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Shamli News: फेफड़ों के साथ शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा टीबी का बैक्टीरिया
Sat, 20 Jun 2026 01:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:24 AM IST
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शामली। टीबी रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया का संक्रमण फेफड़ों को खराब करने के साथ शरीर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। जिले में 2207 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है, जिनमें 1907 पल्मोनरी यानि फेफड़े प्रभावित वाले क्षय रोगी और 342 एक्स्ट्रा पल्मोनरी यानि फेफड़ों के साथ शरीर के अन्य हिस्से में भी टीबी होने के रोगी मिले हैं। चिकित्सकों का कहना है कि क्षय रोग के लक्षणों को नजर अंदाज न करें और समय पर जांच व उपचार कराएं।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अथर जमील ने बताया कि टीबी रोग फैलाने वाला बैक्टीरिया फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। बदलती जीवन शैली, प्रदूषण और कुपोषण आदि कई कारणों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया फेफड़ों से बाहर निकलकर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर देता है। इनमें लिम्फ नोड (गले की गांठ), हड्डियों में विशेष तौर से रीढ़ की हड्डी, पेट, दिमाग या गुर्दे की टीबी के रोगी सामने आ रहे हैं।
जिले में वर्तमान में 2249 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। इनमें 1907 मरीज पल्मोनरी और 342 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी वाले रोगी हैं। उनका कहना है कि टीबी के लक्षण नजर आने पर नजदीकी सीएचसी, पीएचसी या जिला अस्पताल में पहुंचकर जांच कराएं। अस्पताल में जांच व उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। समय पर नियमित उपचार व दवा लेने से मरीज ठीक हो जाता है। इसमें लापरवाही खतरनाक हो सकती है।
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लक्षण
- शरीर के किसी हिस्से गर्दन आदि में गांठ होना।
- हड्डियों या जोड़ों में लंबे समय तक दर्द रहना।
- शाम के समय हल्का बुखार और वजन का लगातार कम होना।
- पेट में सूजन या पाचन संबंधी समस्या होना।
- भूखा कम लगना।
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नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अथर जमील ने बताया कि टीबी रोग फैलाने वाला बैक्टीरिया फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। बदलती जीवन शैली, प्रदूषण और कुपोषण आदि कई कारणों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया फेफड़ों से बाहर निकलकर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर देता है। इनमें लिम्फ नोड (गले की गांठ), हड्डियों में विशेष तौर से रीढ़ की हड्डी, पेट, दिमाग या गुर्दे की टीबी के रोगी सामने आ रहे हैं।
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जिले में वर्तमान में 2249 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। इनमें 1907 मरीज पल्मोनरी और 342 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी वाले रोगी हैं। उनका कहना है कि टीबी के लक्षण नजर आने पर नजदीकी सीएचसी, पीएचसी या जिला अस्पताल में पहुंचकर जांच कराएं। अस्पताल में जांच व उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। समय पर नियमित उपचार व दवा लेने से मरीज ठीक हो जाता है। इसमें लापरवाही खतरनाक हो सकती है।
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लक्षण
- शरीर के किसी हिस्से गर्दन आदि में गांठ होना।
- हड्डियों या जोड़ों में लंबे समय तक दर्द रहना।
- शाम के समय हल्का बुखार और वजन का लगातार कम होना।
- पेट में सूजन या पाचन संबंधी समस्या होना।
- भूखा कम लगना।