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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Some became reality, some dreams remain

कुछ हकीकत बने, तो कुछ सपने ही रह गए

Tue, 29 Dec 2015 12:47 AM IST
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला Updated Tue, 29 Dec 2015 12:47 AM IST
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शामली। साल 2015 खत्म हो रहा है। जिले में इस साल में शिक्षा विभाग से जुड़े कई निर्माण कार्य परवान नहीं चढ़ सके, तो कुछ अधूरे ही रह गए। बीएसए दफ्तर के निर्माण की स्वीकृति तो मिली, लेकिन उनका कार्य शुरू नहीं हो पाया। डीआईओएस दफ्तर के निर्माण के लिए शासन से बजट ही नहीं मिला। हालांकि दो मॉडल स्कूलों का निर्माण कार्य पूरा हुआ, तो भूरा में राजकीय इंटर कॉलेज के निर्माण का भी रास्ता साफ हुआ। पॉलीटैक्निक और आईटीआई का भी निर्माण कार्य चल ही रहा है।
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26 सितंबर 2011 को बनाए गए शामली जिले में निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी है। चार साल में भी जिले में विभागों के खुद के दफ्तर तक नहीं बन सके हैं। जिले में बीएसए दफ्तर बनत बीआरसी पर चल रहा है, तो डीआईओएस का दफ्तर वीवी इंटर कॉलेज में चल रहा है। इनमें से बीएसए दफ्तर के लिए बीआरसी पर ही भूमि चयनित कर प्रस्ताव भेजा गया था। जिसके लिए बजट जारी हुआ।
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 2015 में जिले के दौरे पर आए शासन के नोडल अधिकारी अजय कुमार सिंह ने बीएसए दफ्तर जिला मुख्यालय के पास ही बनाए जाने के निर्देश दिए। जिसके बाद मामला लटक गया और बीएसए दफ्तर का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। यही हाल डीआईओएस का भी है। डीआईओएस की ओर से भी बजट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जबकि इस साल इन दोनों विभागों के दफ्तरों का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद थी और साल के अंत तक निर्माण का आधा कार्य होने की आस थी।
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जिले में तीन मॉडल स्कूलों में से केवल दो का ही निर्माण कार्य पूरा हो सका है। गांव तितरवाड़ा में अभी भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। इसके अलावा जसाला में पिछले कई सालों से बन रही पॉलीटैक्निक का निर्माण भी अधूरा है। थानाभवन में राजकीय आईटीआई का निर्माण कार्य भी इस साल में पूरा नहीं हो सका। पिछले दो सालों से आईटीआई का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन एजेंसी की ढ़िलाई से आईटीआई के निर्माण में देरी होती चली गई। जिसके चलते इस वर्ष में आईटीआई चालू होने की उम्मीद नहीं है।

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