{"_id":"63ebc9fb752040edda04ee2b","slug":"sugarcane-price-is-becoming-an-issue-dont-spoil-bjps-work-shamli-news-c-14-1-118529-2023-02-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"शामली: मुद्दा बन रहा गन्ने का दाम, बिगाड़ न दे भाजपा का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शामली: मुद्दा बन रहा गन्ने का दाम, बिगाड़ न दे भाजपा का काम
विज्ञापन
शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- गन्ने के दाम न बढ़ने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासत हो रही तेज
- किसान संगठन और विपक्ष के नेता हो रहे सरकार के खिलाफ मुखर
- भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि गन्ना मुद्दे से करते नजर आ रहे किनारा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। पंजाब-हरियाणा में गन्ना मूल्य की बढ़ोत्तरी हो गई है, लेकिन यूपी सरकार ने इस साल गन्ना मूल्य में कोई भी बढ़ोत्तरी नही की है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो कि गन्ना बेल्ट कहलाती है और गन्ना यहां राजनीति का बड़ा मुद्दा भी है। किसानों को उम्मीद थी प्रदेश सरकार अगले साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी करेगी, लेकिन मंगलवार को यूपी की कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी न होने से किसान हताश है। ऐसे में इस गन्ना दाम को लेकर विपक्ष और किसान संगठन जहां लगातार मुखर होते जा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता अपनी सरकार होने के कारण इससे बचते नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में गन्ना मुद्दा भाजपा के गले की फांस बन सकता है।
वर्ष 2022- 23 के गन्ना पेराई सत्र में हरियाणा सरकार ने गत 25 जनवरी को दस रुपये गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी करके 372 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। इस साल के गन्ना पेराई सत्र शुरु होते ही पंजाब सरकार ने पिछले साल की अपेक्षा इस साल बीस रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर नए पेराई सत्र में 380 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य कर दिया। उत्तराखंड राज्य में पहले से ही गन्ना मूल्य यूपी सरकार से पांच रुपये अधिक 355 रुपये प्रति क्विंटल है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सिंह चौधरी के आह्वान पर रालोद कार्यकर्ता पिछले एक माह से संदेश यात्रा के माध्यम से गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग कर रहे थे। यूपी में गन्ना 350 रुपये प्रति गन्ना मूल्य है। लोकसभा चुनाव 2024 को देखते किसानों इस साल गन्ना मूल्य बढ़ने की बेसब्री से इंतजार था। मंगलवार को यूपी की कैबिनेट बैठक में गन्ना मूल्य की कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई।
पूंजीपतियों की सरकार, अन्न दाताओं के साथ धोखा
किसानों के प्रति सरकार का रूख ठीक नहीं है। पूंजीपतियों की सरकार होने से कथनी और करनी में अंतर है। सरकार किसानो की आय दोगना करने का वादा कर रही थी।किसानों का दुर्भाग्य है कि सरकार ने गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है। अन्नदाताओं के साथ धोखा किया है। आय दोगुनी करने के स्थान पर एक चौथाई रह गई है।- प्रसन्न चौधरी, सदर विधायक।
विज्ञापन
उपज की लागत, डीजल, पेट्रोल मजदूरी महंगी, सरकार किसान विरोधी
मौजूदा समय में गन्ने की उपज की लागत डेढ़ से दो गुना हो गई है। डीजल-पेट्रोल, पेस्टीसाइड फर्टीलाइजर और मजदूरी बढ़ी है। किसान गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। यूपी कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसान हताश है। गन्ना मूल्य न बढ़ाकर सरकार ने किसान विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है।- अशरफ अली, विधायक थानाभवन क्षेत्र।
गन्ना मूल्य बढ़ा नहीं, किसानों का कैैसे भला हो
