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कैराना में पलायन, कानून व्यवस्था और विकास का मुद्दा रहा बेअसर

Fri, 11 Mar 2022 12:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:50 AM IST
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The issue of migration, law and order and development remained ineffective in Kairana
कैराना से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह। - फोटो : SHAMLI
शामली। विधानसभा चुनाव में प्रदेश की हॉट सीट मानी जाने वाली कैराना सीट पर भाजपा का पलायन, कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दे बेअसर रहे। इस सीट पर जातीय समीकरण हावी रहे, जो सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी नाहिद हसन की जीत का आधार बने।
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भाजपा ने प्रदेश में पिछले 2017 का विधानसभा चुनाव कैराना पलायन के मुद्दे पर लड़ा था। कैराना के पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने 2016 में अपराध और गुंडे बदमाशों के भय की वजह से करीब 350 परिवारों के पलायन करने की सूची जारी की थी। पलायन के मुद्दे पर चुनाव लड़कर भाजपा सत्ता में आई थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता की बागडोर संभाली थी। हालांकि कैराना सीट पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह चुनाव हार गई थी और सपा प्रत्याशी नाहिद हसन जीतकर विधायक बने थे।
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भाजपा सरकार बनने के बाद कैराना में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था को सुधारने का काम किया। इसके साथ ही सीएम योगी ने कैराना और कांधला के बीच पीएससी कैंप और फायरिंग रेंज की स्थापना की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव से पहले आठ नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना पहुंचकर पीएसी कैंप और फायरिंग रेंज समेत करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। इस दौरान पलायन करने वाले परिवारों के सदस्यों से मिलकर सुरक्षा का भरोसा दिलाया था। सीएम योगी ने कैराना में पलायन के मुद्दे को हवा देते हुए कानून व्यवस्था सुधारने और गुंडे बदमाशों के के विरुद्ध की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा था कि पूर्व में पलायन करने वाले परिवार कैराना में लौटे हैं।
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इस दौरान सीएम ने वापस लौटे परिवार के सदस्यों से मिलकर उन्हें सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया था। सीएम ने कैराना में पूरे प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करने और विकास के मुद्दे पर जनता से वोट मांगे थे। नाहिद हसन की बहन इकरा हसन ने अपने भाई के लिए चुनाव प्रचार किया। भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह की हार के बाद तय हो गया कि कैराना में भाजपा के पलायन, कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दे जहां बेअसर रहे, वहीं जातीय समीकरण हावी रहे।
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