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थानाभवन ने अंग्रेजों को चटाई थी धूल
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थानाभवन में अंग्रेजों को चटाई थी धूल
शामली। आजादी की लड़ाई में कस्बा जलालाबाद और थानाभवन का अहम योगदान रहा। शामली में तहसील को बर्बाद कर दिए जाने के बाद अंग्रेज गुस्से में थे। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने थानाभवन में हमला किया। पहली लड़ाई में तो अंग्रेजों को हार का सामना करना, लेकिन दूसरी में वह कस्बे में दाखिल होने में कामयाब हो गए।
स्वतंत्रता सेनानी रघुनंदन वर्मा और सेवानिवृत्त जन सूचना निदेशक अरुण गुप्त की लिखी किताब ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर का योगदान’ में सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है। किताब में दर्ज है कि तहसील के बर्बाद होने के बाद अंग्रेजी सेना ने बदला लेने के लिए थानाभवन की ओर कूच कर दिया और 19 सितंबर 1857 को सवेरे छह बजे थानाभवन पहुंच गई। वहां रेती दरवाजे के सामने अपना तोपखाना लगा दिया। उधर, थानाभवन के सभी हिंदू-मुस्लिम दो तोपों के साथ कस्बे की चाहरदीवारी पर तैनात हो गए। अंग्रेजी फौज का तोप सरकार हाजी इमदादुल्ला का मुरीद था, इसलिए वह सीधे निशाना नहीं लगा रहा था। जबकि थानाभवन की तोपें सीधे अंग्रेजी सेना पर गोले दाग रहीं थी। अंग्रेज समझ रहे थे कि रात सुबह तक थानाभवन तबाह मिलेगा, लेकिन उल्टा हुआ। अंग्रेजी फौज को परास्त होकर मुजफ्फरनगर की ओर जाना पड़ा। इस लड़ाई में थानाभवन के बहुत से लोग मारे गए थे। अंग्रेजों ने समझ लिया कि पूरी तैयारी किए बिना थानाभवन को जीत पाना आसान नहीं है। सितंबर के आखिर में अंग्रेजी सेना ने पूरी ताकत के साथ थानाभवन पर दोबारा हमला किया। इस बार कस्बे के लोगों का गोला-बारूद खत्म हो गया और अंग्रेजों की तोप के गोल कस्बे में गिरकर फटते रहे।
कोई उम्मीद बाकी न देख औरतों और बच्चों को रात के अंधेरे में दूसरी जगह भेजा गया और फिर लोग छिपते-छिपाते रामपुर, गंगोह, कांधला आदि स्थानों पर चले गए। जब कोई मुकाबले के लिए नहीं रहा तो अंग्रेजी फौज अंदर दाखिल हुई और शहर के चारों दरवाजे ध्वस्त कर दिए गए। मकानों को आग लगा दी गई। इसके बाद कस्बे के करीब 132 लोगों को गिरफ्तार करके महाजनों वाली बगीची में फांसी पर लटका दिया गया।
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असगरी बेगम को जिंदा जला दिया गया
पुस्तक के पृष्ठ संख्या पर दर्ज है कि काजी अब्दुल रहीम की सौतेली मां असगरी बेगम को अंग्रेजों ने पकड़कर जिंदा जला दिया। वह किसी कस्बे से बाहर नहीं जा पाई थी। ठाकुर नवल सिंह व हरनाम सिंह को भी पकड़कर फांसी दे दी गई। हिमाचल सिंह को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाकर कालापानी भेज दिया गया। जहां 35 वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो गई। हाजी इमदादुल्ला, मौलाना कासिम और मौलाना रशीद अहमद गंगोही के वारंट जारी किए गए। उन पर शामली तहसील की बर्बादी और थानाभवन फसाद के जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया।
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शामली। आजादी की लड़ाई में कस्बा जलालाबाद और थानाभवन का अहम योगदान रहा। शामली में तहसील को बर्बाद कर दिए जाने के बाद अंग्रेज गुस्से में थे। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने थानाभवन में हमला किया। पहली लड़ाई में तो अंग्रेजों को हार का सामना करना, लेकिन दूसरी में वह कस्बे में दाखिल होने में कामयाब हो गए।
स्वतंत्रता सेनानी रघुनंदन वर्मा और सेवानिवृत्त जन सूचना निदेशक अरुण गुप्त की लिखी किताब ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर का योगदान’ में सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है। किताब में दर्ज है कि तहसील के बर्बाद होने के बाद अंग्रेजी सेना ने बदला लेने के लिए थानाभवन की ओर कूच कर दिया और 19 सितंबर 1857 को सवेरे छह बजे थानाभवन पहुंच गई। वहां रेती दरवाजे के सामने अपना तोपखाना लगा दिया। उधर, थानाभवन के सभी हिंदू-मुस्लिम दो तोपों के साथ कस्बे की चाहरदीवारी पर तैनात हो गए। अंग्रेजी फौज का तोप सरकार हाजी इमदादुल्ला का मुरीद था, इसलिए वह सीधे निशाना नहीं लगा रहा था। जबकि थानाभवन की तोपें सीधे अंग्रेजी सेना पर गोले दाग रहीं थी। अंग्रेज समझ रहे थे कि रात सुबह तक थानाभवन तबाह मिलेगा, लेकिन उल्टा हुआ। अंग्रेजी फौज को परास्त होकर मुजफ्फरनगर की ओर जाना पड़ा। इस लड़ाई में थानाभवन के बहुत से लोग मारे गए थे। अंग्रेजों ने समझ लिया कि पूरी तैयारी किए बिना थानाभवन को जीत पाना आसान नहीं है। सितंबर के आखिर में अंग्रेजी सेना ने पूरी ताकत के साथ थानाभवन पर दोबारा हमला किया। इस बार कस्बे के लोगों का गोला-बारूद खत्म हो गया और अंग्रेजों की तोप के गोल कस्बे में गिरकर फटते रहे।
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कोई उम्मीद बाकी न देख औरतों और बच्चों को रात के अंधेरे में दूसरी जगह भेजा गया और फिर लोग छिपते-छिपाते रामपुर, गंगोह, कांधला आदि स्थानों पर चले गए। जब कोई मुकाबले के लिए नहीं रहा तो अंग्रेजी फौज अंदर दाखिल हुई और शहर के चारों दरवाजे ध्वस्त कर दिए गए। मकानों को आग लगा दी गई। इसके बाद कस्बे के करीब 132 लोगों को गिरफ्तार करके महाजनों वाली बगीची में फांसी पर लटका दिया गया।
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असगरी बेगम को जिंदा जला दिया गया
पुस्तक के पृष्ठ संख्या पर दर्ज है कि काजी अब्दुल रहीम की सौतेली मां असगरी बेगम को अंग्रेजों ने पकड़कर जिंदा जला दिया। वह किसी कस्बे से बाहर नहीं जा पाई थी। ठाकुर नवल सिंह व हरनाम सिंह को भी पकड़कर फांसी दे दी गई। हिमाचल सिंह को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाकर कालापानी भेज दिया गया। जहां 35 वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो गई। हाजी इमदादुल्ला, मौलाना कासिम और मौलाना रशीद अहमद गंगोही के वारंट जारी किए गए। उन पर शामली तहसील की बर्बादी और थानाभवन फसाद के जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया।