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मदरसे में चहल पहल की जगह छाया रहा सूनापन
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जलालाबाद/थानाभवन (शामली)। अवैध रूप से जलालाबाद में रह रहे म्यांमार के तीन छात्र भाइयों और एक शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद मदरसा मिफ्ता उल-उलूम के माहौल में दो दिन के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। छात्रों की चहल कदमी और बातचीत वाले माहौल की जगह मंगलवार को मदरसे में सन्नाटा पसरा रहा। इस प्रकरण के बाद कई छात्रों के छुट्टी लेकर अपने घर जाने की चर्चा बनी रही।
घटना के बाद से मदरसे के माहौल में काफी बदलाव देखने को मिला है। हालांकि, आम दिनों की भांति मंगलवार को भी मदरसे की छुट्टी 11 बजे ही हो गई थी। मगर शोरगुल से परे दिनभर में मदरसे में शांत सा माहौल बना रहा। मदरसा के गेट पर ड्यूटी करने वाले ने बताया कि सभी छात्र पढ़ाई करने के बाद या तो अपने घर चले गए और जो यहां रहते हैं वे अपने कमरों पहुंच गए। चर्चा यह भी रही कि कई छात्र छुट्टी लेकर अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हालांकि वहां कोई मुख्य व्यक्ति ना मिलने की वजह से पुष्टि नहीं हो सकी।
पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर रखा था शिक्षक
कस्बा जलालाबाद में मंगलवार को हर चौराहे और दुकान पर इस मामले को लेकर चर्चा बनी रही। म्यांमार निवासी अब्दुल मजीद ने पूर्व में कस्बे के ही मदरसा दारूल उलूम में भी छात्रों को पढ़ाया है। इस मदरसे के सदर मौलाना यामीन ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर ही उसे अपने यहां पढ़ाने के लिए अनुमति प्रदान की थी। कुछ दिन पढ़ाने के बाद वो यहां से नौकरी छोड़कर चला गया। बताया कि उनके मदरसे में फिलहाल 75 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और सभी छात्र मदरसे में ही मौजूद हैं।
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घटना के बाद से मदरसे के माहौल में काफी बदलाव देखने को मिला है। हालांकि, आम दिनों की भांति मंगलवार को भी मदरसे की छुट्टी 11 बजे ही हो गई थी। मगर शोरगुल से परे दिनभर में मदरसे में शांत सा माहौल बना रहा। मदरसा के गेट पर ड्यूटी करने वाले ने बताया कि सभी छात्र पढ़ाई करने के बाद या तो अपने घर चले गए और जो यहां रहते हैं वे अपने कमरों पहुंच गए। चर्चा यह भी रही कि कई छात्र छुट्टी लेकर अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हालांकि वहां कोई मुख्य व्यक्ति ना मिलने की वजह से पुष्टि नहीं हो सकी।
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पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर रखा था शिक्षक
कस्बा जलालाबाद में मंगलवार को हर चौराहे और दुकान पर इस मामले को लेकर चर्चा बनी रही। म्यांमार निवासी अब्दुल मजीद ने पूर्व में कस्बे के ही मदरसा दारूल उलूम में भी छात्रों को पढ़ाया है। इस मदरसे के सदर मौलाना यामीन ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर ही उसे अपने यहां पढ़ाने के लिए अनुमति प्रदान की थी। कुछ दिन पढ़ाने के बाद वो यहां से नौकरी छोड़कर चला गया। बताया कि उनके मदरसे में फिलहाल 75 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और सभी छात्र मदरसे में ही मौजूद हैं।
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