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आजादी के दीवानों को गिरफ्तार कर दी गईं थी यातनाएं
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जलालाबाद में स्वतंत्रता सेनानी की यादगार में बना द्वार।
- फोटो : SHAMLI
जलालाबाद। देश की आजादी की लड़ाई में जलालाबाद क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दांडी के बाद यहीं पर नमक तैयार कर कानून तोड़ा गया था। इस आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों पर अंग्रेजों ने खूब जुल्म ढहाए थे। पेड़ से बांधकर उन्हें डंडों से पीटा गया और यातनाएं दी गईं। जेल में डाल दिया गया तथा जुर्माना भी लगाया गया। इसके बावजूद आजादी के दीवानों का हौसला कम नहीं हुआ। कस्बे में बने इंदिरा द्वार पर इन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम आज भी अंकित हैं।
भारत के नमक सत्याग्रह के दौरान दांडी के बाद जलालाबाद में नमक तैयार कानून तोड़ा गया था। स्वतंत्रता सेनानियों ने रेह वाली खारी मिट्टी से नमक बनाया था। इसमें लाला निहालचंद, लाला ज्योति प्रसाद, ओंकार प्रसाद, अंबिका प्रसाद वाजपेई, माधवराम, पंडित रामरतन शर्मा, पंडित नवल किशोर शर्मा, बलराम भाई, बाबू ताराचंद, सत्य प्रकाश आदि ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजों ने इन लोगों पर डंडे बरसाए और यातनाएं दीं। जिनके शरीर पर चोटों के निशान बन गए। कस्बे के हलवाई हट्टा, गांधी चौक, पंचधारा, जैन मंदिर के सामने पिलखन के पेड़ में बांधकर नंगे बदन पर डंडों से पीटा गया। उनके ऊपर नाली का गंदा पानी डाला गया। हाथों पर गहरे घाव में नमक छिड़का गया। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर इन सभी को सजा भी हुई।
लाला निहालचंद को 25 रुपये जुर्माना छह माह कैद, ज्योति प्रसाद घंटा को पांच माह कैद और 20 रुपये जुर्माना, बाबू ताराचंद, ओंकार प्रसाद को लाहौर जेल में छह माह की सजा और 50-50 रुपये जुर्माना, पंडित नवल किशोर शर्मा, अंबिका प्रसाद वाजपेई, माधवराम आदि को भी इलाहाबाद की नैनी जेल में रखा गया। वहां उन्हें जमीन पर लिटाकर पीटा गया तथा उनके ऊपर घोड़े दौड़ाए गए। इतनी यातनाएं झेलकर भी इन लोगों ने आजादी की लड़ाई का मार्ग नहीं छोड़ा और स्वतंत्रता आंदोलन में लगे रहे। उनकी याद में स्वतंत्रता सेनानी द्वार बनाकर राष्ट्रीय एकता संगठन ने कस्बे की जनता की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के लोग अब यहां नहीं रहते हैं।
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भारत के नमक सत्याग्रह के दौरान दांडी के बाद जलालाबाद में नमक तैयार कानून तोड़ा गया था। स्वतंत्रता सेनानियों ने रेह वाली खारी मिट्टी से नमक बनाया था। इसमें लाला निहालचंद, लाला ज्योति प्रसाद, ओंकार प्रसाद, अंबिका प्रसाद वाजपेई, माधवराम, पंडित रामरतन शर्मा, पंडित नवल किशोर शर्मा, बलराम भाई, बाबू ताराचंद, सत्य प्रकाश आदि ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजों ने इन लोगों पर डंडे बरसाए और यातनाएं दीं। जिनके शरीर पर चोटों के निशान बन गए। कस्बे के हलवाई हट्टा, गांधी चौक, पंचधारा, जैन मंदिर के सामने पिलखन के पेड़ में बांधकर नंगे बदन पर डंडों से पीटा गया। उनके ऊपर नाली का गंदा पानी डाला गया। हाथों पर गहरे घाव में नमक छिड़का गया। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर इन सभी को सजा भी हुई।
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लाला निहालचंद को 25 रुपये जुर्माना छह माह कैद, ज्योति प्रसाद घंटा को पांच माह कैद और 20 रुपये जुर्माना, बाबू ताराचंद, ओंकार प्रसाद को लाहौर जेल में छह माह की सजा और 50-50 रुपये जुर्माना, पंडित नवल किशोर शर्मा, अंबिका प्रसाद वाजपेई, माधवराम आदि को भी इलाहाबाद की नैनी जेल में रखा गया। वहां उन्हें जमीन पर लिटाकर पीटा गया तथा उनके ऊपर घोड़े दौड़ाए गए। इतनी यातनाएं झेलकर भी इन लोगों ने आजादी की लड़ाई का मार्ग नहीं छोड़ा और स्वतंत्रता आंदोलन में लगे रहे। उनकी याद में स्वतंत्रता सेनानी द्वार बनाकर राष्ट्रीय एकता संगठन ने कस्बे की जनता की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के लोग अब यहां नहीं रहते हैं।
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