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कोरोना महामारी से टूटे व्यापारियों को सरकार से आर्थिक मदद की दरकार
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शामली। व्यापारी वर्ग कोरोना संक्रमण के चलते मुश्किल समय से जूझ रहा है। छोटे व्यापारियों को छूट और ऋण माफी की उम्मीद है। कोई जीएसटी का सरलीकरण चाहता है तो कोई टैक्स में कमी। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना काल में व्यापारी को कोई छूट नहीं मिली। व्यापारी को हिसाब रखने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छोटे व्यापारियों के पास सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकार ने बिजली में सभी को छूट दी है व्यापारियों को इससे अलग रखा गया है। यह दोहरा रवैया है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यापारियों की सरकार से क्या हैं उम्मीदें आइए जानते हैं...
क्या कहते हैं व्यापारी....
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग का कहना है कि जो व्यापारी हित की बात करेगा, वोट उसे ही मिलेगा। जीएसटी प्रक्रिया सरलीकरण, कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक पैकेज, बिजली की घरेलू और कामर्शियल दरों को समान करने समेत कई मांगों को लेकर व्यापारी संघर्षरत हैं। सरकार को इन मांगों को पूरा करना चाहिए।
सर्राफ रवि संगल का कहना है कि पिछले दो वर्षों से कोरोना संक्रमण काल के चलते व्यापार बुरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाए। आर्थिक पैकेज की घोषणा सरकार करें। ईएमआई और ऋण के ब्याज माफ हों। हरियाणा की तरह 60 वर्ष से ऊपर के व्यापारियों को पेंशन मिले।
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मोबाइल व्यापारी ऋषभ संगल का कहना है कि लॉकडाउन की बंदी और मंदी के कारण व्यापारी इस समय बहुत पीड़ित है। व्यापारियों को दिए जाने वाले ऋण में ब्याज की छूट होनी चाहिए। व्यापारी की दुकान में आगजनी जैसी घटनाओं से नुकसान पर सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।
कास्मेटिक व्यापारी अनुराग बंसल का कहना है कि आर्थिक मंदी और बढ़ती महंगाई के कारण दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हुई। व्यापारी हित में जीएसटी व अन्य व्यापारी ऋणों में छूट मिलनी चाहिए। सरकार को जीएसटी का सरलीकरण करना चाहिए।
किराना व्यापारी मुकेश गर्ग का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के जो मापदंड है वह छोटे व्यापारी पूरा नहीं कर सकते। छोटे व्यापारियों के हितों का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। सामान पर लगने वाले जीएसटी के कारण भी व्यापारी परेशान है। बाजार में मंदी की मार है। सरकार को जीएसटी में संशोधन करना चाहिए।
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क्या कहते हैं व्यापारी....
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग का कहना है कि जो व्यापारी हित की बात करेगा, वोट उसे ही मिलेगा। जीएसटी प्रक्रिया सरलीकरण, कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक पैकेज, बिजली की घरेलू और कामर्शियल दरों को समान करने समेत कई मांगों को लेकर व्यापारी संघर्षरत हैं। सरकार को इन मांगों को पूरा करना चाहिए।
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सर्राफ रवि संगल का कहना है कि पिछले दो वर्षों से कोरोना संक्रमण काल के चलते व्यापार बुरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाए। आर्थिक पैकेज की घोषणा सरकार करें। ईएमआई और ऋण के ब्याज माफ हों। हरियाणा की तरह 60 वर्ष से ऊपर के व्यापारियों को पेंशन मिले।
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मोबाइल व्यापारी ऋषभ संगल का कहना है कि लॉकडाउन की बंदी और मंदी के कारण व्यापारी इस समय बहुत पीड़ित है। व्यापारियों को दिए जाने वाले ऋण में ब्याज की छूट होनी चाहिए। व्यापारी की दुकान में आगजनी जैसी घटनाओं से नुकसान पर सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।
कास्मेटिक व्यापारी अनुराग बंसल का कहना है कि आर्थिक मंदी और बढ़ती महंगाई के कारण दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हुई। व्यापारी हित में जीएसटी व अन्य व्यापारी ऋणों में छूट मिलनी चाहिए। सरकार को जीएसटी का सरलीकरण करना चाहिए।
किराना व्यापारी मुकेश गर्ग का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के जो मापदंड है वह छोटे व्यापारी पूरा नहीं कर सकते। छोटे व्यापारियों के हितों का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। सामान पर लगने वाले जीएसटी के कारण भी व्यापारी परेशान है। बाजार में मंदी की मार है। सरकार को जीएसटी में संशोधन करना चाहिए।