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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   'Three ways to attain God'

‘भगवान प्राप्ति के तीन मार्ग’

Thu, 17 Oct 2019 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2019 12:09 AM IST
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'Three ways to attain God'
शामली कैराना रोड पर श्री राम कथा में भाग लेती महिलाऐ - फोटो : SHAMLI
फोटो...
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शामली। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि जीवन का यह सूत्र है कि शुभ कार्य को तुरंत करना चाहिए और अशुभ कार्य को कल के लिए छोड़ देना चाहिए। मगर हम लोग इसका उल्टा करते हैं। शुभ कार्य को कल के लिए छोड़ देते हैं और अशुभ कार्य को तुरंत करने की कोशिश करते हैं।
बुधवार को कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास एवं केवट प्रसंग का मार्मिक चित्रण किया। कहा कि कश्मीर ने त्रेता युग में भी इस देश को रुलाया है। और आज भी रुला रहा है। हमारी संस्कृति में बेटी को जेवर चढ़ाए जाते हैं, बेटी के जेवर उतरवाए नहीं जाते। महाराजा दशरथ राज्य सिंहासन पर बैठे थे। उन्होंने शीशे में अपना मुकुट देखा, तो तिरछा दिखाई दिया और कानों के पास सफेद बाल नजर आए। उन्होंने अपना बुढ़ापा जानकर राम को राज तिलक करने का विचार किया। इस संबंध में वशिष्ठ मुनि से परामर्श मांगा। तो वशिष्ठ जी ने कहा राजन आपने बहुत अच्छा विचार किया है। राम को आज ही राजतिलक तक होना चाहिए। इस पर राजा दशरथ ने कहा कि आज नहीं कल राम का राजतिलक करेंगे। संत प्रवर ने कहा दशरथ जी से यही भूल हो गई कि उन्होंने आज का काम कल पर छोड़ दिया। जीवन का यह सूत्र है कि शुभ कार्य को तुरंत करना चाहिए और अशुभ कार्य को कल के लिए छोड़ देना चाहिए।
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राम के राज्याभिषेक के निर्णय के बाद राजा दशरथ ने राम को शिक्षा दिलाने के लिए वशिष्ठ जी को बुलवाया। जबकि वशिष्ठ जैसे तपस्वी ऋषि के पास राजा दशरथ को स्वयं जाना चाहिए था या राम को उनके पास ले जाकर शिक्षा दिलानी चाहिए थी। राजा दशरथ के राज्य में साधु संत स्वयं को असुरक्षित समझते थे। इसीलिए विश्वामित्र को राक्षसों के विध्वंस के लिए राम लक्ष्मण को दशरथ से मांग कर ले जाना पड़ा। यही कारण है प्रभु श्री राम ने निश्चय कर लिया कि ऐसे राज्य सिंहासन पर नहीं बैठ सकते जहां साधु संतों का अपमान होता हो।
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कौशल महाराज ने केवट का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आज भगवान स्वयं केवट के पास पहुंचे हैं। यह उपासना का प्रसंग है। भगवान बिना बुलाए भक्त के द्वार पर पहुंचे हैं। भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग है। पहला यदि भक्त भोला भाला और सरल हृदय हो जाए। दूसरा भगवान को गा-गा करके पुकारा जाए और तीसरा भगवान को रोकर व्याकुलता के साथ पुकारा जाए। मौके पर एसपी शामली अजय कुमार उनकी धर्मपत्नी, शामली शुगर मिल के एमडी रजत लाल व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग, सुभाष धीमान, रालोद नेता योगेंद्र चेयरमैन, अशोक बंसल, सुरेंद्र आर्य राजेश्वर बंसल, आदि मौजूद रहे।
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