चे: 01 --- 1.5 -- 00 -- 400 - 00
गर्भवती महिला, किशोरी: 01 -- 02 --- 750 -- 450 - 750
अति कुपोषित बच्चे : 1.5 -- 2.5 -- 500 --- 900 - 750
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जिले में नहीं पोषण पुनर्वास केंद्र
जनपद में पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं है। यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित है तो उसे मुजफ्फरनगर केंद्र पर भेजा जाता है। परिजन इतनी दूर जाना नहीं चाहते। इससे अति कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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इन्होंने कहा...
डीएम समेत जिले के अन्य अधिकारियों ने 16 गांवों के अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया है। अधिकारी उन पर निगरानी रखेंगे तथा उनका कुपोषण दूर करने के लिए कार्य करेंगे। जब तक जनपद में पोषाहार बनना शुरू नहीं हो जाता, तब तक कच्चा राशन ही दिया जाएगा। - संतोष श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी