{"_id":"5dd034f28ebc3e547d5424eb","slug":"temporary-shed-to-be-built-in-mandi-campus-for-destitute-cows-shamli-news-mrt4539489106","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेसहारा गोवंश के लिए मंडी परिसर में बनेंगे अस्थाई शेड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेसहारा गोवंश के लिए मंडी परिसर में बनेंगे अस्थाई शेड
विज्ञापन
शामली। डीएम अखिलेश कुमार ने कहा कि गो आश्रय स्थलों पर लगाए गए बोर्ड पर ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, पशु चिकित्साधिकारी, खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी के दूरभाष नंबर अंकित कराए जाएंगे। मंडी स्थल पर विचरण कर रहे बेसहारा गोवंश के लिए परिसर के कोने में अस्थाई शेड बनाकर भरण पोषण किया जाए।
शनिवार को कलक्ट्रेट में जिलास्तरीय अधिकारियों की डीएम ने बैठक ली। कहा कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्र पर आवश्यक संख्या में गोवंश को संरक्षित करें। उनके गोबर, गोमूत्र से रसायन रहित न्यून व्यय की खेती का मॉडल विकसित करें। गो आश्रय स्थलों पर अवशेष गोबर, गोमूत्र से कार्यरत गो श्रमिकों को कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करें। चीनी मिलों में गन्ने की बंडलिंग में प्रयोग जूना (अगोला) अलग निकाला जाए। जिससे गोवंश को चारे के रूप में प्रयोग करने हेतु गो आश्रय स्थलों को उपलब्ध कराया जाए। मंडी स्थल पर विचरण कर रहे गोवंश के लिए परिसर के कोने में अस्थाई शेड बनाकर भरण पोषण किया जाए। विभिन्न फैक्टरी, मिल व्यापारी व समाज के गो प्रेमियों को प्रोत्साहित कर गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश को गोद लेने व उनके बेहतर भरण पोषण हेतु सहयोग लिया जाए। निराश्रित गोवंश को ठंड से बचाव हेतु समुचित व्यवस्था की जाए। आश्रय स्थलों के शेड के खुले स्थानों को तीन दिन के अंदर तिरपाल आदि से ढकने की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन
शनिवार को कलक्ट्रेट में जिलास्तरीय अधिकारियों की डीएम ने बैठक ली। कहा कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्र पर आवश्यक संख्या में गोवंश को संरक्षित करें। उनके गोबर, गोमूत्र से रसायन रहित न्यून व्यय की खेती का मॉडल विकसित करें। गो आश्रय स्थलों पर अवशेष गोबर, गोमूत्र से कार्यरत गो श्रमिकों को कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करें। चीनी मिलों में गन्ने की बंडलिंग में प्रयोग जूना (अगोला) अलग निकाला जाए। जिससे गोवंश को चारे के रूप में प्रयोग करने हेतु गो आश्रय स्थलों को उपलब्ध कराया जाए। मंडी स्थल पर विचरण कर रहे गोवंश के लिए परिसर के कोने में अस्थाई शेड बनाकर भरण पोषण किया जाए। विभिन्न फैक्टरी, मिल व्यापारी व समाज के गो प्रेमियों को प्रोत्साहित कर गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश को गोद लेने व उनके बेहतर भरण पोषण हेतु सहयोग लिया जाए। निराश्रित गोवंश को ठंड से बचाव हेतु समुचित व्यवस्था की जाए। आश्रय स्थलों के शेड के खुले स्थानों को तीन दिन के अंदर तिरपाल आदि से ढकने की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन