{"_id":"612539e48ebc3e79bf57c0fb","slug":"the-womb-of-the-earth-drying-up-due-to-lack-of-rain-shamli-news-mrt5531834114","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश की कमी से सूख रही धरती की कोख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश की कमी से सूख रही धरती की कोख
विज्ञापन
शामली। जिले में सालों से बारिश की कमी के चलते भूजल स्तर गिरता जा रहा है। गिरते जलस्तर से शामली जिला डार्क श्रेणी में आ गया है। धरती की कोख सूखती जा रही है।
शामली जिला यमुना नदी और यमुना नहर और कृष्णा नदी की सीमा में आता है। जिले में पिछले दो दशक से लगातार जल दोहन होने से जलस्तर गिरता जा रहा है। जल स्तर गिरने से प्राइवेट और सरकारी नलकूप बंद होते जा रहे हैं। वर्ष 2011 में भूजल उपलब्धता आकलन में जिले के सभी ब्लाक अतिदोहित एवं क्रिटीकल श्रेणी में आ गए थे। सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति शामली, कैराना व थानाभवन और सहारनपुर जिले के गंगोह-नकुड़ ब्लाक की है। अतिदोहित ब्लाकों में भूजल स्तर प्रतिवर्ष गिरता जा रहा है। जिले में भूजल दोहन की दर 334.20 प्रतिशत आंकी गई है।
भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक शामली जिले में 3175.59 हेक्टेयर मीटर अतिरिक्त भूजल की आवश्यकता है। यहां 80 प्रतिशत वर्षा मानसून पर आधारित है। वर्ष 2014-15 के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2004 से लेकर 2010 और 2011 से लेकर 2016 तक वर्षा का औसत सामान्य वर्षा से कम है। मंडल के भूगर्म वैज्ञानिक आशीष चौधरी के मुताबिक जिले में रिचार्ज से ज्यादा पानी खर्च किया जा रहा है। यदि जल संचय किया जाए और रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम लागू जाए तो 5.70 हेक्टेयर मीटर जल संचय किया जा सकता है।
विज्ञापन
2005 से लेकर 2015 तक भूजल गिरावट औसत-
ब्लाक भूजल स्तर मीटर में भूजल स्तर गिरावट सेमी प्रतिवर्ष प्री व पोस्ट मानसून
कैराना 11.86 - 23.73 40.55 - 48.09
कांधला 14.93 - 20. 00 62.26 -53.81
शामली 17.42 - 26.76 59.35- 64.54
थानाभवन 808 - 2168 37.83-44.92
ऊन 687 - 20.45 23.92-49.21
-----------------------------------------------------------------
शामली जिला बनने के बाद बारिश का आंकड़ा
2012- 509.10 मिमी
2013- 1063.70 मिमी
2014- 510.40 मिमी
2015- 784.30 मिमी
2016- 554.70 मिमी
2019- 879 मिमी
2020- 1005 मिमी
जुलाई 2021- 306 मिमी
विज्ञापन
शामली जिला यमुना नदी और यमुना नहर और कृष्णा नदी की सीमा में आता है। जिले में पिछले दो दशक से लगातार जल दोहन होने से जलस्तर गिरता जा रहा है। जल स्तर गिरने से प्राइवेट और सरकारी नलकूप बंद होते जा रहे हैं। वर्ष 2011 में भूजल उपलब्धता आकलन में जिले के सभी ब्लाक अतिदोहित एवं क्रिटीकल श्रेणी में आ गए थे। सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति शामली, कैराना व थानाभवन और सहारनपुर जिले के गंगोह-नकुड़ ब्लाक की है। अतिदोहित ब्लाकों में भूजल स्तर प्रतिवर्ष गिरता जा रहा है। जिले में भूजल दोहन की दर 334.20 प्रतिशत आंकी गई है।
विज्ञापन
भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक शामली जिले में 3175.59 हेक्टेयर मीटर अतिरिक्त भूजल की आवश्यकता है। यहां 80 प्रतिशत वर्षा मानसून पर आधारित है। वर्ष 2014-15 के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2004 से लेकर 2010 और 2011 से लेकर 2016 तक वर्षा का औसत सामान्य वर्षा से कम है। मंडल के भूगर्म वैज्ञानिक आशीष चौधरी के मुताबिक जिले में रिचार्ज से ज्यादा पानी खर्च किया जा रहा है। यदि जल संचय किया जाए और रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम लागू जाए तो 5.70 हेक्टेयर मीटर जल संचय किया जा सकता है।
विज्ञापन
2005 से लेकर 2015 तक भूजल गिरावट औसत-
ब्लाक भूजल स्तर मीटर में भूजल स्तर गिरावट सेमी प्रतिवर्ष प्री व पोस्ट मानसून
कैराना 11.86 - 23.73 40.55 - 48.09
कांधला 14.93 - 20. 00 62.26 -53.81
शामली 17.42 - 26.76 59.35- 64.54
थानाभवन 808 - 2168 37.83-44.92
ऊन 687 - 20.45 23.92-49.21
-----------------------------------------------------------------
शामली जिला बनने के बाद बारिश का आंकड़ा
2012- 509.10 मिमी
2013- 1063.70 मिमी
2014- 510.40 मिमी
2015- 784.30 मिमी
2016- 554.70 मिमी
2019- 879 मिमी
2020- 1005 मिमी
जुलाई 2021- 306 मिमी