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Shamli News: 43 साल से बच्चों में शिक्षा का अलख जला रही सुनीता
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कैराना। आज के युग में नारी शक्ति दुनिया के हर काम में आगे बढ़ रही है। आकाश में फाइटर जेट उड़ाना हो अथवा घर में चूल्हे पर रोटी बनाकर परिवार का पेट भरना हो। हर क्षेत्र में नारी शक्ति अपना लोहा मनवा रही है। नगर में भी एक नारी शक्ति पिछले 43 सालों से शिक्षा की अलख जला कर बच्चों को शिक्षित कर रही है।
सत्यम कॉलोनी स्थित स्वामी विवेकानन्द स्कूल की प्रधानाचार्या सुनीता शर्मा 30 से अधिक गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। सुनीता शर्मा ने बताया कि उनके पति रामकुमार शर्मा पब्लिक इंटर कॉलेज में शिक्षक थे, जो अब रिटायर हो गए हैैं। उनके पास बच्चे शिक्षा लेने आते थे तो मुझे भी लगा कि आज के युग में विकास व उन्नति के लिए शिक्षा एक बहुत कारगर उपाय है। 1991 में उन्होंने अपने ससुर के सहयोग से स्कूल की स्थापना की थी। वह स्कूल को एक मंदिर व शिक्षा को तपस्या मानती हैं। स्कूल रूपी मंदिर में शिक्षा रूपी तपस्या करके बच्चा बड़ा होकर अपने पैरों पर खड़ा होता है। साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है। वह ह्यूशन में विश्वास नहीं रखती हैं। बच्चों को क्लास में ही अच्छे से पढ़ाया जा सकता है। स्कूल में 30 से अधिक गरीब बच्चे बिना फीस के ही शिक्षा ग्रहण करते हैं। नर्सरी से कक्षा 10 तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। कक्षा 9 व 10 की लड़कियों का अलग से सेक्सन बनाया गया है। उनकी लोगों से अपील है कि अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं ताकि वह समाज में सिर उठा कर अपना जीवन यापन करें।
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सत्यम कॉलोनी स्थित स्वामी विवेकानन्द स्कूल की प्रधानाचार्या सुनीता शर्मा 30 से अधिक गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। सुनीता शर्मा ने बताया कि उनके पति रामकुमार शर्मा पब्लिक इंटर कॉलेज में शिक्षक थे, जो अब रिटायर हो गए हैैं। उनके पास बच्चे शिक्षा लेने आते थे तो मुझे भी लगा कि आज के युग में विकास व उन्नति के लिए शिक्षा एक बहुत कारगर उपाय है। 1991 में उन्होंने अपने ससुर के सहयोग से स्कूल की स्थापना की थी। वह स्कूल को एक मंदिर व शिक्षा को तपस्या मानती हैं। स्कूल रूपी मंदिर में शिक्षा रूपी तपस्या करके बच्चा बड़ा होकर अपने पैरों पर खड़ा होता है। साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है। वह ह्यूशन में विश्वास नहीं रखती हैं। बच्चों को क्लास में ही अच्छे से पढ़ाया जा सकता है। स्कूल में 30 से अधिक गरीब बच्चे बिना फीस के ही शिक्षा ग्रहण करते हैं। नर्सरी से कक्षा 10 तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। कक्षा 9 व 10 की लड़कियों का अलग से सेक्सन बनाया गया है। उनकी लोगों से अपील है कि अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं ताकि वह समाज में सिर उठा कर अपना जीवन यापन करें।
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