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साल बीत गया पर जाम का नहीं हुआ समाधान
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साल बीत गया पर जाम का नहीं हुआ समाधान
शामली। शहर में कई दशक पुरानी जाम की समस्या का स्थायी समाधान इस साल भी नहीं हो पाया। जाम की समस्या को लेकर पूरे साल अधिकारी फाइलों में केवल योजना बनाते रहे और बैठकें करते रहे, लेकिन हर बार की तरह साल 2019 भी बीत गया। कोई योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इसी महीने की शुरूआत में विजय चौक पर जाम में एंबुलेंस फंसी होने के कारण महिला को प्रसव हो गया था। करीब एक साल पहले भी आग में झुलसी युवती को लेकर सीएचसी जा रहे परिजन भी जाम में फंसे रहे थे।
शहर में ये है जाम के प्रमुख प्वाइंट
हनुमान चौक- शहर के हनुमान चौक पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। इसी के निकट सीएचसी होने के कारण मरीज भी जाम में फंसे रहते हैं। बुढ़ाना रोड से शहर में आने का रास्ता भी यहीं है। बुढ़ाना रोड के गांवों के किसान मिल में गन्ना लेकर भी इसी चौक से गुजरते है। रास्ता तंग होने के कारण यहां अक्सर जाम लगा रहता है।
धीमानपुरा- शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका धीमानपुरा है। सुभाष चौक से लेकर रेलवे फाटक के बीच का यह मेन मार्ग होने के कारण यहां पर जाम लगा रहता है। ट्रेनों के आवागमन के दौरान दिन में कई बार फाटक बंद होने के कारण भी जाम लगा रहता है।
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गुरुद्वारा तिराहा- गुरुद्वारा तिराहा से हल्के और भारी सभी वाहन निकलते हैं। मेरठ-करनाल हाईवे को जोड़ने वाले गुरुद्वारा तिराहे से रेलपार बाईपास पर हल्के व भारी वाहनों की लाइन लगी रहने से जाम के हालात बने रहते है।
बुढ़ाना रोड- मेरठ-करनाल हाईवे बनने से पहले इसे बुढ़ाना रोड के नाम से जाना जाता था। शहर के बीच से निकलने वाले इस मार्ग पर बड़े भारी वाहनों का आवागमन ज्यादा होने से जाम लगा रहता है। इसके अलावा शहर के अजंता चौक, विजय चौक, फव्वारा चौक समेत अनेक स्थानों पर जाम लगा रहता है।
ये योजनाएं नहीं चढ़ी परवान
10 साल में नहीं बना बाईपास
शहर के बाईपास बनाने की प्रक्रिया 2009 में शुरू हुई थी। अभी तक बाईपास बनकर तैयार नहीं हो सका। बाईपास के बैनामे भी अधूरे हैं, जिस कारण अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। बाईपास अगर बन जाए तो शहर में जाम की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
ई रिक्शा रूट का निर्धारण नहीं हो सका
शहर में परिवहन विभाग द्वारा जाम की समस्या के समाधान के लिए एक जनवरी 2019 से ई रिक्शा का रूट निर्धारण का प्लान तैयार कर लागूू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक यह लागू नहीं हो सका।
अतिक्रमण हटाओ अभियान अधूरा
शहर में जाम के समाधान के लिए नगरपालिका और प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान कई बार शुरू किया, लेकिन दो तीन दिन चलने के बाद बीच में ही दम तोड़ गया।
2020 में उम्मीदें
शहर में चौराहों पर ट्रैफिक सिगनल लगाए जाना।
बाईपास का निर्माण कार्य पूरा होना।
अतिक्रमण हटाने का अभियान सख्ती से चलाया जाना।
मिल में आने वाले गन्ना वाहनों के लिए गांव वार समय का निर्धारण होना।
ई रिक्शा रूट का निर्धारण होना।
यातायात पुलिस और होमगार्ड की संख्या बढ़ना।
कोट
यातायात संचालन के लिए सभी प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस और होमगार्ड की ड्यूटी रहती है। शहर में नो एंट्री की व्यवस्था लागू है। शहर में ट्रैफिक सिगनल का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
