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ये वीरों की धरती है, यहां कायर जन्म नहीं लेते

Thu, 03 Sep 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 12:03 AM IST
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This is a land of heroes, cowards do not take birth here
बीएसएफ जवान...ये वीरों की धरती है, यहां कायर जन्म नहीं लेते
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शामली। गांव लांक निवासी बीएसएफ जवान विकास कुमार (25) की मौत को आत्महत्या बताने पर गांव और क्षेत्र के लोग आगबबूला हो उठते हैं। कहते हैं कि ये वीरों की धरती है, यहां पर कायर जन्म नहीं लेते। विकास के साथ कोई ऐसी बात नहीं थी कि वह आत्महत्या करता। क्षेत्र का बच्चा-बच्चा बहादुर है और देश के लिए जान देने से पीछे नहीं हटता। अकेले लांक गांव के 700 से ज्यादा युवक सेना व अन्य सुरक्षा बलों में तैनात होकर देश सेवा में जुटे हैं।
बीएसएफ जवान की पत्नी पंपा मेहता का कहना है कि अधिकारी उसके पति की देश के लिए की गई शहादत को आत्महत्या बता रहे हैं। यह बिल्कुल नहीं हो सकता। विकास से उसकी लगातार बात हो रही थी। बातों से यह नहीं लगा कि वह आत्महत्या कर सकता है। पंचायत के दौरान डीएम, एसपी की मौजूदगी में गांव के शुभम मलिक ने साफ कहा कि शहादत को कायरता का जामा न पहनाया जाए। यह शहीदों का अपमान है। इस क्षेत्र के युवा होश संभालते ही देशसेवा के लिए सेना में जाने का सपना देखते हैं और इस सपने को पूरा करने के लिए सड़कों व नहर की पटरियों पर दौड़ लगाते हैं। विकास के बलिदान को आत्महत्या बताना सीमा पर तैनात वीरों का अपमान होगा। इससे उन हजारों युवाओं के कदम डगमगा जाएंगे जो सीमा पर जाने के लिए तैयारी में लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अकेले लांक गांव में करीब 700 युवा विभिन्न सुरक्षा बलों में तैनात हैं। हर तीसरे घर का युवा किसी ने किसी फोर्स में अपनी सेवा दे रहा है।
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मां-बहनों की हालत खराब, बेखबर है मासूम
शामली। मां मानो देवी, बहन सुशीला और बबीता देवी सहित पूरा परिवार विकास का शव गांव लाए जाने का इंतजार कर रहा था। चार दिन बाद शव आया तो रो-रोकर उनकी आंखों में आंसू ही सूख गए। पिता भंवर सिंह हर किसी से हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाते रहे। जवान का एक साल का बेटा तो अंदाज भी नहीं लगा सकता कि हुआ क्या है। वह अपनी नानी की गोद में रहा। भाई गजेंद्र और शिव कुमार बेहाल इधर से उधर घूम रहे थे। पूरा परिवार मेहनत-मजदूरी करता है। विकास के 2014 में सेना में भर्ती होने के बाद परिवार की हालत सुधरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन वह भी उसके साथ ही खत्म हो गई।
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महिला थाना प्रभारी की हालत बिगड़ी
बीएसएफ जवान विकास का शव आने के बाद भारी पुलिस बल गांव पहुंच गया था। भीड़ के साथ ही तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोगों की हालत खराब होने लगी। महिला थाना प्रभारी नीरज चौधरी की तबीयत खराब होने लगी। एक घर में छाया में बैठाया गया।

पूरे घटनाक्रम को देखते रहे बीएसएफ जवान
विकास कुमार का शव लेकर गांव आए बीएसएफ के जवान पूरे घटनाक्रम को देखते रहे। वह विकास के घर के सामने ही एक बरामदे में बैठे हुए थे। लोग बार-बार हंगामा करते और नारेबाजी करते रहे। इस दौरान एक-दो जवानों ने वीडियो भी बनाया। पश्चिमी बंगाल से आए एसआई अनंद कुमार दलाल ने बताया कि विकास उनके छोटे भाई जैसा था। उन्होंने तीन दिन से खाना भी नहीं खाया। उन्होंने बताया कि वह विकास कुमार के परिवार को मिलने वाली पेंशन एवं अन्य देयकों के पूरे दस्तावेज लेकर आए हैं।
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