Shamli: जर्जर हालत-टूटे शीशे, सर्दी के मौसम में हवादार बसों में यात्रा करने को मजबूर यात्री, अफसर खामोश
पश्चिमी यूपी में सर्दी ने अपनी दस्तक दे दी है, लेकिन उत्तर प्रदेश परिवहन की बसों में सफर करना और भी मुश्किल हो रहा है। शामली जनपद होकर जाने वाली कई बसों का हाल ऐसा है कि यात्री ठंड में सफर करने को मजबूर हैं।
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स्थान : बस स्टैंड
यहां पर सहारनपुर डिपो की बस खड़ी हुई थी, जिसमें कई यात्री भी बैठे थे। बस के पीछे और आगे के शीशे टूटे पड़े थे। परिचालक ने बताया कि अभी शीशे टूटे हैं। जिन्हें जल्द ठीक कराया जाएगा।
स्थान : बस स्टैंड के बाहर
यहां पर रोडवेज की बस खड़ी थी। जिसके जहां जगह जगह से शीशे टूटे पड़े थे। वहीं बस की जो खिड़की टूटी थी, जिसको रस्सी से बांधा हुआ था। यात्रियों ने कहा कि दो माह से अधिक समय से बस की यही हालत है। विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे।
यहां पर रोडवेज की बस खड़ी हुई थी। बस के अंदर की सीटें टूटी पड़ी थी। परिचालक ने बताया कि काफी समय से सीटें टूटी पड़ी है। खिड़की भी जर्जर है और टूटी पड़ी है।
यह तीन दृश्य तो आम है। आए दिन शामली से होकर जाने वाली कई बसें जर्जर अवस्था में दौड़ रही है, जिन्हें सही कराने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शामली निवासी नीरज कौशिक का कहना है कि सर्दी की दस्तक के बावजूद जर्जर बसों को ठीक नहीं कराया गया है। यात्रियों से किराया तो लिया जाता है मगर सुविधा नहीं दी जाती। जर्जर बसों को जल्द ठीक कराया जाना चाहिए।
बलवा के रहने वाले रमेश का कहना है कि उन्हें दिल्ली बस में जाना था। बस की खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं। सीटें भी फटी है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
दयानंद नगर के रहने वाले अंकित का कहना है कि जर्जर बसों के कारण हादसों का भी खतरा बना रहता है। मगर विभागीय अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है। जर्जर बसों को जल्द ठीक कराया जाना चाहिए।
यात्रियों का कहना है कि शामली से होकर जाने वाली बसों में साफ सफाई की तरफ भी ध्यान नहीं दिया जाता है। जिसके कारण यात्रियों को परेशानी होती है।
शामली बस स्टैंड से संचालित होने वाली सभी जर्जर बसों को सर्दी की दस्तक के साथ ही दुरुस्त करा दिया गया है। जर्जर बसें बाहरी रूट की हो सकती है। प्रयास रहता है कि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाए। - अनिल शुक्ला, एआरएम शामली डिपो