-भंवर सिंह, यातायात प्रभारी।
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शामली। शहर में कई दशक पुरानी जाम की समस्या का स्थायी समाधान इस साल भी नहीं हो पाया। जाम की समस्या को लेकर पूरे साल अधिकारी फाइलों में केवल योजना बनाते रहे और बैठकें करते रहे, लेकिन हर बार की तरह साल 2019 भी बीत गया। कोई योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इसी महीने की शुरूआत में विजय चौक पर जाम में एंबुलेंस फंसी होने के कारण महिला को प्रसव हो गया था। करीब एक साल पहले भी आग में झुलसी युवती को लेकर सीएचसी जा रहे परिजन भी जाम में फंसे रहे थे।
शहर में ये है जाम के प्रमुख प्वाइंट
हनुमान चौक- शहर के हनुमान चौक पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। इसी के निकट सीएचसी होने के कारण मरीज भी जाम में फंसे रहते हैं। बुढ़ाना रोड से शहर में आने का रास्ता भी यहीं है। बुढ़ाना रोड के गांवों के किसान मिल में गन्ना लेकर भी इसी चौक से गुजरते है। रास्ता तंग होने के कारण यहां अक्सर जाम लगा रहता है।
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धीमानपुरा- शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका धीमानपुरा है। सुभाष चौक से लेकर रेलवे फाटक के बीच का यह मेन मार्ग होने के कारण यहां पर जाम लगा रहता है। ट्रेनों के आवागमन के दौरान दिन में कई बार फाटक बंद होने के कारण भी जाम लगा रहता है।
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गुरुद्वारा तिराहा- गुरुद्वारा तिराहा से हल्के और भारी सभी वाहन निकलते हैं। मेरठ-करनाल हाईवे को जोड़ने वाले गुरुद्वारा तिराहे से रेलपार बाईपास पर हल्के व भारी वाहनों की लाइन लगी रहने से जाम के हालात बने रहते है।
बुढ़ाना रोड- मेरठ-करनाल हाईवे बनने से पहले इसे बुढ़ाना रोड के नाम से जाना जाता था। शहर के बीच से निकलने वाले इस मार्ग पर बड़े भारी वाहनों का आवागमन ज्यादा होने से जाम लगा रहता है। इसके अलावा शहर के अजंता चौक, विजय चौक, फव्वारा चौक समेत अनेक स्थानों पर जाम लगा रहता है।
ये योजनाएं नहीं चढ़ी परवान
10 साल में नहीं बना बाईपास
शहर के बाईपास बनाने की प्रक्रिया 2009 में शुरू हुई थी। अभी तक बाईपास बनकर तैयार नहीं हो सका। बाईपास के बैनामे भी अधूरे हैं, जिस कारण अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। बाईपास अगर बन जाए तो शहर में जाम की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
ई रिक्शा रूट का निर्धारण नहीं हो सका
शहर में परिवहन विभाग द्वारा जाम की समस्या के समाधान के लिए एक जनवरी 2019 से ई रिक्शा का रूट निर्धारण का प्लान तैयार कर लागूू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक यह लागू नहीं हो सका।
अतिक्रमण हटाओ अभियान अधूरा
शहर में जाम के समाधान के लिए नगरपालिका और प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान कई बार शुरू किया, लेकिन दो तीन दिन चलने के बाद बीच में ही दम तोड़ गया।
2020 में उम्मीदें
शहर में चौराहों पर ट्रैफिक सिगनल लगाए जाना।
बाईपास का निर्माण कार्य पूरा होना।
अतिक्रमण हटाने का अभियान सख्ती से चलाया जाना।
मिल में आने वाले गन्ना वाहनों के लिए गांव वार समय का निर्धारण होना।
ई रिक्शा रूट का निर्धारण होना।
यातायात पुलिस और होमगार्ड की संख्या बढ़ना।
कोट
यातायात संचालन के लिए सभी प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस और होमगार्ड की ड्यूटी रहती है। शहर में नो एंट्री की व्यवस्था लागू है। शहर में ट्रैफिक सिगनल का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
-भंवर सिंह, यातायात प्रभारी।