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Shamli: राजस्थान मॉडल अपनाकर होगा पश्चिमी यूपी में नदियों का पुनरुद्धार, जल पुरुष राजेंद्र सिंह दिखा रहे राह

Sat, 14 Feb 2026 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Feb 2026 06:04 AM IST
सार

इसके लिए पहले चरण में शुक्रवार से उत्तर प्रदेश के 35 जिलों के जिला गंगा समिति और नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारियों को राजस्थान के धौलपुर में जल पुरुष राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण तीन दिन का है।

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Shamli: Rivers in western UP will be revived by adopting the Rajasthan model
राजस्थान के धौलपुर में नदियों के बचाने के लिए नमामि गंगे के अधिकारियों को टिप्स देते जल पुरुष राजेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ समेत कई जिलों में अब राजस्थान मॉडल की तर्ज पर नदियों का पुनरुद्धार कराया जाएगा। इसके लिए पहले चरण में शुक्रवार से उत्तर प्रदेश के 35 जिलों के जिला गंगा समिति और नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारियों को राजस्थान के धौलपुर में जल पुरुष राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण तीन दिन का है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अधिकारी अपने-अपने जिलों में नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए कार्ययोजना बनाकर काम शुरू किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री की पहल पर उत्तर प्रदेश में एक जिला-एक नदी योजना लागू की गई है। इसके तहत हर जिले में एक-एक नदी को चिह्नित कर उसके पुनर्जीवन और पुनरुद्धार के लिए कार्य किया जाएगा। अधिकारियों को इसी योजना के तहत राजस्थान में सफल मॉडल की बारीकियां समझाई जा रही हैं। शामली के नमामि गंगे परियोजना अधिकारी डॉ. सोनू कुमार ने बताया कि नदियों के पुनर्जीवन के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी सबसे बड़ा आधार है। जल पुरुष राजेंद्र सिंह के अनुभवों से यूपी के अधिकारी सीख ले रहे हैं।
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स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि राजस्थान में चंबल की सहायक नदियों बड़द, बभया, खर्राबाद और सैरनी के पुनरुद्धार में भी इसी मॉडल का उपयोग किया गया था। इसी वजह से यूपी के अधिकारियों को धौलपुर में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
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जनभागीदारी और पारदर्शिता होगा राजस्थान मॉडल का आधार
जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में अधिकारियों को बताया गया कि नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए आम लोगों, संतों, उलमाओं और सामाजिक संगठनों को जोड़ना जरूरी है। समाज को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि नदियों को बचाने में उसकी भूमिका भी तय हो।


इसके साथ ही नदियों के लिए आने वाले बजट और कार्यों की जानकारी जनता के सामने सार्वजनिक रखी जाएगी। गांव स्तर पर योजना लोगों से चर्चा करके तैयार कराई जाएगी, ताकि यह साफ रहे कि कितना काम सरकार करेगा और कितना समाज के सहयोग से होगा।

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