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Shamli News: सॉल्वर गैंग का सरगना कई राज्यों में नौकरी के नाम पर करता था ठगी
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शामली। मेरठ की एसटीएफ टीम ने साल्वर गैंग के 12 सदस्यों को बागपत से गिरफ्तार किया। गिरोह का सरगना शामली के भाज्जू गांव का रहने वाला रचित चौधरी है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि सरगना ने कई लोगों को छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा में नौकरी लगवाने का भी झांसा दिया हुआ था। नौकरी लगवाने के नाम पर वह ठगी करता था।
एसटीएफ और बागपत पुलिस ने गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया। खुलासा हुआ कि साॅल्वर गैंग ने पुलिस की ऑनलाइन कंप्यूटर ऑपरेटर परीक्षा में ही सेंध लगा दी और दूर दराज बैठे गिरोह के सदस्यों ने रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए प्रश्नपत्रों को हल किया।
एसटीएफ के अनुसार, गिरोह का सरगना रचित एमए तक पढ़ा हुआ है और उसे लग्जरी लाइफ जीने का शौक है।जिसके कारण वह सॉल्वर गैंग का सरगना बन बैठा। पता चला है कि नौकरी लगवाने के नाम पर भी वह लोगों से ठगी करता था। पिछले कुछ दिन से घर नहीं पहुुंचा था।गिरोह के सदस्य कर्मवीर, दानवीर, रजनीश और अन्य से पुलिस से पकड़े जाने के डर से व्हाटस्एप पर भी बात करता था। उसने ही पेपर सॉल्व कराने की प्लानिंग तैयार की थी। जिससे भी पेपर हल कराने की डीलिंग होती थी, उससे मिलने से बचता था। पिछले कुछ समय पूर्व पेपर सॉल्व की तैयारी की गई थी। सरगना ही सदस्यों को निर्देशित करता था। शामली पुलिस भी आरोपी से पूछताछ कर सकती है।
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उधर, शामली में भी आगामी 17 और 18 फरवरी को यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा होनी है,जिसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है। यहां पर 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। आशंका है कि गिरोह के फरार सदस्य यहां भी परीक्षा को लीक कराने की तैयारी कर सकते हैं, इसको लेकर पुलिस और एसटीएफ चौकन्ना हो गई है। एसपी अभिषेक ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा कराई जाएगी। एएसपी के नेतृत्व में गठित टीम पहले ही जांच पड़ताल करेगी। भाज्जू के बागपत में पकड़े गए गिरोह के सरगना के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। पता किया जा रहा है कि उसके खिलाफ शामली के किसी थाने में तो मामला दर्ज नहीं है।
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अभ्यर्थी सिर्फ माउस हिलाता रहता है
सरगना ने एसटीएफ की पूछताछ में बताया कि जिससे भी वह पेपर सॉल्व कराने का ठेका लेते हैं वह अभ्यर्थी कंप्यूटर पर बैठकर सिर्फ माउस हिलाता है बाकी पेपर गिरोह के सदस्य ही सॉल्व करते हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी से 4 से 5 लाख रुपये लेते थे।
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आरोपी है दो भाई
सरगना के पकड़े जाने की जानकारी भाज्जू गांव के ग्रामीणों को नहीं थी। ग्रामीणों ने बताया कि सरगना समेत परिवार में दो भाई है। परिवार खेतीबाड़ी कर परिवार कर पालन पोषण करता है। परिवार के लोग सामाजिक हैं और दूसरों की हर संभव मदद को भी तैयार रहते हैं। हालांकि, आरोपी के परिजनों ने रचित के पकड़े जाने की जानकारी होने से इनकार किया है। कहा कि यदि पकड़ा गया है तो उसे गलत फंसाया गया है।
शामली में भी पूर्व में पकड़े जा चुके साॅल्वर गैंग
29 नवंबर 2021 को एसटीएफ ने शामली से तीन सॉल्वर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जिनमें मनीष, धर्मेंद्र, रवि शामिल थे। तीनों के पास से पेपर, गाड़ी बरामद की गई थी। तीनों टीईटी की परीक्षा को लीक कराने की तैयारी में थे। इनके पास से कुछ फोटो कॉपी बरामद किए गए थे। बाद में इस मामले में अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई थी।
इसी तरह अक्तूबर 2022 में शामली में प्रारंभिक पात्रता परीक्षा के दूसरे दिन ही पहली पाली में दो सॉल्वर पकडे़ गए थे। पहली पाली में कड़ी चौकसी व गहन तलाशी के बाद अभ्यर्थियों को केंद्र के अंदर एंट्री दी गई थी। शामली में वीवी पीजी कॉलेज और बीएसएम स्कूल में गेट पर तलाशी और जांच के दौरान दो युवक पकड़े गए थे जो मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने आए थे।
8 साल से कर रहा ठगी
