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Shamli News: वाहनों के चालान से बचने के लिए अपना रहे हथकंडे

Mon, 10 Jun 2024 03:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Mon, 10 Jun 2024 03:28 AM IST
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Tactics are being adopted to avoid vehicle challan
शामली। चालान और गाड़ी को सीज होने से बचाने के लिए कुछ वाहन चालक तरह-तरह के तरीके निकाल रहे हैं। कुछ वाहन चालक फर्जी आईकार्ड बनवाकर तो कुछ अपने आप को विधायक मंत्री का रिश्तेदार बताकर चालान से बच रहे है। दो माह में परिवहन विभाग के पास इस तरह के 12 मामले सामने आए हैं। सभी में विभागीय अधिकारियों ने कार्रवाई की है। इस तरह के मामलों की बानगी
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केस-1
परिवहन विभाग की टीम शहर के झिंझाना रोड पर अभियान चला रही थी। इस दौरान कार में नौ लोग बैठकर जा रहे थे। रुकवाने पर चालक ने आईकार्ड दिखाते हुए खुद को हेड कांस्टेबल और मेरठ में तैनाती होना बताया। शक होने पर एआरटीओ ने जांच कराई तो पता चला कि चालक हेड कांस्टेबल नहीं है, बल्कि उसका कोई दूर का रिश्तेदार मुनीर हेड कांस्टेबल है। पुलिस से बचने के लिए उसने हेड कांस्टेबल का फर्जी कार्ड बनवाया हुआ है। कार को सीज किया और हेड कांस्टेबल को मामले की जानकारी दी गई।
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केस-2
एआरटीओ रोहित राजपूत के अनुसार एक मई को कैराना क्षेत्र में अभियान चला रहे थे। चेकिंग में कार चालक ने अपने आप को दिल्ली में विधायक का भाई बताया। फोन पर विधायक बनकर किसी से बात कराई। बाद में विधायक का नंबर लेकर बात की गई तो उसने इस तरह की किसी भी गाड़ी को छोड़ने से इनकार कर दिया। चालक शामली के काजीवाड़ा का अख्तर था, जिसने बताया कि उसने अपने दोस्त से विधायक बनकर बात कराई थी। कार का चालान किया गया।
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केस-3
परिवहन विभाग की टीम झिंझाना क्षेत्र में 28 मई को चेकिंग कर रही थी। गाड़ी रुकवाने पर चालक ने खुद को दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल बताया। साथ ही आई कार्ड भी दिखाया। शक होने पर जिस सरोजनी नगर थाने में हेड कांस्टेबल की तैनाती बताई जा रही थी, वहां पर पता किया गया तो हेड कांस्टेबल थाने में था। चालक दिल्ली के सरोजनी नगर के महेंद्र सिंह को सख्त चेतावनी दी गई और गाड़ी को सीज किया गया। दो माह के अंदर इस तरह के अब तक 12 मामले सामने आए चुके हैं।
पुलिस की टोपी खरीदकर रख लेते हैं कार में
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान जांच में सामने आया है कि चालान से बचने को कई चालक पुलिसकर्मी की खाकी टोपी खरीदकर कार में शीशे के पास रख लेते हैं, पूछने पर बताते हैं कि उनके परिवार के सदस्य पुलिस में एसआई है। जबकि जांच में परिवार में कोई भी पुलिसकर्मी नहीं निकलता है।

पुलिसकर्मी का फर्जी आई कार्ड बनाकर चालान से बचने का खेल करने, दोस्तों को विधायक, मंत्री बनाकर बात कराने वालों का ब्योरा संबंधित जिलों की पुलिस अधिकारियों को भी भेजा जाएगा, ताकि ऐसे लोगों पर नजर रखी जा सके। ऐसे लोगों की जांच के लिए दो टीमों का गठन किया गया। टीमों ने अभियान चलाया हुआ है। पुलिस अधिकारियों को भी मामले की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
- रोहित राजपूत, एआरटीओ, शामली
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