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सऊदी अरब और हूतियों में बढ़ा तनाव?: रियाद में फिर सुनी गई धमाकों की आवाज, यमन में भी हुए हमले
Sat, 19 Sep 2026 10:02 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
आईएएनएस, रियाद
आईएएनएस, रियाद
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 19 Sep 2026 10:02 AM IST
सार
सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रियाद में एयर अलर्ट जारी किए गए हैं। वहीं, हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी ने उनके ठिकानों पर 26 हमले किए हैं। इन हमलों का असर अब सुरक्षा के साथ-साथ तेल सप्लाई पर भी पड़ता दिख रहा है।
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सऊदी अरब और हूतियों में बढ़ा तनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शनिवार तड़के धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। स्थानीय लोगों को मोबाइल ऐप के जरिए हवाई सुरक्षा संबंधी अलर्ट मिले। बाद में सऊदी नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा कि रियाद और अल-खर्ज में खतरा टल गया है। साथ ही, लोगों से अपील की गई कि वे निर्देशों का पालन करते रहें और भीड़ न लगाएं या वीडियो न बनाएं।
वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब ने पिछले 24 घंटों में उनके कब्जे वाले इलाकों पर 26 हमले किए हैं। ईरान-समर्थित इस गुट और यमन की रियाद-समर्थित सरकार के बीच देश में फिर से गृहयुद्ध छिड़ गया है। गुट ने कहा कि पिछले हफ्ते उनके ठिकानों पर सऊदी हमलों की संख्या 300 तक पहुंच गई है और इन हमलों में हूती-नियंत्रित यमन के कई इलाकों को निशाना बनाया गया।
पहले भी दी गई है चेतावनी
इससे पहले चेतावनी दी गई थी, 'अल-खर्ज गवर्नरेट में आपातकालीन स्थितियों के लिए राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी मंच ने खतरे की चेतावनी देने के लिए एक अलर्ट जारी किया है।' सऊदी सिविल डिफेंस ने बताया कि गुरुवार को पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ में हूती समूह के एक ड्रोन का मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। इस ड्रोन को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया था।
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दोनों के बीच बढ़ तनाव
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तनाव तेजी से बढ़ा है। हूतियों ने सऊदी शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें कई लोगों के घायल होने और घरों-वाहनों को नुकसान की खबर है। वहीं, सऊदी अरब ने भी यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही सऊदी का दावा है कि मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को भी मार गिराया गया, हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।
अब इस संघर्ष का असर सऊदी की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर भी पड़ा है। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को बताया है कि उन्हें अगले महीने यानी अक्तूबर में कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं मिलेगी। यूरोपीय रिफाइनर आम तौर पर अरामको से दीर्घकालिक अनुबंध के तहत हर महीने सऊदी कच्चा तेल खरीदते हैं, लेकिन इस बार अक्तूबर की डिलीवरी रोक दी गई है।
सऊदी अरब 48 एफ-35 लड़ाकू खरीदेगा
उधर, अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 24.3 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब रियाद हूतियों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वॉशिंगटन से सैन्य मदद मांग रहा था।
पाइपलाइन पर हमले का क्या असर हुआ?
यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।
क्यों हो रहे हैं यह हमले?
यह युद्ध 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जा करने के साथ शुरू हुआ था। 2022 से यह युद्ध काफी हद तक रुका हुआ था, लेकिन जुलाई में यह फिर से भड़क उठा। सऊदी अरब 2015 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। उसके दखल से युद्ध और तेज हो गया, जिससे इस गरीब देश में दुनिया के सबसे बुरे मानवीय संकटों में से एक पैदा हो गया है।
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वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब ने पिछले 24 घंटों में उनके कब्जे वाले इलाकों पर 26 हमले किए हैं। ईरान-समर्थित इस गुट और यमन की रियाद-समर्थित सरकार के बीच देश में फिर से गृहयुद्ध छिड़ गया है। गुट ने कहा कि पिछले हफ्ते उनके ठिकानों पर सऊदी हमलों की संख्या 300 तक पहुंच गई है और इन हमलों में हूती-नियंत्रित यमन के कई इलाकों को निशाना बनाया गया।
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पहले भी दी गई है चेतावनी
इससे पहले चेतावनी दी गई थी, 'अल-खर्ज गवर्नरेट में आपातकालीन स्थितियों के लिए राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी मंच ने खतरे की चेतावनी देने के लिए एक अलर्ट जारी किया है।' सऊदी सिविल डिफेंस ने बताया कि गुरुवार को पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ में हूती समूह के एक ड्रोन का मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। इस ड्रोन को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया था।
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दोनों के बीच बढ़ तनाव
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तनाव तेजी से बढ़ा है। हूतियों ने सऊदी शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें कई लोगों के घायल होने और घरों-वाहनों को नुकसान की खबर है। वहीं, सऊदी अरब ने भी यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही सऊदी का दावा है कि मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को भी मार गिराया गया, हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।
अब इस संघर्ष का असर सऊदी की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर भी पड़ा है। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को बताया है कि उन्हें अगले महीने यानी अक्तूबर में कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं मिलेगी। यूरोपीय रिफाइनर आम तौर पर अरामको से दीर्घकालिक अनुबंध के तहत हर महीने सऊदी कच्चा तेल खरीदते हैं, लेकिन इस बार अक्तूबर की डिलीवरी रोक दी गई है।
सऊदी अरब 48 एफ-35 लड़ाकू खरीदेगा
उधर, अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 24.3 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब रियाद हूतियों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वॉशिंगटन से सैन्य मदद मांग रहा था।
पाइपलाइन पर हमले का क्या असर हुआ?
यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।
क्यों हो रहे हैं यह हमले?
यह युद्ध 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जा करने के साथ शुरू हुआ था। 2022 से यह युद्ध काफी हद तक रुका हुआ था, लेकिन जुलाई में यह फिर से भड़क उठा। सऊदी अरब 2015 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। उसके दखल से युद्ध और तेज हो गया, जिससे इस गरीब देश में दुनिया के सबसे बुरे मानवीय संकटों में से एक पैदा हो गया है।