एसटीएफ और पुलिस को पता चला है कि गिरोह का सरगना अधिकतर गांव से बाहर ही रहता है। वह करीब आठ साल से ठगी के मामलों में ही लगा हुआ था। वन विभाग में भी कुछ लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। हालांकि, उस समय शिकायत नहीं होने के कारण वह पकड़ा नहीं जा सका था।
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एसटीएफ और बागपत पुलिस ने गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया। खुलासा हुआ कि साॅल्वर गैंग ने पुलिस की ऑनलाइन कंप्यूटर ऑपरेटर परीक्षा में ही सेंध लगा दी और दूर दराज बैठे गिरोह के सदस्यों ने रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए प्रश्नपत्रों को हल किया।
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एसटीएफ के अनुसार, गिरोह का सरगना रचित एमए तक पढ़ा हुआ है और उसे लग्जरी लाइफ जीने का शौक है।जिसके कारण वह सॉल्वर गैंग का सरगना बन बैठा। पता चला है कि नौकरी लगवाने के नाम पर भी वह लोगों से ठगी करता था। पिछले कुछ दिन से घर नहीं पहुुंचा था।गिरोह के सदस्य कर्मवीर, दानवीर, रजनीश और अन्य से पुलिस से पकड़े जाने के डर से व्हाटस्एप पर भी बात करता था। उसने ही पेपर सॉल्व कराने की प्लानिंग तैयार की थी। जिससे भी पेपर हल कराने की डीलिंग होती थी, उससे मिलने से बचता था। पिछले कुछ समय पूर्व पेपर सॉल्व की तैयारी की गई थी। सरगना ही सदस्यों को निर्देशित करता था। शामली पुलिस भी आरोपी से पूछताछ कर सकती है।
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उधर, शामली में भी आगामी 17 और 18 फरवरी को यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा होनी है,जिसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है। यहां पर 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। आशंका है कि गिरोह के फरार सदस्य यहां भी परीक्षा को लीक कराने की तैयारी कर सकते हैं, इसको लेकर पुलिस और एसटीएफ चौकन्ना हो गई है। एसपी अभिषेक ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा कराई जाएगी। एएसपी के नेतृत्व में गठित टीम पहले ही जांच पड़ताल करेगी। भाज्जू के बागपत में पकड़े गए गिरोह के सरगना के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। पता किया जा रहा है कि उसके खिलाफ शामली के किसी थाने में तो मामला दर्ज नहीं है।
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अभ्यर्थी सिर्फ माउस हिलाता रहता है
सरगना ने एसटीएफ की पूछताछ में बताया कि जिससे भी वह पेपर सॉल्व कराने का ठेका लेते हैं वह अभ्यर्थी कंप्यूटर पर बैठकर सिर्फ माउस हिलाता है बाकी पेपर गिरोह के सदस्य ही सॉल्व करते हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी से 4 से 5 लाख रुपये लेते थे।
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आरोपी है दो भाई
सरगना के पकड़े जाने की जानकारी भाज्जू गांव के ग्रामीणों को नहीं थी। ग्रामीणों ने बताया कि सरगना समेत परिवार में दो भाई है। परिवार खेतीबाड़ी कर परिवार कर पालन पोषण करता है। परिवार के लोग सामाजिक हैं और दूसरों की हर संभव मदद को भी तैयार रहते हैं। हालांकि, आरोपी के परिजनों ने रचित के पकड़े जाने की जानकारी होने से इनकार किया है। कहा कि यदि पकड़ा गया है तो उसे गलत फंसाया गया है।
शामली में भी पूर्व में पकड़े जा चुके साॅल्वर गैंग
29 नवंबर 2021 को एसटीएफ ने शामली से तीन सॉल्वर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जिनमें मनीष, धर्मेंद्र, रवि शामिल थे। तीनों के पास से पेपर, गाड़ी बरामद की गई थी। तीनों टीईटी की परीक्षा को लीक कराने की तैयारी में थे। इनके पास से कुछ फोटो कॉपी बरामद किए गए थे। बाद में इस मामले में अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई थी।
इसी तरह अक्तूबर 2022 में शामली में प्रारंभिक पात्रता परीक्षा के दूसरे दिन ही पहली पाली में दो सॉल्वर पकडे़ गए थे। पहली पाली में कड़ी चौकसी व गहन तलाशी के बाद अभ्यर्थियों को केंद्र के अंदर एंट्री दी गई थी। शामली में वीवी पीजी कॉलेज और बीएसएम स्कूल में गेट पर तलाशी और जांच के दौरान दो युवक पकड़े गए थे जो मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने आए थे।
8 साल से कर रहा ठगी
एसटीएफ और पुलिस को पता चला है कि गिरोह का सरगना अधिकतर गांव से बाहर ही रहता है। वह करीब आठ साल से ठगी के मामलों में ही लगा हुआ था। वन विभाग में भी कुछ लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। हालांकि, उस समय शिकायत नहीं होने के कारण वह पकड़ा नहीं जा सका था।