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साइबर फ्रॉड का जाल : बच्चों को बना रहे साइबर ठगी का हथियार
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शामली। डिजिटल युग में मोबाइल फोन अब सिर्फ संचार का उपकरण नहीं, बल्कि मनोरंजन, शिक्षा और सोशल कनेक्शन का बड़ा माध्यम है। साइबर अपराधी इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। साइबर अपराधी छोटे बच्चों को जो जाने-अनजाने फ्री गेम ऑफर, फेक लिंक या ओटीपी शेयर के बहाने साइबर ठगी करने की कोशिश के मामले सामने आ रहे हैं।
बच्चों में मोबाइल फोन पर वीडियो देखने और गेम खेलने की लत साइबर अपराधियों के लिए ठगी करने का आसान माध्यम बन रहा है। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके है, जहां बच्चों की इसी आदत का फायदा उठाकर अपराधियों ने साइबर ठगी की है।
केस एक: ऑनलाइन गेम में लालच देकर ठगी
कैराना क्षेत्र में रहने वाले एक 13 वर्षीय बच्चे को ऑनलाइन गेम में मुफ्त गिफ्ट का लालच दिया गया। गेम का झांसा देकर बच्चे से उसके पिता के पेटीएम आदि की जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान परिजनों को इसका पता चल गया। बच्चे के पिता ने अनजान मोबाइल नंबर को ब्लाक कर दिया।
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केस दो: वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग की कोशिश
थानाभवन इलाके की रहने वाली एक किशोरी को वीडियो एप डाउनलोड कर रुपये कमाने का झांसा दिया गया। एप के जरिए जाल में फंसाया गया और उसकी वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग की कोशिश भी की गई, हालांकि समय रहते इसकी जानकारी परिजनों को मिल गई थी। परिजनों से इसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर पर की थी।
केस तीन: शामली निवासी एक व्यक्ति ने साइबर सेल को शिकायत की थी कि उसके बेटा ऑनलाइन गेम खेल रहा था। इस दौरान उसके बैंक खाते से 10 हजार रुपये कट गए थे।
साइबर विशेषज्ञ की राय
साइबर एक्सपर्ट संजीव भटनागर का कहना है कि बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल करते समय निगरानी जरूरी है। बच्चों के आसानी से किसी भी लालच में या बहकावे में आने की संभावना रहती है। साइबर ठग बच्चों के माध्यम से निजी जानकारी लेने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को मोबाइल फोन के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताना चाहिए।
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बचाव के उपाय
-बच्चों को बैंक से संबंधित एप या पासवर्ड साझा न करने दें।
-अनजान एप डाउनलोड करने से रोके और केवल विश्वसनीय एप स्टोर से इंस्टॉल करें।
-स्क्रीन शेयर जैसे विकल्पों से बच्चों को दूर रखें।
-मोबाइल में मजबूत पासवर्ड और दो-चरणीय प्रमाणीकरण अवश्य लागू करें।
-बच्चों के मोबाइल फोन की समय-समय पर निगरानी रखें और अनावश्यक एप हटा दें।
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बच्चों में मोबाइल फोन पर वीडियो देखने और गेम खेलने की लत साइबर अपराधियों के लिए ठगी करने का आसान माध्यम बन रहा है। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके है, जहां बच्चों की इसी आदत का फायदा उठाकर अपराधियों ने साइबर ठगी की है।
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केस एक: ऑनलाइन गेम में लालच देकर ठगी
कैराना क्षेत्र में रहने वाले एक 13 वर्षीय बच्चे को ऑनलाइन गेम में मुफ्त गिफ्ट का लालच दिया गया। गेम का झांसा देकर बच्चे से उसके पिता के पेटीएम आदि की जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान परिजनों को इसका पता चल गया। बच्चे के पिता ने अनजान मोबाइल नंबर को ब्लाक कर दिया।
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केस दो: वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग की कोशिश
थानाभवन इलाके की रहने वाली एक किशोरी को वीडियो एप डाउनलोड कर रुपये कमाने का झांसा दिया गया। एप के जरिए जाल में फंसाया गया और उसकी वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग की कोशिश भी की गई, हालांकि समय रहते इसकी जानकारी परिजनों को मिल गई थी। परिजनों से इसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर पर की थी।
केस तीन: शामली निवासी एक व्यक्ति ने साइबर सेल को शिकायत की थी कि उसके बेटा ऑनलाइन गेम खेल रहा था। इस दौरान उसके बैंक खाते से 10 हजार रुपये कट गए थे।
साइबर विशेषज्ञ की राय
साइबर एक्सपर्ट संजीव भटनागर का कहना है कि बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल करते समय निगरानी जरूरी है। बच्चों के आसानी से किसी भी लालच में या बहकावे में आने की संभावना रहती है। साइबर ठग बच्चों के माध्यम से निजी जानकारी लेने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को मोबाइल फोन के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताना चाहिए।
बचाव के उपाय
-बच्चों को बैंक से संबंधित एप या पासवर्ड साझा न करने दें।
-अनजान एप डाउनलोड करने से रोके और केवल विश्वसनीय एप स्टोर से इंस्टॉल करें।
-स्क्रीन शेयर जैसे विकल्पों से बच्चों को दूर रखें।
-मोबाइल में मजबूत पासवर्ड और दो-चरणीय प्रमाणीकरण अवश्य लागू करें।
-बच्चों के मोबाइल फोन की समय-समय पर निगरानी रखें और अनावश्यक एप हटा दें।