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माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाले तीन पर्वतारोही डीएम से मिले
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शामली। माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने व 11 देशों में 4.21 लाख किमी पैदल यात्रा करने वाले तीन पर्वतारोही बृहस्पतिवार को डीएम जसजीत कौर से मिले।
चारधाम यात्रा से हरिद्वार के रास्ते यहां पहुंचे पर्वतारोही जनपद में सड़क सुरक्षा, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ सहित अन्य जागरूक कार्यक्रमों के लिए प्रचार करेंगे। पर्वतारोही दल के लीडर अवध बिहारी लखीमपुर जिले के दोहरा गांव निवासी हैं। वर्ष 1980 में लखीमपुर में आई बाढ़ में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया था। अवध बिहारी उस समय 11 वर्ष के थे। उन्होंने तीन दिन तक एक पेड़ पर बैठकर भूखे-प्यासे रहकर बिताए थे। इंडियन आर्मी के हैलीकाप्टर ने उनकी जान बचाई थी। इसके बाद अवध बिहारी ने पर्यावरण को अपना जीवन मान लिया और उसके लिए कार्य करने लगे।
लखीमपुर जनपद के जितेंद्र प्रताप ने बताया कि अवध बिहारी के साथ वह 11 वर्ष की आयु में 1995 में जुड़े थे। उन्होंने बताया कि भारत सहित कई देशों की पैदल यात्रा कर 14 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके दल में महेंद्र प्रताप और गोविंद नंद सहित 20 सदस्य है। सभी सदस्यों ने अपना देहदान कर रखा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जनपदों का पैदल भ्रमण किया हुआ है। जिसमें शामली आखिरी जिला बचा था। डीएम के तीनों पर्वतारोहियों के साहस और कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी प्रशंसा करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।
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चारधाम यात्रा से हरिद्वार के रास्ते यहां पहुंचे पर्वतारोही जनपद में सड़क सुरक्षा, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ सहित अन्य जागरूक कार्यक्रमों के लिए प्रचार करेंगे। पर्वतारोही दल के लीडर अवध बिहारी लखीमपुर जिले के दोहरा गांव निवासी हैं। वर्ष 1980 में लखीमपुर में आई बाढ़ में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया था। अवध बिहारी उस समय 11 वर्ष के थे। उन्होंने तीन दिन तक एक पेड़ पर बैठकर भूखे-प्यासे रहकर बिताए थे। इंडियन आर्मी के हैलीकाप्टर ने उनकी जान बचाई थी। इसके बाद अवध बिहारी ने पर्यावरण को अपना जीवन मान लिया और उसके लिए कार्य करने लगे।
लखीमपुर जनपद के जितेंद्र प्रताप ने बताया कि अवध बिहारी के साथ वह 11 वर्ष की आयु में 1995 में जुड़े थे। उन्होंने बताया कि भारत सहित कई देशों की पैदल यात्रा कर 14 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके दल में महेंद्र प्रताप और गोविंद नंद सहित 20 सदस्य है। सभी सदस्यों ने अपना देहदान कर रखा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जनपदों का पैदल भ्रमण किया हुआ है। जिसमें शामली आखिरी जिला बचा था। डीएम के तीनों पर्वतारोहियों के साहस और कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी प्रशंसा करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।
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