{"_id":"618abe48ec3f4d686116e9d4","slug":"the-setting-sun-will-be-worshipped-preparations-complete-shamli-news-mrt5641744159","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्री छठ पूजा आज: अस्त होते सूर्य की होगी पूजा, तैयारियां पूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्री छठ पूजा आज: अस्त होते सूर्य की होगी पूजा, तैयारियां पूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री छठ पूजा आज: अस्त होते सूर्य की होगी पूजा, तैयारियां पूरी
शामली। छठ पूजा के मौके पर अस्त होते सूर्य की श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी। मंगलवार को शहर के श्री हनुमान धाम पर शिव सरोवर का पानी से लबालब करके तैयारियां पूरी कर ली है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने कैराना यमुना पुल पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
कार्तिक मास की अमावस्या को होने वाला दीवाली के तुरंत बाद चार दिवसीय कार्तिक शुक्ल षष्ठी व्रत मनाया जाता है। षष्ठी व्रत वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्घि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। बुधवार को छठ पूजा महोत्सव शहर के हनुमान धाम में शिवसरोवर में मनाया जाएगा। श्री हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि श्रीसूर्य छठ पूजा महोत्सव की तैयारी के मद्देनजर पानी भर दिया गया है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने मंगलवार की शाम को कैराना यमुना तट पर तैयारियों का जायजा लेकर एडीओ पंचायत धर्म सिंह को सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए।
छठ पूजा का इतिहास
छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता है, जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं। सूर्य देव के साथ छठ पर छठी मैया की पूजा का भी विधान है। सूर्य और छठी मैया का संबंध भाई बहन का है। वह कार्तिकेय की पत्नी भी हैं। सूर्य की ऊषा और प्रत्यूषा के रहते जल में खड़े रहकर छठ व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं।षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है। पुराणों में इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है। षष्ठी देवी को ही बिहार-झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है।
विज्ञापन
छठ पूजा अर्घ्य मंत्र
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं। अर्घ्यं च फलं संयुक्त गंध माल्याक्षतै युतं ।
विज्ञापन
शामली। छठ पूजा के मौके पर अस्त होते सूर्य की श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी। मंगलवार को शहर के श्री हनुमान धाम पर शिव सरोवर का पानी से लबालब करके तैयारियां पूरी कर ली है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने कैराना यमुना पुल पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
कार्तिक मास की अमावस्या को होने वाला दीवाली के तुरंत बाद चार दिवसीय कार्तिक शुक्ल षष्ठी व्रत मनाया जाता है। षष्ठी व्रत वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्घि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। बुधवार को छठ पूजा महोत्सव शहर के हनुमान धाम में शिवसरोवर में मनाया जाएगा। श्री हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि श्रीसूर्य छठ पूजा महोत्सव की तैयारी के मद्देनजर पानी भर दिया गया है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने मंगलवार की शाम को कैराना यमुना तट पर तैयारियों का जायजा लेकर एडीओ पंचायत धर्म सिंह को सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए।
विज्ञापन
छठ पूजा का इतिहास
छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता है, जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं। सूर्य देव के साथ छठ पर छठी मैया की पूजा का भी विधान है। सूर्य और छठी मैया का संबंध भाई बहन का है। वह कार्तिकेय की पत्नी भी हैं। सूर्य की ऊषा और प्रत्यूषा के रहते जल में खड़े रहकर छठ व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं।षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है। पुराणों में इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है। षष्ठी देवी को ही बिहार-झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है।
विज्ञापन
छठ पूजा अर्घ्य मंत्र
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं। अर्घ्यं च फलं संयुक्त गंध माल्याक्षतै युतं ।