shamli: जिला बनने के 11 साल बाद भी नहीं मिली अल्ट्रासाउंड की सुविधा, गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत
उत्तर प्रदेश के शामली के जिला बनने के 11 साल बाद में भी स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड मशीनें नहीं हैं। ऐसे में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पताल में जांच करानी पड़ रही है।
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सरकार का दावा है कि हर जिला अस्पताल,100 बेड के अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है, लेकिन शामली में स्थिति इसके एकदम उलट है। जिला बनने के 11 साल बाद भी मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिली है। जिले में जिला अस्पताल के अलावा सात सीएचसी और 25 पीएचसी हैं, लेकिन किसी भी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं है।
28 सितंबर 2011 को शामली जिला बना था। पूर्वी यमुना नहर किनारे गांव मुंडेट के निकट जिला अस्पताल का निर्माण होने पर पिछले साल 16 अगस्त से ओपीडी शुरू हुई थी। जिला अस्पताल चालू होने के एक साल बाद भी अल्ट्रासाउंड की सुविधा मरीजों को नहीं मिली है। जिला मुख्यालय की सीएचसी शामली पर भी अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है और न ही रेडियोलोजिस्ट है। बाकी छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है और न ही रेडियोलोजिस्ट की नियुक्ति है।
हाल ही में एक सप्ताह पहले जिला अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट डॉ. किशोर कुमार आहुजा की नियुक्ति हुई है। उन्होंने ज्वाइन भी कर लिया है, लेकिन लेकिन मशीन न होने से अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा शुरू नहीं हुई है। जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा न होने से मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर महंगा शुल्क देकर कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि रेडियोलोजिस्ट चिकित्सक के नाम से ही मशीन खरीदी जानी है।
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अभी तक रेडियोलोजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई थी। अब रेडियोलोजिस्ट आ गए हैं। अब अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए शासन को पत्राचार किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि मशीन शासन स्तर से उपलब्ध होगी या फिर जिला स्तर से ही खरीदी जानी है।
गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पताल में हो रही जांच
शासन के निर्देश पर हर माह की नौ तारीख को सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एचआरपी डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की जांच की सुविधा दी जाती है। सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा न होने पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निजी अस्पताल में जांच कराई जाती है, जिससे महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है।
हालांकि इन गर्भवती महिलाओं की जांच नि:शुल्क कराई जाती है। निजी अस्पताल को शासन की तरफ से निर्धारित धनराशि का भुगतान किया जाता है।
जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में अभी अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं है। इसके लिए शासन को समय-समय पर पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. संजय अग्रवाल, सीएमओ।