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आठ साल पहले ट्रांसफार्मर चोरी होने के बाद भी बढ़ता रहा बिल
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शामली। विद्युत ट्रांसफार्मर आठ साल पहले चोरी होने के बाद भी किसान का विद्युत बिल बढ़ता रहा। शिकायत करने पर भी ट्रांसफार्मर रखने की बजाय उसे 1.61 लाख का डिमांड नोटिस थमा दिया गया। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है।
कैल शिकारपुर गांव निवासी ओमवीर पुत्र नाहर सिंह ने आयोग वर्ष 2017 में परिवाद दाखिल किया था। जिसमें बताया था कि 1998 में उनके पिता ने 5 हॉर्स पावर का विद्युत कनेक्शन लिया था। 2001 में पिता की मृत्यु के बाद भूमि और विद्युत कनेक्शन के वह स्वामी हो गए। 2009 में जिस खंभे से कनेक्शन दिया गया था, उसका ट्रांसफार्मर चोरी हो गया। नाहर सिंह ने इसकी सूचना विद्युत अधिकारियों को और एसडीएम शामली को दी। एसडीएम ने गढ़ीपुख्ता पुलिस को जांच के आदेश भी दिए थे। वह लगातार विभाग के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पड़ोसी खेत मालिक से 40 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पानी लेकर खेत की सिंचाई की। ट्रांसफार्मर रखवाने की बजाय वर्ष 2017 में 1.61 लाख का डिमांड नोटिस भेज दिया, जो सेवा में कमी है। जिस पर आयोग ने डिमांड नोटिस को निरस्त करने, देय शुल्क स्वीकार करते हुए प्रतिवादी के नाम कनेक्शन हस्तांतरित करने और आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट की क्षतिपूर्ति व अनुचित व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये अदा करने का फैसला सुनाया। वाद व्यय के रूप में भी 5 हजार रुपये देने होंगे। यह धनराशि 30 दिन में आयोग के खाते में जमा करानी होगी।
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कैल शिकारपुर गांव निवासी ओमवीर पुत्र नाहर सिंह ने आयोग वर्ष 2017 में परिवाद दाखिल किया था। जिसमें बताया था कि 1998 में उनके पिता ने 5 हॉर्स पावर का विद्युत कनेक्शन लिया था। 2001 में पिता की मृत्यु के बाद भूमि और विद्युत कनेक्शन के वह स्वामी हो गए। 2009 में जिस खंभे से कनेक्शन दिया गया था, उसका ट्रांसफार्मर चोरी हो गया। नाहर सिंह ने इसकी सूचना विद्युत अधिकारियों को और एसडीएम शामली को दी। एसडीएम ने गढ़ीपुख्ता पुलिस को जांच के आदेश भी दिए थे। वह लगातार विभाग के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पड़ोसी खेत मालिक से 40 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पानी लेकर खेत की सिंचाई की। ट्रांसफार्मर रखवाने की बजाय वर्ष 2017 में 1.61 लाख का डिमांड नोटिस भेज दिया, जो सेवा में कमी है। जिस पर आयोग ने डिमांड नोटिस को निरस्त करने, देय शुल्क स्वीकार करते हुए प्रतिवादी के नाम कनेक्शन हस्तांतरित करने और आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट की क्षतिपूर्ति व अनुचित व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये अदा करने का फैसला सुनाया। वाद व्यय के रूप में भी 5 हजार रुपये देने होंगे। यह धनराशि 30 दिन में आयोग के खाते में जमा करानी होगी।
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