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ज्वर से तप रहा तितरवाड़ा गांव
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। दस हजार से अधिक मतदाताओं वाले ग्राम तीतरवाड़ा में जानलेवा बुखार के प्रकोप के चलते लोगों में भय व्याप्त है। गांव में शायद ही ऐसा घर जो बुखार से बचा होगा। पिछले 15 दिन के अंदर गांव में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इस सबके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग इन सब बातों से अंजान बना बैठा है।
बुखार से पीड़ित गांव के पूर्व प्रधान मुरसलीन पिछले सात दिनों से चिकनगुनिया से पीड़ित है। मुरसलीन ने बताया कि उसका उपचार हरियाणा के पानीपत जिले के इसराना मेडिकल अस्पताल में चल रहा है। जाहिद हसन को चार दिन पहले बुखार आने पर शामली उपचार कराया जा रहा है। संजीला को आठ दिन से चिकनगुनिया की शिकायत होने पर गांव में उपचार करा रही है। नरेश को भी छह दिन से टाइफाइड व वायरल होने पर गांव में ही डॉक्टर से उपचार कराया जा रहा है। कविता को पिछले आठ दिन से बुखार व चिकनगुनिया है।
हाजी जहूर हसन भी बुखार से पीड़ित है परिजन उनका इलाज गांव में ही करा रहे है। संजीदा को तीन दिन पहले बुखार आने पर उसका उपचार कैराना में चल रहा है। वर्तमान ग्राम प्रधान संदीप कुमार को भी दो दिन पहले बुखार आने पर कैराना के निजी चिकित्सक के पास उपचार कराया जा रहा है। मन्नान, हारुण, असलम आदि का कहना है कि गांव के हर घर में बुखार के मरीज है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह है। न तो गांव में फॉगिंग कराई गई और न ही स्वास्थ्य उपकेंद्र में कोई डॉक्टर है।
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नहीं हुआ दवाई का छिड़काव
तीतरवाड़ा में मलेरिया, टाइफाइड, चिकन गुनिया का प्रकोप बढ़ने के बावजूद आज तक छिड़काव नहीं कराया गया। बुखार की चपेट में आए प्रधान संदीप का कहना है कि वो दवा लेने कैराना सरकारी अस्पताल गए थे। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सलीम ने कहा कि शामली के जिला मलेरिया अधिकारी से प्रमिशन लेकर आओ। उसके बाद दवा दी जाएगी।
गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र पर नहीं कोई डॉक्टर ः गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं है। यहां पर एक फार्मेस्सिट, एक वार्ड ब्वाय व एक स्वीपर की ही तैनाती है। वार्ड ब्वाय जयप्रकाश ने बताया कि अस्पताल पर आने वाले मरीजों का उपचार किया जाता है।
एक दिन में 90 मरीज बुखार के आते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ सलीम ने बताया कि क्षेत्र में टाइफाइड, मलेरिया, वायरल व चिकनगुनिया के मामले आ रहे हैं। तीतरवाड़ा के ग्राम प्रधान ने उनसे छिड़काव की दवाई नहीं मांगी। अगर कोई भी ग्राम प्रधान अपने लेटरपैड पर या शामली के जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा लिखवा कर लाता है तो उसे तुरंत दवा दी जाती है।
चौपाल पर गंदगी के ढेर
तीतरवाड़ा में कई सालों से चौपाल के नाम पर काफी जगह खाली पड़ी है। उक्त जमीन के विवाद में कई बार गांव में झगडे़ भी हो चुके हैं। समस्या का समाधान नहीं हुआ। उक्त खाली पड़ी जमीन पर गंदगी का अंबार लगा है। जिस कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है।
15 दिन में बुखार से मरने वाले
60 वर्षीय मकसूद की मौत शुक्रवार को।
