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...बिन रंग के ही होली का त्योहार हो गया

Wed, 31 Mar 2021 12:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Mar 2021 12:07 AM IST
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... the festival of Holi has been done without color
शामली सरस साहित्य काव्य गोष्ठी में सुप्रसिद्ध कवि वेद प्रकाश शर्मा वेद का स्वागत करते स्थानिय क? - फोटो : SHAMLI
...बिन रंग के ही होली का त्योहार हो गया
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शामली। सरस साहित्य समिति की ओर से दुल्हेंडी के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि गाजियाबाद से पधारे वेद प्रकाश शर्मा वेद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समा बांध दिया। अनिल धीमान पोपट कामचोर ने हास्य व्यंग्य के कई रंग बिखेरे और श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। उन्होंने सुनाया कि खुलते ही आंख उनका दीदार हो गया, पहली नजर में ही उनसे प्यार हो गया। प्रकृति ने बिखेरी कुछ ऐसी रंगों की छटा, बिन रंग के ही होली का त्योहार हो गया।

प्रसिद्ध हास्य कवि अनिल धीमान पोपट कामचोर के निवास पर पवन कुमार पवन के निर्देशन में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने सरस्वती वंदना के साथ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ज्ञानेंद्र पांडेय ने जहां अवध भाषा में ब्रज की होली का सुंदर चित्रण किया, वहीं सांप्रदायिक समन्वय पर भी रचना भी सुनाई काश ! कहीं ऐसा हो जाता, हिंदू-मुस्लिम यदि मिल जाता। भरत यहां पर पैदा होते, रामराज्य फिर से आ जाता। त्यागो बर्बरता नादिर की, इसमें प्रेम कहां पलता है, पर ऐसा कहां हुआ करता है। पवन कुमार पवन ने होली पर खूब रंग बिखेरे । मुक्तक, छंद, तेवरी और गजलें सुनाकर समा बांध दिया। सुनाया कि मस्त माहौल हो तो होली है। नृत्य हो, ढोल हो, तो होली है। दिल में हो प्यार और होठों पर मीठे दो बोल हों, तो होली है ।।कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने भी अपनी कई रचनाएं सुनाकर खूब तालियां बटोरी। उन्होंने सुनाया कि क्या उमरें, क्या रिश्ते- नाते, मर्यादाएं, ना, ना, ना । छोट- बड़ाई पद- पैसे की, भेद- भीत तो कोई ना, ना, ना। गोष्ठी का संचालन प्रदीप मायूस ने अपनी गजलों और अपनी शेरों शायरी से खूब रंग जमाया। कहां रोना , कहां हंसना, कहां पर खिलखिलाना है। कहां पर शेर कहना है, कहां नगमा सुनाना है। हमारी जिंदगानी भी किसी सर्कस की मानिंद है, सभी जोकर हैं, और सबको यहां करतब दिखाना है। वेद प्रकाश शर्मा वेद ने कविता में यूं सुनाया-ऽमहारास का मतलब मैंने बदल लिया है, वह यमुना तट है, गंगा की धारा भी, कुरुक्षेत्र में टूटी अर्जुन कारा भी, तू जिसमें है वह आत्मबोध है, नई आंख में नई पौध है, यही प्यार का सार है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे ज्ञानेंद्र पांडेय को ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन शायर प्रदीप मायूस ने किया ।
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