प्रदेश की कैबिनेट की बैठक में गन्ने का रेट न बढ़ने से किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसान के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। किसान की आय दोगुनी करने के नाम पर यह सरकार लगातार किसान को घाटे की खेती करने पर मजबूर कर रही है। यहां तो गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया जा रहा है। डीजल पेट्रोल के दाम खाद के दाम उर्वरकों के दाम खेत की मशीनरी किसी भी चीज के लगातार भाव बढ़ते जा रहे हैं। पिछले 7 सालों में इस सरकार में मात्र 35 पैसे किलो गन्ने का रेट बढ़ाने का काम किया है, ऐसे में कैसे किसान की आय दुगनी होगी कैसे किसान का भला होगा- चौधरी सवित मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान यूनियन।
मंहगाई बढ़ने के बावजूद गन्ना मूल्य न बढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण
इस सत्र के लिए गन्ना मूल्य बढ़ने का किसानों का विश्वास था कि योगी सरकार लागत मूल्यों के हिसाब से गन्ना मूल्यों में बढ़ोतरी करेगी। सरकारी आंकलन के हिसाब से ही सत्र 2021-22 में लागत मूल्य 310 रुपये क्विंटल था। यदि उसमें महंगाई की पिछले वर्ष की औसत वार्षिक सरकारी दर 5.88 प्रतिशत भी मान लिया जाए तो किसान को इस वर्ष महंगाई के कारण ही 20 रुपये क्विंटल का नुकसान होगा। प्रदेश के किसानों को हरियाणा के किसानों से 22 तथा पंजाब के किसानों से 30 रुपये क्विंटल कम मिलेगा। महंगाई बढ़ने के बाद भी गन्ना मूल्यों न बढ़ाने का निर्णय किसानों के साथ धोखा है। - प्रो. सुधीर पंवार, सपा नेता।
गन्ना किसानों को बड़ा झटका
प्रदेश गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 19 जनवरी को एक सप्ताह में गन्ना मूल्य घोषित करने की बात कही थी, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य पर वर्तमान सत्र में एक भी पैसा नहीं बढ़ाया गया, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। गन्ना किसान कर्ज के दलदल में है।- राजन जावला, रालोद नेता।
भाजपा नेताओं ने बयान देने से किया किनारा
गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी न करने के मामले में भाजपा नेताओं ने बयान देने से किनारा किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र तोमर से लेकर सांसद प्रदीप चौधरी गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने पर अपनी प्रक्रिया देने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि गन्ना मूल्य बढ़ना चाहिए था, मगर इस साल नहीं तो अगले गन्ना मूल्य में सरकार बढ़ोत्तरी करेगी।
विज्ञापन
- किसान संगठन और विपक्ष के नेता हो रहे सरकार के खिलाफ मुखर
- भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि गन्ना मुद्दे से करते नजर आ रहे किनारा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। पंजाब-हरियाणा में गन्ना मूल्य की बढ़ोत्तरी हो गई है, लेकिन यूपी सरकार ने इस साल गन्ना मूल्य में कोई भी बढ़ोत्तरी नही की है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो कि गन्ना बेल्ट कहलाती है और गन्ना यहां राजनीति का बड़ा मुद्दा भी है। किसानों को उम्मीद थी प्रदेश सरकार अगले साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी करेगी, लेकिन मंगलवार को यूपी की कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी न होने से किसान हताश है। ऐसे में इस गन्ना दाम को लेकर विपक्ष और किसान संगठन जहां लगातार मुखर होते जा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता अपनी सरकार होने के कारण इससे बचते नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में गन्ना मुद्दा भाजपा के गले की फांस बन सकता है।
वर्ष 2022- 23 के गन्ना पेराई सत्र में हरियाणा सरकार ने गत 25 जनवरी को दस रुपये गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी करके 372 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। इस साल के गन्ना पेराई सत्र शुरु होते ही पंजाब सरकार ने पिछले साल की अपेक्षा इस साल बीस रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर नए पेराई सत्र में 380 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य कर दिया। उत्तराखंड राज्य में पहले से ही गन्ना मूल्य यूपी सरकार से पांच रुपये अधिक 355 रुपये प्रति क्विंटल है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सिंह चौधरी के आह्वान पर रालोद कार्यकर्ता पिछले एक माह से संदेश यात्रा के माध्यम से गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग कर रहे थे। यूपी में गन्ना 350 रुपये प्रति गन्ना मूल्य है। लोकसभा चुनाव 2024 को देखते किसानों इस साल गन्ना मूल्य बढ़ने की बेसब्री से इंतजार था। मंगलवार को यूपी की कैबिनेट बैठक में गन्ना मूल्य की कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई।
