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देश के आजादी के नाम कर दिया संपूर्ण जीवन
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गांव पंजोखरा के स्वतंत्रा सैनानी पलटूराम (फाइल फोटो)
- फोटो : SHAMLI
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देश की आजादी के नाम कर दिया संपूर्ण जीवन
शामली, कांधला। क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी पलटू राम ने अपना जीवन देश के नाम कर दिया था। परिवार और क्षेत्र के लोग देश के लिए उनके योगदान पर गर्व करते हैं। देश को आजादी दिलाने के लिए कठिन रास्तों से सफर तय करने के साथ ही वे कई बार जेल भी गए। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन आजाद हिंद फौज में बिताया।
पलटू राम का जन्म तीन जुलाई 1921 को कांधला थाना क्षेत्र के गांव पंजोखरा में हुआ था। उनके दतक पुत्र देवेंद्र ने बताया कि उनमें बचपन से देश की सेवा करना उनका जनून था। परिवार के साथ बैठकर वह आजादी की लड़ाई के किस्से बताते थे। करीब 17 वर्ष की उम्र में वे देश की सेवा करने के लिए अपने घर को छोड़कर निकल गए। जीवन का अधिक समय सिंगापुर में बिताया। देश सेवा करने के लिए शादी भी नहीं की। जब भी परिवार के लोग उन पर शादी के लिए दबाव बनाते तो उनका हमेशा एक ही कथन होता था कि देश की आजादी पहला फर्ज है। वो पूरा होने के बाद सभी आगे आते हैं। अपने जीवन का अधिक समय आजाद हिंद फौज में बिताया और कई बड़े कार्य अपने साथियों के साथ मिलकर फौज में रहते हुए किए। इसमें उन्हें एक बार गंभीर चोटें भी आईं और कई बार वे जेल भी गए। जब वे अपने परिवार के साथ होते तो गांव व परिवार के लोगों को देश की सेवा करने व देश के लिए बलिदान देने की बात करते। 21 जुलाई 2019 को अपने प्राणों को त्याग गए।
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शामली, कांधला। क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी पलटू राम ने अपना जीवन देश के नाम कर दिया था। परिवार और क्षेत्र के लोग देश के लिए उनके योगदान पर गर्व करते हैं। देश को आजादी दिलाने के लिए कठिन रास्तों से सफर तय करने के साथ ही वे कई बार जेल भी गए। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन आजाद हिंद फौज में बिताया।
पलटू राम का जन्म तीन जुलाई 1921 को कांधला थाना क्षेत्र के गांव पंजोखरा में हुआ था। उनके दतक पुत्र देवेंद्र ने बताया कि उनमें बचपन से देश की सेवा करना उनका जनून था। परिवार के साथ बैठकर वह आजादी की लड़ाई के किस्से बताते थे। करीब 17 वर्ष की उम्र में वे देश की सेवा करने के लिए अपने घर को छोड़कर निकल गए। जीवन का अधिक समय सिंगापुर में बिताया। देश सेवा करने के लिए शादी भी नहीं की। जब भी परिवार के लोग उन पर शादी के लिए दबाव बनाते तो उनका हमेशा एक ही कथन होता था कि देश की आजादी पहला फर्ज है। वो पूरा होने के बाद सभी आगे आते हैं। अपने जीवन का अधिक समय आजाद हिंद फौज में बिताया और कई बड़े कार्य अपने साथियों के साथ मिलकर फौज में रहते हुए किए। इसमें उन्हें एक बार गंभीर चोटें भी आईं और कई बार वे जेल भी गए। जब वे अपने परिवार के साथ होते तो गांव व परिवार के लोगों को देश की सेवा करने व देश के लिए बलिदान देने की बात करते। 21 जुलाई 2019 को अपने प्राणों को त्याग गए।
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