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भोपाल कमिश्नर का बड़ा फैसला: पुलिस लाइन के हवलदार से निरीक्षक तक को मिली केस डायरी, अब तय होगी जवाबदेही
Tue, 08 Sep 2026 12:53 PM IST
भोपाल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:53 PM IST
सार
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने पुलिस लाइन की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधान आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के 44 अधिकारी-कर्मचारियों को लंबित मामलों की विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी है। खासकर धोखाधड़ी के मामलों की केस डायरी उन्हें दी गई है।
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पुलिस आयुक्त संजय कुमार
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भोपाल की पुलिस लाइन को अब केवल अटैचमेंट या आरामगाह की जगह नहीं माना जाएगा। भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने पुलिस लाइन की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधान आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे विवेचना की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस व्यवस्था के तहत पुलिस लाइन में पदस्थ 44 अधिकारी और कर्मचारियों को थानों में लंबित मामलों की केस डायरी दी गई है। खासकर ये डायरी धोखाधड़ी के अपराधों की हैं। सभी को निर्धारित समय सीमा में विवेचना पूरी कर चालान पेश करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से जहां लंबित मामलों का जल्द निराकरण होगा, वहीं पुलिस लाइन में कार्य संस्कृति भी पूरी तरह बदल जाएगी।
लूपलाइन में भी सक्रिय पुलिसिंग का हिस्सा होना होगा
पुलिस लाइन को अभी तक लूपलाइन माना जाता रहा है। पुलिस लाइन को ऐसे स्थान के रूप में देखा जाता था, जहां फील्ड से हटाए गए या नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारी अपेक्षाकृत कम जिम्मेदारी निभाते थे। कई बार यहां तैनाती को आरामदायक पोस्टिंग भी माना जाता था। लेकिन पुलिस कमिश्नर के इस फैसले ने यह धारणा बदलने की शुरुआत कर दी है। अब पुलिस लाइन में बैठने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी को सक्रिय पुलिसिंग का हिस्सा बनना होगा।
पीड़ितों को समय पर मिलेगा न्याय
पुलिस आयुक्त संजय कुमार के अनुसार, नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पुलिस बल में उपलब्ध अनुभवी मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करना है। पुलिस लाइन में ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी पदस्थ हैं, जिन्होंने वर्षों तक थानों में विवेचना और कानून-व्यवस्था का काम किया है। अब उनके अनुभव का उपयोग लंबित मामलों के निपटारे में किया जाएगा। इससे थानों में तैनात विवेचना अधिकारियों का कार्यभार भी कम होगा और पीड़ितों को समय पर न्याय भी दिलाया जा सकेगा।
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अधिकारी करेंगे नियमित मॉनिटरिंग
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को केस डायरी सौंपी गई है, उनकी विवेचना की नियमित मॉनिटरिंग होगी। जांच की गुणवत्ता, समय सीमा का पालन और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले चालान की स्थिति की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। तय समय में जांच पूरी नहीं करने पर जवाबदेही भी तय की जाएगी। आयुक्त के इस फैसले से समय पर न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जो अधिकारी और कर्मचारी विवेचना में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, समय पर केसों का निराकरण करेंगे और गुणवत्तापूर्ण जांच करेंगे, उन्हें फील्ड पोस्टिंग में प्राथमिकता दी जाएगी। यानी अब पुलिस लाइन में किया गया काम सीधे उनके करियर और अगली तैनाती से जुड़ जाएगा।
ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश टीईटी पर संकट: ऑफलाइन कराने से कर्मचारी चयन मंडल का इन्कार, अब नई एजेंसी तय करेगी परीक्षा
लंबे समय से यह धारणा बनी हुई थी कि पुलिस लाइन में तैनाती का मतलब जिम्मेदारियों से दूरी है, सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी करना होगा। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब पुलिस लाइन में भी हर दिन काम का हिसाब देना होगा। प्रधान आरक्षक हो, एएसआई, एसआई या निरीक्षक, सभी को केस डायरी के माध्यम से अपनी पेशेवर क्षमता साबित करनी होगी।
पुलिस लाइन की बदलेगी पहचान
यदि यह प्रयोग सफल रहा तो पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण होगा, बल्कि पुलिस लाइन की पहचान भी एक निष्क्रिय इकाई से बदलकर सक्रिय विवेचना केंद्र के रूप में स्थापित हो सकती है। यही कारण है कि पुलिस आयुक्त का यह फैसला इन दिनों विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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लूपलाइन में भी सक्रिय पुलिसिंग का हिस्सा होना होगा
पुलिस लाइन को अभी तक लूपलाइन माना जाता रहा है। पुलिस लाइन को ऐसे स्थान के रूप में देखा जाता था, जहां फील्ड से हटाए गए या नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारी अपेक्षाकृत कम जिम्मेदारी निभाते थे। कई बार यहां तैनाती को आरामदायक पोस्टिंग भी माना जाता था। लेकिन पुलिस कमिश्नर के इस फैसले ने यह धारणा बदलने की शुरुआत कर दी है। अब पुलिस लाइन में बैठने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी को सक्रिय पुलिसिंग का हिस्सा बनना होगा।
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पीड़ितों को समय पर मिलेगा न्याय
पुलिस आयुक्त संजय कुमार के अनुसार, नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पुलिस बल में उपलब्ध अनुभवी मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करना है। पुलिस लाइन में ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी पदस्थ हैं, जिन्होंने वर्षों तक थानों में विवेचना और कानून-व्यवस्था का काम किया है। अब उनके अनुभव का उपयोग लंबित मामलों के निपटारे में किया जाएगा। इससे थानों में तैनात विवेचना अधिकारियों का कार्यभार भी कम होगा और पीड़ितों को समय पर न्याय भी दिलाया जा सकेगा।
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अधिकारी करेंगे नियमित मॉनिटरिंग
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को केस डायरी सौंपी गई है, उनकी विवेचना की नियमित मॉनिटरिंग होगी। जांच की गुणवत्ता, समय सीमा का पालन और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले चालान की स्थिति की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। तय समय में जांच पूरी नहीं करने पर जवाबदेही भी तय की जाएगी। आयुक्त के इस फैसले से समय पर न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जो अधिकारी और कर्मचारी विवेचना में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, समय पर केसों का निराकरण करेंगे और गुणवत्तापूर्ण जांच करेंगे, उन्हें फील्ड पोस्टिंग में प्राथमिकता दी जाएगी। यानी अब पुलिस लाइन में किया गया काम सीधे उनके करियर और अगली तैनाती से जुड़ जाएगा।
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लंबे समय से यह धारणा बनी हुई थी कि पुलिस लाइन में तैनाती का मतलब जिम्मेदारियों से दूरी है, सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी करना होगा। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब पुलिस लाइन में भी हर दिन काम का हिसाब देना होगा। प्रधान आरक्षक हो, एएसआई, एसआई या निरीक्षक, सभी को केस डायरी के माध्यम से अपनी पेशेवर क्षमता साबित करनी होगी।
पुलिस लाइन की बदलेगी पहचान
यदि यह प्रयोग सफल रहा तो पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण होगा, बल्कि पुलिस लाइन की पहचान भी एक निष्क्रिय इकाई से बदलकर सक्रिय विवेचना केंद्र के रूप में स्थापित हो सकती है। यही कारण है कि पुलिस आयुक्त का यह फैसला इन दिनों विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
