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सीता का हरण कर ले गया लंकापति रावण
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:15 AM IST
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ramleela
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। श्री हनुमान धाम के श्रीरामलीला मंच पर भरत मिलाप और सूर्पणखा की नाक कटने के साथ ही सीता हरण लीला का मंचन किया गया।
बृहस्पतिवार रात हुए मंचन में प्रथम दृष्य में भरत जी गुरुमाता व सभी अयोध्या वासियों को लेकर श्रीराम जी को वापस लेने चित्रकूट निकल पड़ते हैं। रास्ते में केवट मिलते हैं और सारा वृतांत सुनाते हैं कि कैसे एक भक्त का भगवान से मिलन व एक भाई का भाई से चित्रकूट में होता है। जिसके बाद भरत जी श्रीराम से मिलकर पिता दशरथ की मृत्यु के बारे में बताते हुए उन्हे वापस चलने के लिए कहता है।
श्रीराम कहते है कि मैं अपने वचनों से बंधा हुआ हूं। जिसके बाद भरत उनकी बात मानकर कहते है कि अगर 14 वर्ष से अधिक समय लगाओंगे तो भरत को जीवित नहीं देख पाओंगे। जिसके बाद वह श्रीराम की खडाऊं को सिर पर रखकर वापस अयोध्या निकल जाते हैं।
जिसके बाद अगले ही दृश्य में पंचवटी का मनोहर दर्शन जहां पर राम सीता और लक्ष्मण विराजमान है। घूमते हुए रावण की बहन सूर्णनखा का मन दोनो राजकुमारों को देखकर मचल उठता है। शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर वह भयंकर रुप धारण कर सीता पर झपटती है। लक्ष्मण उसके नाक, कान काट देता हैं। रावण को पता चलता है वह सभा को बीच में विराम करता है और सोचता है कि वह कोई साधारण मानव नहीं है। जिसके बाद वह अपने मित्र को मारीच को बुलाकर सारी बात बताता है।
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मारीज सोने का मृग बनकर पंचवटी में जाता है। राम मृगहाला लाने के लिए चले जाते। जिसके बाद मारीच लक्ष्मण लक्ष्मण पुकारता है और सीता घबरा जाती है। लक्ष्मण रेखा खींचकर चले जाते है। जिसके बाद साधू का वेश बनाकर रावण आता है और सीता का हरण कर लेता है। इस दौरान नरेंद्र सैनी, जोगेंद्र पाल आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार रात हुए मंचन में प्रथम दृष्य में भरत जी गुरुमाता व सभी अयोध्या वासियों को लेकर श्रीराम जी को वापस लेने चित्रकूट निकल पड़ते हैं। रास्ते में केवट मिलते हैं और सारा वृतांत सुनाते हैं कि कैसे एक भक्त का भगवान से मिलन व एक भाई का भाई से चित्रकूट में होता है। जिसके बाद भरत जी श्रीराम से मिलकर पिता दशरथ की मृत्यु के बारे में बताते हुए उन्हे वापस चलने के लिए कहता है।
श्रीराम कहते है कि मैं अपने वचनों से बंधा हुआ हूं। जिसके बाद भरत उनकी बात मानकर कहते है कि अगर 14 वर्ष से अधिक समय लगाओंगे तो भरत को जीवित नहीं देख पाओंगे। जिसके बाद वह श्रीराम की खडाऊं को सिर पर रखकर वापस अयोध्या निकल जाते हैं।
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जिसके बाद अगले ही दृश्य में पंचवटी का मनोहर दर्शन जहां पर राम सीता और लक्ष्मण विराजमान है। घूमते हुए रावण की बहन सूर्णनखा का मन दोनो राजकुमारों को देखकर मचल उठता है। शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर वह भयंकर रुप धारण कर सीता पर झपटती है। लक्ष्मण उसके नाक, कान काट देता हैं। रावण को पता चलता है वह सभा को बीच में विराम करता है और सोचता है कि वह कोई साधारण मानव नहीं है। जिसके बाद वह अपने मित्र को मारीच को बुलाकर सारी बात बताता है।
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मारीज सोने का मृग बनकर पंचवटी में जाता है। राम मृगहाला लाने के लिए चले जाते। जिसके बाद मारीच लक्ष्मण लक्ष्मण पुकारता है और सीता घबरा जाती है। लक्ष्मण रेखा खींचकर चले जाते है। जिसके बाद साधू का वेश बनाकर रावण आता है और सीता का हरण कर लेता है। इस दौरान नरेंद्र सैनी, जोगेंद्र पाल आदि मौजूद रहे।