गयूर के घर ओदरी से आया हुए छह माह के बालक साकिर की दो दिन पहले मौत।
65 वर्षीय यूसुफ की दो दिन पहले बुखार से मौत।
60 वर्षीय यासीन की बुखार के चलते सात दिन पहले मौत।
साजिद के इकलौते ढाई माह के पुत्र शाहीन की मौत।
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बुखार से पीड़ित गांव के पूर्व प्रधान मुरसलीन पिछले सात दिनों से चिकनगुनिया से पीड़ित है। मुरसलीन ने बताया कि उसका उपचार हरियाणा के पानीपत जिले के इसराना मेडिकल अस्पताल में चल रहा है। जाहिद हसन को चार दिन पहले बुखार आने पर शामली उपचार कराया जा रहा है। संजीला को आठ दिन से चिकनगुनिया की शिकायत होने पर गांव में उपचार करा रही है। नरेश को भी छह दिन से टाइफाइड व वायरल होने पर गांव में ही डॉक्टर से उपचार कराया जा रहा है। कविता को पिछले आठ दिन से बुखार व चिकनगुनिया है।
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हाजी जहूर हसन भी बुखार से पीड़ित है परिजन उनका इलाज गांव में ही करा रहे है। संजीदा को तीन दिन पहले बुखार आने पर उसका उपचार कैराना में चल रहा है। वर्तमान ग्राम प्रधान संदीप कुमार को भी दो दिन पहले बुखार आने पर कैराना के निजी चिकित्सक के पास उपचार कराया जा रहा है। मन्नान, हारुण, असलम आदि का कहना है कि गांव के हर घर में बुखार के मरीज है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह है। न तो गांव में फॉगिंग कराई गई और न ही स्वास्थ्य उपकेंद्र में कोई डॉक्टर है।
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नहीं हुआ दवाई का छिड़काव
तीतरवाड़ा में मलेरिया, टाइफाइड, चिकन गुनिया का प्रकोप बढ़ने के बावजूद आज तक छिड़काव नहीं कराया गया। बुखार की चपेट में आए प्रधान संदीप का कहना है कि वो दवा लेने कैराना सरकारी अस्पताल गए थे। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सलीम ने कहा कि शामली के जिला मलेरिया अधिकारी से प्रमिशन लेकर आओ। उसके बाद दवा दी जाएगी।
गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र पर नहीं कोई डॉक्टर ः गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं है। यहां पर एक फार्मेस्सिट, एक वार्ड ब्वाय व एक स्वीपर की ही तैनाती है। वार्ड ब्वाय जयप्रकाश ने बताया कि अस्पताल पर आने वाले मरीजों का उपचार किया जाता है।
एक दिन में 90 मरीज बुखार के आते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ सलीम ने बताया कि क्षेत्र में टाइफाइड, मलेरिया, वायरल व चिकनगुनिया के मामले आ रहे हैं। तीतरवाड़ा के ग्राम प्रधान ने उनसे छिड़काव की दवाई नहीं मांगी। अगर कोई भी ग्राम प्रधान अपने लेटरपैड पर या शामली के जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा लिखवा कर लाता है तो उसे तुरंत दवा दी जाती है।
चौपाल पर गंदगी के ढेर
तीतरवाड़ा में कई सालों से चौपाल के नाम पर काफी जगह खाली पड़ी है। उक्त जमीन के विवाद में कई बार गांव में झगडे़ भी हो चुके हैं। समस्या का समाधान नहीं हुआ। उक्त खाली पड़ी जमीन पर गंदगी का अंबार लगा है। जिस कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है।
15 दिन में बुखार से मरने वाले
60 वर्षीय मकसूद की मौत शुक्रवार को।
गयूर के घर ओदरी से आया हुए छह माह के बालक साकिर की दो दिन पहले मौत।
65 वर्षीय यूसुफ की दो दिन पहले बुखार से मौत।
60 वर्षीय यासीन की बुखार के चलते सात दिन पहले मौत।
साजिद के इकलौते ढाई माह के पुत्र शाहीन की मौत।