विज्ञापन
पूंजीपतियों की सरकार, अन्न दाताओं के साथ धोखा
किसानों के प्रति सरकार का रूख ठीक नहीं है। पूंजीपतियों की सरकार होने से कथनी और करनी में अंतर है। सरकार किसानो की आय दोगना करने का वादा कर रही थी।किसानों का दुर्भाग्य है कि सरकार ने गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है। अन्नदाताओं के साथ धोखा किया है। आय दोगुनी करने के स्थान पर एक चौथाई रह गई है।- प्रसन्न चौधरी, सदर विधायक।
विज्ञापन
उपज की लागत, डीजल, पेट्रोल मजदूरी महंगी, सरकार किसान विरोधी
मौजूदा समय में गन्ने की उपज की लागत डेढ़ से दो गुना हो गई है। डीजल-पेट्रोल, पेस्टीसाइड फर्टीलाइजर और मजदूरी बढ़ी है। किसान गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। यूपी कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसान हताश है। गन्ना मूल्य न बढ़ाकर सरकार ने किसान विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है।- अशरफ अली, विधायक थानाभवन क्षेत्र।
गन्ना मूल्य बढ़ा नहीं, किसानों का कैैसे भला हो
प्रदेश की कैबिनेट की बैठक में गन्ने का रेट न बढ़ने से किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसान के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। किसान की आय दोगुनी करने के नाम पर यह सरकार लगातार किसान को घाटे की खेती करने पर मजबूर कर रही है। यहां तो गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया जा रहा है। डीजल पेट्रोल के दाम खाद के दाम उर्वरकों के दाम खेत की मशीनरी किसी भी चीज के लगातार भाव बढ़ते जा रहे हैं। पिछले 7 सालों में इस सरकार में मात्र 35 पैसे किलो गन्ने का रेट बढ़ाने का काम किया है, ऐसे में कैसे किसान की आय दुगनी होगी कैसे किसान का भला होगा- चौधरी सवित मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान यूनियन।
मंहगाई बढ़ने के बावजूद गन्ना मूल्य न बढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण
इस सत्र के लिए गन्ना मूल्य बढ़ने का किसानों का विश्वास था कि योगी सरकार लागत मूल्यों के हिसाब से गन्ना मूल्यों में बढ़ोतरी करेगी। सरकारी आंकलन के हिसाब से ही सत्र 2021-22 में लागत मूल्य 310 रुपये क्विंटल था। यदि उसमें महंगाई की पिछले वर्ष की औसत वार्षिक सरकारी दर 5.88 प्रतिशत भी मान लिया जाए तो किसान को इस वर्ष महंगाई के कारण ही 20 रुपये क्विंटल का नुकसान होगा। प्रदेश के किसानों को हरियाणा के किसानों से 22 तथा पंजाब के किसानों से 30 रुपये क्विंटल कम मिलेगा। महंगाई बढ़ने के बाद भी गन्ना मूल्यों न बढ़ाने का निर्णय किसानों के साथ धोखा है। - प्रो. सुधीर पंवार, सपा नेता।
गन्ना किसानों को बड़ा झटका
प्रदेश गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 19 जनवरी को एक सप्ताह में गन्ना मूल्य घोषित करने की बात कही थी, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य पर वर्तमान सत्र में एक भी पैसा नहीं बढ़ाया गया, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। गन्ना किसान कर्ज के दलदल में है।- राजन जावला, रालोद नेता।
भाजपा नेताओं ने बयान देने से किया किनारा
गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी न करने के मामले में भाजपा नेताओं ने बयान देने से किनारा किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र तोमर से लेकर सांसद प्रदीप चौधरी गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने पर अपनी प्रक्रिया देने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि गन्ना मूल्य बढ़ना चाहिए था, मगर इस साल नहीं तो अगले गन्ना मूल्य में सरकार बढ़ोत्तरी करेगी।

शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार

शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार

शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार

शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार

शामली गन्ना मूल्य से संबधित परिचर्चा फोटो प्रो. सुधीर पंवार